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आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री जी के उद्बोधन से हुआ ; विक्रम विश्वविद्यालय में हुआ प्रधानमंत्री जी के उद्बोधन का प्रसारण एवं आजादी के अमृत महोत्सव पर केंद्रित संगोष्ठी का आयोजन

 आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री जी के उद्बोधन से हुआ

विक्रम विश्वविद्यालय में हुआ प्रधानमंत्री जी के उद्बोधन का  प्रसारण एवं आजादी के अमृत महोत्सव पर केंद्रित संगोष्ठी का आयोजन   


स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्तर पर हुआ। दिनांक 12 मार्च 2021, शुक्रवार को प्रातः 10:00 बजे अहमदाबाद में आयोजित महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के उद्बोधन का दूरदर्शन से प्रसारण किया गया।

विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सभागार में उपस्थित शिक्षकों, अधिकारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के मध्य इस महत्त्वपूर्ण उद्बोधन का जीवन्त प्रसारण किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने संबोधित करते हुए कहा कि आज  स्वाधीनता आंदोलन के अनेक महत्त्वपूर्ण स्थल साबरमती आश्रम से जुड़ रहे हैं। देश में अनेक स्थानों पर आज आजादी के अमृत महोत्सव का श्रीगणेश हो रहा है। भारत प्रगति के नए सोपानों पर आगे बढ़ रहा, इस मौके पर आत्मनिर्भर इनक्यूबेटर का शुभारंभ हुआ है। भक्ति आंदोलन और सिख गुरुओं के त्याग और बलिदान ने आजादी के आंदोलन की पीठिका तैयार की। हम राष्ट्र के लिए समर्पित असंख्य बलिदानों का स्मरण करने हुए उन महान आत्माओं को नमन करें।    

विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी - एसओईटी के सभागार में प्रधानमंत्री जी  महत्त्वपूर्ण उद्बोधन के जीवन्त प्रसारण के पश्चात संगोष्ठी का आयोजन प्रभारी  कुलपति प्रो एच पी सिंह की अध्यक्षता में किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि नमक सत्याग्रह हमें आत्म गौरव और आत्मनिर्भरता के साथ जोड़ता है। देश के अमर वीरों ने अपने जज्बे और जुनून के साथ आजादी के लिए प्राणों का उत्सर्ग किया। हमें अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व होना चाहिए। 

प्रभारी कुलसचिव डॉ डी के बग्गा ने कहा कि मूलभूत अधिकारों की रक्षा के साथ नमक सत्याग्रह स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बना। भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार आजादी के अमृत महोत्सव से जुड़े हुए विभिन्न आयोजन विक्रम विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों में किए जाएंगे। 

कला संकायाध्यक्ष प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने व्याख्यान में  कहा कि मालवा सहित देश के विभिन्न भागों में बसे किसानों, विद्रोही सैनिकों, जनजातीय समुदाय के लोगों और आम इंसानों ने स्वप्रेरणा से आजादी के आंदोलन में अपना सर्वस्व न्योछावर किया। महिदपुर के सेनानी सदाशिवराव, अमझेरा के राजा बख्तावरसिंह, सोंधवाड़ के वीर अमर जी, अभय जी सहित अनेक महानायकों ने  भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी। ऐसे अनेक अमर सेनानियों से जुड़े हुए पुरातात्विक साक्ष्य, ऐतिहासिक प्रमाण, साहित्यिक साक्ष्य और लोक सांस्कृतिक साक्ष्यों के संचयन और व्यापक अनुसंधान की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में प्रभारी कुलपति प्रो एच पी सिंह,  कुलसचिव डॉ डी के बग्गा, कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, डीएसडब्ल्यू डॉ आर के अहिरवार, एसओईटी के प्रभारी निदेशक डॉ विष्णु सक्सेना आदि ने वाग्देवी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। 

संचालन एसओईटी के प्रभारी निदेशक डॉ विष्णु सक्सेना ने किया। आभार प्रदर्शन आचार्य डॉ प्रेमलता चुटैल ने किया। 

आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर विक्रम विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सभागार में आयोजित शुभारंभ एवं संगोष्ठी में विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, निदेशकगण,  शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। 

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