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एक तरफ भारतीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा, दूसरी तरफ आयुष शिक्षकों को मिल रहा है वेतन ऐलोपैथी से आधा

उज्जैन। प्रदेश के शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालयों, होम्योपैथी एवं यूनानी महाविद्यालयों में कार्यरत चिकित्सा शिक्षकों को प्रदेश के एलोपैथी महाविद्यालयों के चिकित्सा शिक्षकों से लगभग आधा वेतन प्राप्त हो रहा है। एलोपैथी चिकित्सा शिक्षकों को वर्ष 2013 में पुनरीक्षित वेतनमान प्रदान किया जाने लगा। आयुर्वेद एवं एलोपैथी चिकित्सा शिक्षकों को वर्ष 2013 में एक साथ पुनरीक्षित वेतनमान प्रदान किए जाने की कार्यवाही की जा रही थी परंतु केवल एलोपैथी चिकित्सा शिक्षकों को पुनरीक्षित वेतनमान प्रदान किया गया।

आयुष महाविद्यालय में पदस्थ चिकित्सा शिक्षिकों को पिछले 5 वर्षों से एलोपैथी चिकित्सा शिक्षकों से लगभग आधा वेतनमान प्राप्त हो रहा है। एक तरफ भारतीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा दूसरी तरफ आयुष शिक्षकों को मिल रहा है वेतन ऐलोपैथी से आधा, भारतीय पद्धति आयुर्वेद के प्रति शासन की यह घोर उपेक्षा है एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी विपरीत है। प्रदेश के शासकीय विज्ञान, कला, वाणिज्य आदि महाविद्यालयों में पदस्थ शिक्षक एवं यहां तक लाइब्रेरियन एवं क्रीड़ा शिक्षक भी आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षकों से भी लगभग दो गुना वेतन प्राप्त कर रहे हैं।

डॉ. प्रकाश जोशी, उपसचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि, प्रदेश के आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षक नियुक्ति से लेकर उच्चतम पद तक 15 हजार 600 रु. मूल वेतन पर ही कार्य कर रहे हैं जबकि एलोपैथी चिकित्सा शिक्षक एवं अन्य शासकीय महाविद्यालय के शिक्षक, लाइब्रेरियन एवं क्रीड़ा अधिकारियों को समयमान वेतनमान के अनुसार 8 वर्ष की सेवा के पश्चात 37400-67000 मूल वेतन प्राप्त होने लगता है। वर्तमान में जिस प्रकार आयुर्वेद और योग की उपयोगिता बढ़ती जा रही है। उसकी उन्नत एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षकों ऐलोपैथी चिकित्सा शिक्षकों के समान सम्मानजनक वेतनमान प्रदान किया जाना चाहिए। प्रदेश के आयुर्वेदिक होम्योपैथी एवं यूनानी चिकित्सा शिक्षक प्रदेश के 10 महाविद्यालयों में पदस्थ हैं। इनकी संख्या लगभग 250 हैं एवं इन्हें एलोपैथी चिकित्सा शिक्षकों के समान पुनरीक्षित वेतनमान प्रदान करने हेतु सालाना शासन पर केवल 8 करोड़ का व्यवहार होगा। हाल ही में सिर्फ प्रधानाचार्य का ही वेतन बढ़ाया गया है। फिडिंग केडर में किसी का भी वेतन नहीं बढ़ाया गया है।

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