Skip to main content

अंतर्राज्यीय सीमाएँ सील करने पर किया जा रहा है विचार - गृह मंत्री डॉ. मिश्रा

 अंतर्राज्यीय सीमाएँ सील करने पर किया जा रहा है विचार - गृह मंत्री डॉ. मिश्रा

कोरोना की चेन तोड़ने के लिये सख्ती जरूरी 

भोपाल : गुरूवार, अप्रैल 29, 2021


गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया है कि कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिये सख्ती से इसकी चेन को तोड़ना जरूरी है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 16 जिलों में कोरोना नियंत्रण के लिये किये जा रहे उपायों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान अंतर्राज्यीय सीमाओं को सील करने पर भी विचार किया गया।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि समीक्षा के दौरान सभी ने कोरोना की चेन को तोड़ने के लिये सख्ती पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर बस परिवहन सेवाओं को बंद करने का निर्णय लिया जाकर आदेश जारी कर दिये गये हैं। राज्यों की सीमाओं पर आवागमन से संक्रमण को रोकने के उपाय प्रभावित हो रहे हैं। आवागमन के कारण संक्रमण की चेन को तोड़ने की कार्यवाही भी प्रभावित हो रही है। इसलिये अंतर्राज्यीय सीमाओं को सील करने पर विचार किया गया।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि बैठक में मुख्यमंत्री श्री चौहान का कहना है कि कोरोना की कठिन परिस्थिति में भी आम जनता को परेशान नहीं होने दिया जायेगा। किसानों के खाते में मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 7 मई को पहली किश्त के रूप में 1480 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जायेगी। किसानों की ऋण अदायगी की सीमा 30 मार्च को बढ़ाकर पहले 30 अप्रैल किया गया था। इसे अब बढ़ाकर 31 मई कर दिया गया है। अब किसानों के 31 करोड़ रुपये के ब्याज का भुगतान भी प्रदेश सरकार द्वारा किया जायेगा। डॉ. मिश्रा ने बताया कि गरीबों को 3 महीने का मुफ्त राशन भी दिये जाने के निर्देश दिये हैं।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि ग्रुप-बी के 16 जिलों में कोरोना नियंत्रण की समीक्षा की गई। कोरोना नियंत्रण के लिये किये गये प्रयासों से बेहतर परिणाम सामने आने लगे हैं। संक्रमण की दर में कमी आई है। किल कोरोना अभियान को और प्रभावी रूप से चलाने के निर्देश दिये गये हैं। आम जनता से संक्रमण से बचाव के लिये संभावित शादियों को टालने का अनुरोध किया गया। कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया कि अपरिहार्य स्थिति में अधिकतम 10 लोगों की उपस्थिति में विवाह की अनुमति प्रदान की जाये।

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

चौऋषिया दिवस (नागपंचमी) पर चौऋषिया समाज विशेष, नाग पंचमी और चौऋषिया दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति और अर्थ: श्रावण मास में आने वा ली नागपंचमी को चौऋषिया दिवस के रूप में पुरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "चतुरशीतिः" से हुई हैं जिसका शाब्दिक अर्थ "चौरासी" होता हैं अर्थात चौऋषिया समाज चौरासी गोत्र से मिलकर बना एक जातीय समूह है। वास्तविकता में चौऋषिया, तम्बोली समाज की एक उपजाति हैं। तम्बोली शब्द की उत्पति संस्कृत शब्द "ताम्बुल" से हुई हैं जिसका अर्थ "पान" होता हैं। चौऋषिया समाज के लोगो द्वारा नागदेव को अपना कुलदेव माना जाता हैं तथा चौऋषिया समाज के लोगो को नागवंशी भी कहा जाता हैं। नागपंचमी के दिन चौऋषिया समाज द्वारा ही नागदेव की पूजा करना प्रारम्भ किया गया था तत्पश्चात सम्पूर्ण भारत में नागपंचमी पर नागदेव की पूजा की जाने लगी। नागदेव द्वारा चूहों से नागबेल (जिस पर पान उगता हैं) कि रक्षा की जाती हैं।चूहे नागबेल को खाकर नष्ट करते हैं। इस नागबेल (पान)से ही समाज के लोगो का रोजगार मिलता हैं।पान का व्यवसाय चौरसिया समाज के लोगो का मुख्य व्यवसाय हैं।इस हेतू समाज के लोगो ने अपन