Skip to main content

एनएसयूआई का स्थापना दिवस आज पूरे प्रदेश में हर्षोल्लास के साथ मनाया

एनएसयूआई का स्थापना दिवस आज पूरे प्रदेश में हर्षोल्लास के साथ मनाया

 71 वें गणतंत्र दिवस के सम्मान में दौड़ लगाने वाले नन्हें धावक वरेण्यम शर्मा का सम्मान किया गया


भोपाल -: भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन का आज प्रदेश की सभी जिला इकाईयों द्वारा हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया देश के सबसे बड़े छात्र संगठन एन.एस.यु.आई . के स्थापना दिवस पर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में झण्डावंदन के साथ प्रारंभ हुआ , खुशी का इजहार करते हुए मिस्ठान का वितरण किया गया । एन.एस.यु.आई.के प्रदेश प्रवक्ता सुहृद तिवारी ने बताया कि स्थापना दिवस का कार्यक्रम आज पूर्णतः सादगी के साथ मनाया गया । 

प्रदेश में कोराना महामारी के चलते कोरोना गाईड लाईन का पालन किया गया , कोरोना के बचाव के लिए आज मास्क व सेनेटाईजर वितरण किए गए , वृक्षारोपण , गौशाला में जाकर गौ सेवा की एवं साथ 71 वें गणतंत्र दिवस के सम्मान में एम.पी. के नन्हें बालक वरेण्यम शर्मा ने 7100 मीटर की दौड़ लगाई थी जिसका आज सम्मान किया जिसमें सटिफिकेट के साथ एक ( प्रतीक चिन्ह ) मोमेटों भेंट किया गया और वरेण्यम के उज्वल भविष्य की कामना की । 


संगठन के प्रदेशाध्यक्ष एवं विधायक विपिन वानखेड़े ने आज स्थापना दिवस के अवसर पर एन . एस.यु.आई.के प्रदेश पदाधिकारियों जिला पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दी और कहा कि देश की पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनेत्री स्व.इंदिरा गांधी जी ने आज ही के दिन 9 अप्रेल 1970 को छात्रो लोकतांत्रिक अधिकार दिये जाने हेतु छात्रों का पूर्ण और राजनैतिक संगठन एन.एस. यु.आई का गठन किया गया था । उन्होंने कहा कि छात्रों की हितो की लड़ाई के लिए पूर्ण समर्पण भाव से कार्य कर संगठन के माध्यम से छात्रों की कठिनाईयों का त्वरित निराकरण करने के हर संवभ प्रयास करते रहे । 


संगठन के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता एवं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी ने संगठन के पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि छात्रों को संगठन से जोड़ने के प्रयास करते रहे और कांग्रेस पार्टी की मजबुती के लिए बेहतर कार्य करते रहे । 

एन.एस.यु.आई. भोपाल के जिला अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के प्रागंण मे झण्डावंदन कर छात्रों को शपथ दिलाई एवं कोरोना महामारी की नई गाईड लाईन का पालन करते सोशल डिस्टेसिंग का पालन कर मास्क पहनने की अपील की । 


स्थापना दिवस के अवसर पर म.प्र.कांग्रेस सेवादल के ध्वज प्रभारी मुईनउद्दीन सिद्दीकी म.प्र . युवा कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी , एन.एस.यु.आई. के जिला अध्यक्ष आशुतोष चौकसे मेडिकल विंग प्रदेश समन्वयक रवि परमार , सोशल मीडिया प्रदेश समन्वयक अक्षय तोमर , समर्थ समाधिया , आदित्य सोनी , आदर्श ठाकुर तथा भव्य सक्सेना आदि उपस्थित थे । 


Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य