Skip to main content

उज्जैन, विदिशा, ग्वालियर, नरसिंहपुर, सौंसर में भी रविवार को लॉकडाउन ; मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की

कोरोना की रोकथाम एवं उपचार सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री श्री चौहान

क्राइसिस मेनेजमेंट ग्रुप की बैठकें कर जिलेवार रणनीति बनाएँ
विदिशा, उज्जैन, ग्वालियर, नरसिंहपुर, सौंसर में भी रविवार को लॉक डाउन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की
 

भोपाल : शुक्रवार, मार्च 26, 2021

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में कोरोना की रोकथाम एवं उपचार सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी ज़िले क्राइसिस मेनेजमेंट ग्रुप की बैठकें कर जिलावार रणनीति बनाएँ। हमें हर हालत में कोरोना का संक्रमण रोकना है और जिन जिलों में संक्रमण नहीं है या कम है वहाँ संक्रमण नहीं फैलने देना है। विदिशा, उज्जैन, ग्वालियर, नरसिंहपुर तथा सौंसर में भी रविवार को लॉक डाउन रहेगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, पुलिस महानिदेशक श्री विवेक जौहरी, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान और अपर मुख्य सचिव गृह श्री राजेश राजौरा उपस्थित थे।

एक सप्ताह में दोगुने हुए प्रकरण

प्रदेश में गत एक सप्ताह में कोरोना के प्रकरण दोगुने हो गए हैं। एक्टिव प्रकरण 11 हजार 168 हैं। कोरोना की गत एक सप्ताह की औसत पॉजिटिविटी दर 6.3 प्रतिशत है, जो देश की साप्ताहिक औसत दर 4.6 से अधिक है।

इंदौर में सबसे ज़्यादा 612 प्रकरण

कोरोना की जिलेवार समीक्षा में बताया गया कि सर्वाधिक नए प्रकरण इंदौर में 612 हैं। भोपाल में 425, जबलपुर में 156, उज्जैन में 83, रतलाम में 65, ग्वालियर में 63, खरगोन में 60, बैतूल में 54, सागर में 44, बड़वानी में 37, छिंदवाड़ा में 35, नरसिंहपुर 33, शहडोल में 27, बालाघाट में 26 और शाजापुर में 22 नए प्रकरण हैं। शेष ज़िलों में 20 से कम प्रकरण हैं।

अस्पतालों में पूरी तैयारी रखें

कोरोना के अधिकांश मरीज़ होम आइसोलेशन में हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि सभी जिलों में अस्पतालों में कोरोना के उपचार की श्रेष्ठतम व्यवस्था रखें। आवश्यकता होने पर होम आइसोलेशन से अस्पताल ले जाने की तुरंत व्यवस्था हो।

कोरोना से निबटने की तिहरी रणनीति

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए हम तिहरी रणनीति अपना रहे हैं। पहला संक्रमण रोकने के सभी उपाय करना, दूसरा अस्पतालों में कोरोना के उपचार की श्रेष्ठतम व्यवस्था और तीसरा प्रदेश में तेजी से वैक्सीनेशन करवाना, जिससे कोरोना का संकट कम से कम हो सके।

अर्थ-व्यवस्था को नुकसान पहुँचाए बिना कोरोना नियंत्रण

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पूरा लॉकडाउन अर्थ-व्यवस्था को ध्वस्त और लोगों को बेरोजगार कर देता है। हमारा पूरा प्रयास रहेगा कि अर्थ-व्यवस्था को नुकसान भी न पहुँचे और हम कोरोना के संकट से प्रदेश को सुरक्षित बाहर निकाल पाएँ। इसके लिए जो भी आवश्यक उपाय होंगे, किए जाएंगे।

'मेरा मास्क-मेरी सुरक्षा' अभियान

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए जन-जागरूकता बहुत आवश्यक है। इसके लिए प्रदेश में 'मेरा मास्क-मेरी सुरक्षा' अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत लोगों में मास्क बाँटे जा रहे हैं तथा उन्हें मास्क पहनने के लिए जागरूक किया जा रहा है। मास्क पहनने से कोरोना से 90 प्रतिशत सुरक्षा होती है।

घर पर ही मनाये आगामी त्यौहार

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोरोना का संक्रमण न फैले इसके लिए सभी लोग आगामी त्यौहार घर पर ही रहकर पूरी श्रद्धा एवं आस्था के साथ मनाये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जिन जिलों में कोरोना के 20 से अधिक प्रकरण हैं वहाँ होलीका दहन एवं शबे-बारात प्रतीकात्मक रूप से ही हों। कहीं भी भीड़ नहीं हो, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए।

ये सावधानियाँ बरतें

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सभी लोग मास्क अनिवार्य रूप से लगाएँ, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, हाथों को साफ रखें, सेनेटाइज करते रहें तथा निर्धारित कार्यक्रम अनुसार वैक्सीन अवश्य लगवाएँ। मास्क आपको संक्रमित होने से बचाता है, सोशल डिस्टेंसिंग से आप कोरोना के कैरियर नहीं बनते, सैनिटाइजर कोरोना वायरस को मारता है। वैक्सीनेशन से कोरोना के विरुद्ध आपके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न होती है। अतः कोरोना से बचने के लिए इन सभी सावधानियों का आवश्यक रूप से पालन करें।

30 अप्रैल तक गाइडलाइन दरों पर ही रजिस्ट्री

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आगामी 30 अप्रैल तक प्रचलित गाइडलाइन दरों पर ही रजिस्ट्री होंगी, दर नहीं बढ़ाई जाएगी। अतः रजिस्ट्री कराने में जल्दबाजी न की जाए।

समर्थन मूल्य पर खरीदी 27 मार्च से

प्रदेश के उज्जैन एवं इंदौर संभागों में समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीदी 27 मार्च से प्रारंभ हो रही है। शेष संभागों में खरीदी 1 अप्रैल से प्रारंभ होगी। साथ ही सभी संभागों में 27 मार्च से ही चना, मसूर एवं सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीदी प्रारंभ हो रही है।

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक