Skip to main content

इंदौर के एमवाय अस्पताल को आधुनिक रूप देकर मॉडल अस्पताल बनायेंगे - मुख्यमंत्री श्री चौहान ; जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने की मुख्यमंत्री से भेंट

इंदौर के एमवाय अस्पताल को आधुनिक रूप देकर मॉडल अस्पताल बनायेंगे - मुख्यमंत्री श्री चौहान

जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने की मुख्यमंत्री से भेंट 

भोपाल : बुधवार, फरवरी 3, 2021

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल को आधुनिक स्वरूप प्रदान कर मॉडल अस्पताल बनायेंगे। प्रतिदिन 5000 से अधिक गरीबों को इलाज उपलब्ध करवाने वाले इस अस्पताल के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए जो भी आवश्यक सुविधाएँ हैं, वह शासन प्राथमिकता पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने यह बात जल संसाधन, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य-विकास मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट से चर्चा के दौरान कही। मंत्री श्री सिलावट ने आज मंत्रालय में मुख्यमंत्री श्री चौहान से इंदौर के एमवाय अस्पताल को आदर्श अस्पताल के रूप में विकसित करने और एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई के निर्माण को गति देने तथा आवंटित राशि में वृद्धि का आग्रह किया।

गरीब मरीजों को निरंतर मिलें विश्व-स्तरीय चिकित्सा सुविधाएँ - मंत्री श्री सिलावट

मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि एमवाय अस्पताल की ख्याति को स्थापित रखने एवं गरीब मरीजों को विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधाएँ निरंतर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इसका रिनोवेशन करते हुए आधुनिक रूप देना आवश्यक है। मुख्यमंत्री श्री चौहान से मंत्री श्री सिलावट ने महाराजा यशवंतराव (एमवाय) चिकित्सालय इंदौर को आदर्श चिकित्सालय के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से आधुनिकतम तथा महत्वपूर्ण व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने शासकीय कैंसर चिकित्सालय इंदौर में रेडियो थेरेपी की आधुनिक मशीन 'लीनियर-एक्सीलेटर' स्थापित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि एमवाय चिकित्सालय इंदौर में नये विभाग जैसे इमरजेंसी मेडिसिन, फिजिकल मेडिसिन एवं रिहेब्लीटेशन वायरोलॉजी, क्रिटिकल केयर मेडिसिन खोले जाना आवश्यक है। उन्होंने पुराने ऑपरेशन थियरेटरों को मॉडयूलर ऑपरेशन थियेटर में परिवर्तित करने, बढ़ते हुए एक्सीडेंट प्रकरणों को देखते हुए नवीन 200 बिस्तरों का ट्रामा सेंटर एवं इमरजेंसी सेंटर स्थापित करने की बात रखी। श्री सिलावट ने आग्रह किया कि ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, आर्थोस्कोपी, स्पाईन सर्जरी एवं स्पोर्टस इंजूरी सर्जरी के साथ-साथ इण्डोक्राइन मेडिसिन एवं सर्जरी के उपचार की व्यवस्था भी की जाए।

मुख्यमंत्री श्री चौहान से मंत्री श्री सिलावट ने आग्रह किया कि मरीजों के ऑनलाईन एप्वाइंटमेंट और व्यवस्थित रिकार्ड संधारण के लिए ई-हॉस्पिटल एवं ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने मल्टीलेवल आधुनिक पार्किंग एवं चिकित्सकों तथा स्टाफ के लिए मल्टीलेवल स्टॉफ क्वार्टर के निर्माण कराने और एन.ए.बी.एच. की मान्यता लेने के लिए पर भी ध्यान आकर्षित किया।

स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई

मुख्यमंत्री श्री चौहान को मंत्री श्री सिलावट ने निवेदन किया कि नवीन स्थापित एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई के लिए बजट आवंटन में वृद्धि की जाए। उल्लेखनीय है कि यह स्कूल आँखों की सभी प्रकार की शल्य चिकित्सा के उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में निर्मित हो रहा है। यहाँ गरीब नागरिक बिना किसी खर्च के उच्च कोटि के उपकरणों से लैस सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। यहाँ वार्षिक दस हजार शल्य क्रिया का लक्ष्य है। वर्तमान में भवन निर्माण का कार्य जारी है। स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सेवाओं के साथ-साथ शिक्षण और सभी स्पेशलिटी में फेलोशिप सुविधा भी होगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान से मंत्री श्री सिलावट ने एमवाय अस्पताल को आदर्श अस्पताल के रूप में विकसित करने और एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई के संबंध में चर्चा की।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में प्रतिदिन पांच हजार से अधिक गरीबों को इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है । इसके आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए जो भी आवश्यक सुविधाएं हैं , वो शासन प्राथमिकता पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री चौहान से मंत्री श्री सिलावट ने एमवाय अस्पताल को आदर्श अस्पताल के रूप में विकसित करने और एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई के संबंध में चर्चा की।

श्री तुलसीराम सिलावट मंत्री जल संसाधान, मछआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय(महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर को आदर्श चिकित्सालय के रूप में विकसित किये जाने हेतु चिकित्सा शिक्षा विभाग से महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं हेतु निर्देश प्रदान करने के संबंध में मुख्यमंत्री, शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र ।

मुख्यमंत्री जी को पत्र संबोधित करते हुए लिखा है कि, आपके सपनों का शहर इन्दौर में पूर्व से स्थापित एमवाय(महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर को आदर्श चिकित्सालय के रूप में विकसित किये जाने हेतु माननीय चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंगजी से भी सकारात्मक चर्चा हुई है, तदनुसार चिकित्सा शिक्षा विभाग से संबंधित निम्न बिन्दुओं पर विचार किया जाना आवश्यक है :

1. कैंसर चिकित्सालय इन्दौर मध्यप्रदेश का पहला कैंसर चिकित्सालय है यहा के विशेषज्ञ चिकित्सक दुनिया भर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इस चिकित्सा ज्यादा कैसर मरीजों का इलाज किया जाता है। पिछले 50 वर्षों में कैसर के इलाज के लिए रेडियो थेरेपी की पद्धति अत्याधुनिक हो चुकी है। परन्तु इन्दौर कैंसर चिकित्सालय में आज भी वर्षों पुरानी कोबाल्ट तकनीकी से कैंसर मरीजों का इलाज हो रहा है। जिसके कारण जरूरतमंद मरीजों को इलाज हेतु अन्य निजी चिकित्सालयों में भेजना पडता है। जहां आयुष्मान योजना के तहत शासन को लाखों रुपये की धनराशि खर्च करनी पड़ती है। उपरोक्त कारणों को ध्यान में रखते हुए जनहित में शासकीय कैंसर चिकित्सालय इन्दौर में रेडियो थेरेपी आधुनिक मशीन "लीनियर-एक्सीलेटर" को स्थापित किया जाना अति आवश्यक है।

2. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय (महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर में एनएमसी नियमानुसार नये विभाग जैसे कि इमरजेंसी मेडिसिन, फीजिकल मेडिसिन एव रिटेलीटिशन वायरोलॉजी कीटिकल केयर मेडिसिन खोले जाना आवश्यक है। नवीन विभागों को प्रारंभ करने के लिए भारत सरकार को आवेदन करने की आखिरी तारीख अप्रैल माह में है, इस हेतु जल्द से जल्द आवेदन प्रकिया चालू की जावे।

3. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय (महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर में पराने ऑपरेशन थियेटरों को मॉडयूलर आपरेशन थियेटर में परिवर्तित किया जाना आवश्यक है।

4. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय (महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर में बढते हुए एक्सीडेंट केसो को देखते हुए नवीन 200 बिस्तरों का ट्रामा सेंटर एव इमरजेंसी सेंटर स्थापित किया जाना आवश्यक है।

5. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय(महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर में वर्तमान में सी.टी.स्केन एवं एमआरआई ऑउटसोर्स से किये जाने की व्यवस्था है। बहु-चिकित्सकीय योजनाओ एवं एन.एम.सी. की गाईडलाईन को देखते हुए सीटी स्केन एवं एमआरआई की व्यवस्था की जाना आवश्यक है।

6. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय(महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर में ई-हास्पीटल एवं ई-आफिस को लागू किया जाए। जिससे मरीज ऑनलाईन अपाइंटमेंट ले सके और रिकार्ड का संधारण व्यवस्थित रूप से किया जा सके।

7. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय(महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर में अन्य प्रदेशों की भांति एवं अन्य विश्वविद्यालय की भांति विभागाध्यक्ष की पदस्थापना दो वर्ष के रोटेक्शन पर की जावे।

8. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय(महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर में पार्किग हेतु मल्टीलेबल आधुनिक पाकिंग एवं चिकित्सकों एवं स्टाफ हेतु मल्टीलेबल स्टॉफ क्वाटर्स का निर्माण कराया जाये।

9. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय(महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर के लिए एनएबीएच की मान्यता ली जावे।

10. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय(महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, आर्थोस्कोपी,स्पाईन सर्जरी एवं स्पोर्ट्स इंजूरी सर्जरी के साथ-साथ इण्डोकाइन मेडिसिन एवं सर्जरी के उपचार की व्यवस्था भी की जाए।

11. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय(महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर को रिनोवेशन करते हुए आधुनिक रूप से विकसित किया जावे।

एमवाय(महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर प्रदेश का प्राचीनतम चिकित्सालय होकर प्रतिदिन 5000से अधिक मरीजों को बाहय रोगी सेवाएं प्रदान कर रहा है। प्रतिदिन 200 से अधिक शल्य क्रियाएं (आपरेशन) किये जाते है।

मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट पत्र में लिखते है कि, यह चिकित्सालय राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश के साथ-साथ अन्य प्रदेशों के मरीजों के लिए वरदान की तरह कार्य कर रहा है। इसकी ख्याति को स्थापित रखने के उददेश्य से एवं गरीब मरीजों को विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के उददेश्य से उपरोक्त व्यवस्थाएं लाग किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इससे प्रदेश में एमवाय (महाराजा यशवंतराव) चिकित्सालय इन्दौर को आदर्श चिकित्सालय के रूप में स्थापित किया जा सकेगा एवं देश विदेशों में भी का नाम गौरवान्वित हो सकेगा।



श्री तुलसीराम सिलावट मंत्री जल संसाधान, मछआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज सुपर स्पेशिलिटी चिकित्सालय इन्दौर के संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग से महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं हेतु निर्देश प्रदान करने बाबत पत्र मुख्यमंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान को लिखा ।  

मुख्यमंत्री जी को पत्र संबोधित करते हुए लिखा है कि, आपके सपनों का शहर इन्दौर में नवीन स्थापित एमजीएम मेडिकल स्पेशिलिटी चिकित्सालय इन्दौर जिसका शुभारंभ आपके करकमलों से दि. 28.8.2020 को कोरोना कॉल के दौरान किया गया था,जिसका उपयोग कोरोना पीडित मरीजों के उपचार के लिए किया गया था। वर्तमान में इसको इसके मूल स्वरूप में स्थापित किये जाने हेतु माननीय चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग जी से भी सकारात्मक चर्चा हुई है, तदनुसार चिकित्सा शिक्षा विभाग से संबंधित निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार किया जाना आवश्यक है - 

1. सुपर स्पेशिलिटी चिकित्सालय इन्दौर में स्वीकृत पद चिकित्सक एवं अन्य स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र चालू किया जावें।

2. सुपर स्पेशिलिटी चिकित्सालय इन्दौर में संचालक का एक पद सृजित किया गया था जिसे अधिष्ठाता की भांती वित्तीय एवं प्रशासकीय अधिकार प्रदान किये जाये। जिससे सुचारू कार्य संपादित किया जा सके।

3. सुपर स्पेशिलिटी चिकित्सालय इन्दौर के अधीक्षक के पद को पूर्व की भांति वरिष्ठ वेतनमान दिया जाये।

4. सुपर स्पेशिलिटी चिकित्सालय इन्दौर में संचालक एवं अधीक्षक के पदों पर पदस्थापना एमजीएम मेडिकल कॉलेज इन्दौर के संकाय सदस्यों से प्रतिनियुक्ति से की जावे।

5. एमजीएम मेडिकल कॉलेज इन्दौर में कार्यरत सुपर स्पेशिलिटी योग्यताधारी संकाय सदस्यों को एमसीआई/एनएमसी नियमानुसार अथवा समकक्ष योग्यताधारी जैसे डीएम/एमसीएच/पीएचडी संकाय सदस्यों को उनके संबंधित विषय में प्राथमिकता के आधार पर प्रतिनियुक्ति पर पदस्थापना की जाये।

6. म.प्र.में 7 नवीन मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं वहा पर 8 से 10 संकाय सदस्य सपर स्पेशिलिटी योग्यताधारी उम्मीदवारों हेतु पद सृजित किये गए है। इस तरह कुल 80 के करीब पद है, जिनके कई बार विज्ञापन देने के बाद भी भर्ती प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी है। ऐसे पदों को जो एमबीबीएस की मान्यता के लिए भी आवश्यक नहीं है। उन पदों को सुपर स्पेशिलिटी हास्पीटल इन्दौर में पद सहित स्थानान्तरित किया जाए, जिससे डीएम/एमसीएच के पीजी कोर्स इन्दौर में चालू किया जा सके एवं अन्य नई सुपर स्पेशिलिटी कोर्स को भी शुरू किया जा सकता है, इससे शासन के उपर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आयेगा। 

7. एनएमसी गाईड लाईन अनुसार अप्रैल माह तक डीएम/एमसीएच कोर्स हेतु आवेदन किये जाना चाहिए जिससे डीएम/एमसीएच कोर्स प्रारंभ किये जा सके। अगर अप्रैल तक आवेदन नहीं किया तो एक वर्ष का नुकसान हो जाएगा।

8. सुपर स्पेशिलिटी चिकित्सालय इन्दौर अत्याधुनिक तकनीकी से बनाया गया है। इस हेतु भवन प्रबंधन प्रणाली एवं अस्पताल यांत्रिकी सेवाओ हेतु पद सृजित कर निविदा कर विभिन्न व्यावसायिक एजेंसियों से काम करवाया जाए ताकि अस्पताल संचालन में उपयोग में की जा रही विभिन्न सेवाएं निर्बाध और सुचारू रूपसे कार्य कर सकें।

9. सुपर स्पेशिलिटी चिकित्सालय इन्दौर में मरीजों एवं परिजनों को भोजन व्यवस्था हेतु किचन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की जाए।

10. सुपर स्पेशिलिटी चिकित्सालय इन्दौर की एनएबीएच की मान्यता ली जावे।

11. सुपर  स्पेशिलिटी चिकित्सालय इन्दौर में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, आर्थोस्कोपी, स्पाईन सर्जरी एवं स्पोर्ट्स इंजूरी सर्जरी के साथ-साथ इण्डोकाइन मेडिसिन एवं सर्जरी के उपचार की व्यवस्था भी की जाए।

12. ई-हास्पीटल एवं ई-आफिस को लागू किया जाए, जिससे मरीज ऑनलाईन अपाइंटमेंट ले सके और रिकार्ड का संधारण व्यवस्थित रूप से किया जा सके।

13. अमृत फार्मेसी की स्थापना सुपर स्पेशिलिटी हास्पीटल में की जाए।

मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट पत्र में लिखते है कि, उपरोक्त व्यवस्थाएं लागू होने पर सुपर स्पेशिलिटी चिकित्सालय इन्दौर प्रदेश में आदर्श चिकित्सालय के रूप में स्थापित होकर देश ही नही अपित विदेशों में भी इन्दौर शहर का नाम गौरवान्वित करेगा।

श्री तुलसीराम सिलावट मंत्री जल संसाधान, मछआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज इन्दौर के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई के संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग से महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं हेतु निर्देश प्रदान करने के संबंध में मुख्यमंत्री, शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र ।

मुख्यमंत्री जी को पत्र संबोधित करते हुए लिखा है कि, आपके सपनों का शहर इंदौर में नवीन स्थापित एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई के संबंध में माननीय चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग जी से भी सकारात्मक चर्चा हुई है, तद्नुसार चिकित्सा शिक्षा विभाग से संबंधित निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार किया जाना आवश्यक है - 

1. स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई, मजीएम मेडिकल कॉलेज, इन्दौर मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की नेत्र चिकित्सा सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से आकृत किया गया था। सभी प्रकार की आंखों की शल्य चिकित्सा का यह एक उत्कृष्ठ केन्द्र होगा। यहाँ गरीब से गरीब नागरिक बिना किसी खर्च के उच्च कोटि के उपकरणों से लैस सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। एक बार सुचारू रूप से सक्रिय होने पर वार्षिक 10000 शल्य क्रिया का उद्देश्य रहेगा।

2. इस संस्थान का वर्तमान में भवन निर्माण का कार्य सामान्य गति से चल रहा है तथा ईक्विपमेंट खरीदी का कार्य शुरूआती चरणों में है। 06 शैक्षणिक पद भर्ती हो चुकी है जिसमें से चार डॉक्टर ने पदभार ग्रहण कर लिया है। शेष 02 शैक्षणिक तथा गैर शैक्षणिक भर्ती की प्रक्रिया भी शुरूआती दौर में है।

3. कोविड महामारी के चलते संस्थान शुरू करने के कार्य में विलंब हुआ है परंतु अब जरूरत है कि कार्य को तीव्र गति से अपने मुकाम तक पहुंचाया जाए संस्थान के सचारू रूप से कार्य करने के लिये अति आवश्यक है कि ज्यादा समय न लेते हए इसे कम से कम समय में लोकार्पित किया जाये। इस उद्देश्य से निर्माण तथा अन्य कार्यों में गति लाना अनिवार्य है। इन कार्यों के लिये पारित की गई धनराशि का शीघ्र ट्रांस्फर तथा मुदास्फीति तथा बदलते डॉलर/यूरो की दरों को देखते हुए आवंटित राशि में इजाफा करने की गुजारिश की जाती है।

स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई, में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की नेत्र रोग सेवाओं के अलावा शिक्षण पर भी उचित ध्यान देने का प्रावधान किया गया है। नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में विभिन्न सब स्पैशलिटी में फेलोशिप की सुविधा दी जाएगी जिससे आगे चलकर इस संस्था से उच्च कोटि के नेत्र रोग विशेषज्ञ देश में अपनी सेवाएं प्रदान कर सकें। प्रदेश के लिये यह एक उत्कृष्ठ केन्द्र होगा जिसका शीघ्र सुचारू रूप से आकृत होना अति आवश्यक है। 

मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट पत्र में लिखते है कि, अतएव संबंधित कार्य हेतु चिकित्सा शिक्षा विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये जाने का अनुरोध है।


Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

चौऋषिया दिवस (नागपंचमी) पर चौऋषिया समाज विशेष, नाग पंचमी और चौऋषिया दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति और अर्थ: श्रावण मास में आने वा ली नागपंचमी को चौऋषिया दिवस के रूप में पुरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "चतुरशीतिः" से हुई हैं जिसका शाब्दिक अर्थ "चौरासी" होता हैं अर्थात चौऋषिया समाज चौरासी गोत्र से मिलकर बना एक जातीय समूह है। वास्तविकता में चौऋषिया, तम्बोली समाज की एक उपजाति हैं। तम्बोली शब्द की उत्पति संस्कृत शब्द "ताम्बुल" से हुई हैं जिसका अर्थ "पान" होता हैं। चौऋषिया समाज के लोगो द्वारा नागदेव को अपना कुलदेव माना जाता हैं तथा चौऋषिया समाज के लोगो को नागवंशी भी कहा जाता हैं। नागपंचमी के दिन चौऋषिया समाज द्वारा ही नागदेव की पूजा करना प्रारम्भ किया गया था तत्पश्चात सम्पूर्ण भारत में नागपंचमी पर नागदेव की पूजा की जाने लगी। नागदेव द्वारा चूहों से नागबेल (जिस पर पान उगता हैं) कि रक्षा की जाती हैं।चूहे नागबेल को खाकर नष्ट करते हैं। इस नागबेल (पान)से ही समाज के लोगो का रोजगार मिलता हैं।पान का व्यवसाय चौरसिया समाज के लोगो का मुख्य व्यवसाय हैं।इस हेतू समाज के लोगो ने अपन