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उदीयमान भारत के लिए विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक बदलाव की जरूरत

उदीयमान भारत के लिए विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक बदलाव की जरूरत

उदीयमान भारत में शिक्षा, साहित्य, संस्कृति एवं समाज : चुनौतियां और संभावनाएं पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं राष्ट्रीय अवार्ड समारोह सम्पन्न

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में पढ़े गए मर्मस्पर्शी गीत और कविताएं


कृष्ण बसंती एवं अक्षरवार्ता अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका द्वारा उदीयमान भारत में शिक्षा, साहित्य, संस्कृति एवं समाज : चुनौतियां और संभावनाएं पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी एवं राष्ट्रीय अवार्ड समारोह 2021 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल के निदेशक डॉ विकास दवे थे। अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने की। विशिष्ट अतिथि कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा, भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद, नई दिल्ली के सम्पादक डॉ आशीष कंधवे,  प्रवासी साहित्यकार श्री इंद्रजीत शर्मा, न्यूयॉर्क थे। राष्ट्रीय अवार्ड समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्राध्यापक एवं अध्येताओं को अकादमिक एवं शोध के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। 

आयोजन में मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल के निदेशक डॉ विकास दवे ने कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली अंदर के ज्ञान को बाहर लाने के लिए प्रयत्नशील रही है। अंतर्निहित क्षमताओं का विकास शिक्षा करती है। शिक्षा का उद्देश्य विमुक्त करना है, जबकि वर्तमान में ज्ञानार्जन के बजाय उपाधि प्राप्त करने के लिए  तरह - तरह की परीक्षाओं का बोझ डाला जाता है। आज खण्ड खण्ड में बांटे जा रहे साहित्य के सरोकारों पर विचार की जरूरत है। 


साहित्यकार एवं संपादक डॉ आशीष कंधवे, नई दिल्ली ने कहा कि उदीयमान भारत का तात्पर्य सूर्य के साथ संवाद करना है। शिक्षा के उत्कर्ष पर पहुँचने पर भारत उदीयमान हो जाएगा। अपनी भाषा के महत्त्व को समझने की जरूरत है।  नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए सजगता की आवश्यकता है। मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा पर बल देने की जरूरत है। सबल राष्ट्र के लिए राष्ट्रभाषा हिन्दी की प्रतिष्ठा हो। भारत उदय के लिए स्किल इंडिया के प्रति व्यापक स्तर पर संचेतना जाग्रत होना चाहिए।   

आयोजन की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने कहा कि समाज को सार्थक संदेश देने में रचनाकारों की विशिष्ट भूमिका होती है। यह चिंताजनक है कि लैंगिक अनुपात बिगड़ रहा है। पारिवारिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है। बिना प्रकृति और समाज के पास जाए श्रेष्ठ कविता सम्भव नहीं है।

कला संकायाध्यक्ष प्रो शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने कहा कि उदीयमान भारत के लिए सभी क्षेत्रों में बदलाव की बयार की जरूरतों और संभावनाओं पर विचार और नवाचार आवश्यक है। अमेरिका और चीन के बाद भारत आने वाले दशकों में तीसरी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। अनेक महानायकों और शासकों के विशिष्ट प्रयत्नों से भारत का उदय सदियों से होता आया है। नई सदी में हमें अपने आत्म स्वाभिमान का विस्तार करते हुए आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर होना होगा। राष्ट्रीय आंदोलन के दौर में रचा गया साहित्य आज भी प्रेरणादायक है।


स्वागत भाषण एवं आयोजन की पीठिका संस्थाध्यक्ष डॉ मोहन बैरागी ने प्रस्तुत की।


कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका अक्षरवार्ता का लोकार्पण अतिथियों ने किया। प्रो शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने अतिथियों को विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित पुस्तकें भेंट की। 


इस मौके पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में राजकुमार बादल, बांसवाड़ा, पार्थ नवीन, प्रतापगढ़, राकेश शर्मा, बदनावर, अशोक भाटी, उज्जैन, बाबू घायल, आष्टा, डॉ मोहन बैरागी, तृप्ति मिश्रा, इंदौर, डॉ बी एल मालवीय बैचेन, शाजापुर, सौरभ प्रसन्न, कुमार सम्भव, शुजालपुर ने अपनी कविताओं और गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।


शोध पत्र वाचन सत्र में डॉ दिलीप कुमार गुप्ता, बिलासपुर, डॉ रश्मि मिश्रा, संजयकुमार मिश्रा, भोपाल, पिंकी मंसूरी, मन्दसौर, डॉ उमेश अशोक शिंदे, नंदुरबार, उदित्य सिंह सेंगर आदि ने शोध आलेख वाचन किया। 


प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा सरस्वती पूजन किया गया। अतिथि स्वागत डॉ जगदीश चंद्र शर्मा, श्री अशोक भाटी, श्री संतोष सुपेकर, डॉ सन्दीप नाडकर्णी, डॉ ओ पी वैष्णव, डॉ बी एल मालवीय बैचेन, शाजापुर, डॉ राम सौराष्ट्रीय, डॉ रुपाली सारये, मणि मिमरोट आदि ने किया। 


संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों और साहित्यकारों ने भाग लिया। 


संचालन संस्थाध्यक्ष डॉ मोहन बैरागी ने किया। आभार प्रदर्शन डॉ बी एल मालवीय, शाजापुर ने किया। 

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