Skip to main content

उज्जैन जिले के सभी नगरी निकाय की निर्धारित सीमा के अंतर्गत धारा 144 के तहत 12 अप्रैल से 19 अप्रैल तक कोरोना कर्फ्यू लागू

 

उज्जैन 11 अप्रैल । कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री आशीष सिंह ने आज आदेश जारी कर कोरोना संक्रमण को रोकने व आमजन के स्वास्थ्य एवं जीवन को लेकर उतपन्न हो रही परिस्थितियों पर नियंत्रण करने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत 12 अप्रैल कि सुबह 6:00 बजे से 19 अप्रैल की सुबह 6:00 बजे तक कोरोना कर्फ्यू लगाने के आदेश जारी कर दिए है । उक्त अवधि में उज्जैन जिले के नगरीय निकायों की सीमा अंतर्गत रहने वाले किसी व्यक्ति को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी । सार्वजनिक स्थानों जैसे पार्क, गार्डन, मैदान ,सामाजिक परिसर , मॉर्निंग वॉक ,इवनिंग वॉक ,शॉपिंग मॉल ,शैक्षणिक संस्थाएं, क्रीड़ा स्थल, जिम ,धरना प्रदर्शन ,ज्ञापन , जुलूस आदि प्रतिबंधित कर दिए गए हैं । जिले के सभी नगरीय निकाय के समस्त धार्मिक स्थल आमजन के लिए बंद रहेंगे। सांकेतिक रूप से दैनिक धार्मिक गतिविधियों के संपादन हेतु संबंधित पुजारी , इमाम ,पादरी , ज्ञानी को उपासना स्थल में आवागमन के अनुमति रहेगी । जिले के समस्त नगरीय निकायों के व्यावसायिक प्रतिष्ठान एवं शराब की दुकानें पूर्णता बंद रहेगी।

जारी किए प्रतिबंधात्मक आदेश मैं निम्नांकित छूट प्रदान की गई है :-
1 . उक्त प्रतिबंध इमरजेंसी ड्यूटी जैसे स्वास्थ्य सेवाएं ,नगरी निकाय, पुलिस, स्थानीय प्रशासन ,लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, संचार सेवाएं ,बैंक ,एटीएम, पोस्ट ऑफिस , मीडिया कर्मी तथा न्यूज़ पेपर व पेपर से संबंधित हॉकर की सेवाएं चालू रहेगी। केंद्र एवं राज्य सरकार के सभी शासकीय , अर्ध शासकीय कार्यालय शासन द्वारा निर्धारित शेड्यूल एवं स्थानीय आवश्यकतानुसार खुले रहेंगे। संबंधित विभाग के नियंत्रण कर्ता अधिकारी आवश्यकता अनुसार कार्यालय में कर्मचारियों की उपस्थिति की संख्या कम करने पर आवश्यक निर्णय ले सकेंगे। उक्त सेवाओं से संबंधित व्यक्तियों को आवागमन हेतु अपने विभागीय पहचान पत्र अपने पास रखना होंगे।
2. शासन द्वारा संचालित कोविड-19 टीकाकरण अभियान निरंतर जारी रहेगा। टीकाकरण हेतु आवागमन कर रहे नागरिकों व कर्मचारियों को आवश्यक छूट प्राप्त होगी।
3 .शासन द्वारा संचालित गेहूं उपार्जन कार्यक्रम निरंतर जारी रहेगा ।इस कार्यवाही में संलग्न अधिकारी ,कर्मचारी , हम्माल , तुलावटी एवं विक्रय कर्ता कृषक तथा वाहन आदि प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे ।
4. थोक फल एवं सब्जी मंडी ,अनाज मंडी के नियमित गतिविधियां पूर्णतया चालू रहेगी ।किंतु लोकल स्थानीय फुटकर सब्जी फल मंडी एवं हाट बाजार प्रतिबंधित रहेंगे । सब्जी फल विक्रेता हाथ ठेले के माध्यम से चलायमान स्तिथि में सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनकर फल एवं सब्जी का विक्रय उपभोक्ताओं कर सकेंगे । थोक फल व सब्जी मंडी से फुटकर विक्रय प्रतिबंधित रहेगा।
5. सभी विनिर्माण उद्योग प्रारंभ रहेंगे। उद्योगों में तैयार माल और कच्चे माल का परिवहन चालू रहेगा । अतः आवागमन में सुविधा हेतु विनिर्माण उद्योग में संलग्न मजदूरों कर्मचारियों एवं अधिकारियों को अपने संस्थान द्वारा जारी परिचय पत्र धारण करना अनिवार्य होगा।
6 . किराना दुकान थोक एवं खेरची, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें, पेट्रोल पंप ,गैस एजेंसी , आटा चक्की एवम पशु आहार आदि की अत्यावश्यक सेवाओं से संबंधित प्रतिष्ठान प्रातः 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुली जा सकेगी। आमजन अपने निवास स्थल के निकट स्थित प्रतिष्ठान से ही आवश्यक सामग्री क्रय कर सकेंगे ।किसी भी प्रतिष्ठान के अंदर दुकानदार को छोड़कर एक समय में अधिकतम 5 ग्राहक ही उपस्थिति रह सकेंगे ।दुकानों में सोशल डिस्टेंसिंग , मास्क धारण करने , सेनेटाइज करने जैसे सुरक्षात्मक प्रावधानों का पालन करने का उत्तरदायित्व संबंधित दुकानदार का होगा।
7. जिले में मालवाहक वाहनों को आने जाने की अनुमति रहेगी.
8 . आईटी कंपनियां तथा बीपीओ कंपनियों के सपोर्ट स्टाफ को आवश्यक छूट प्राप्त होगी इस हेतु उन्हें कंपनी द्वारा जारी परिचय पत्र धारण करना होगा.
9. दूध की दुकान , दूध के हाकर्स व दूध डेयरी प्रातः 6:00 बजे से प्रातः 10:00 बजे तक एवं शाम 6:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक खुली रहेगी।
10 . स्वास्थ्य चिकित्सा सेवाओं( केमिस्ट व अस्पताल ) से संबंधित समस्त प्रतिष्ठान व दवाई दुकान निरंतर संचालित रहेगी ।
11 . शव यात्रा में अधिकतम 20 व्यक्ति शामिल हो सकेंगे
12 . शादी वैवाहिक कार्यक्रम में अनुमति के साथ अधिकतम 50 व्यक्ति सम्मिलित हो सकेंगे ।
13 . परीक्षा केंद्रों पर आने एवं जाने वाले परीक्षार्थी तथा परीक्षा केंद्र एवं परीक्षा आयोजन से जुड़े कर्मी अधिकारीगण प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे।
14 . बस स्टैंड , रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट से आने जाने वाले नागरिक को टिकट दिखाए जाने पर प्रतिबंध से छूट रहेगी ।
उक्त आदेश का उल्लंघन भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता 1860न की धारा 188 तथा डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत दंडनीय अपराध होगा । यह आदेश तत्काल प्रभाव से हो गया है ।



Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य