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नए विश्व की रचना महात्मा गांधी के विचारों से संभव - प्रोफेसर शर्मा ; महात्मा गांधी : वैश्विक परिदृश्य में योगदान पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

नए विश्व की रचना महात्मा गांधी के विचारों से संभव - प्रोफेसर शर्मा

महात्मा गांधी : वैश्विक परिदृश्य में योगदान पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न


देश की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा महात्मा गांधी : वैश्विक परिदृश्य में योगदान पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आयोजन के प्रमुख अतिथि प्रवासी साहित्यकार श्री सुरेशचंद्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे थे। प्रमुख वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे थे। विशिष्ट अतिथि संस्था के अध्यक्ष श्री ब्रजकिशोर शर्मा एवं श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई थीं। अध्यक्षता संस्था के महासचिव डॉ प्रभु चौधरी ने की। आयोजन में देश के विभिन्न भागों के संस्कृतिकर्मी एवं साहित्यकारों ने भाग लिया।


आयोजन के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध प्रवासी साहित्यकार श्री सुरेशचंद्र शुक्ल शरद आलोक ने कहा कि महात्मा गांधी का  व्यक्तित्व और चिंतन संपूर्ण विश्व के लिए आदर्श है। उन्होंने व्यापक विश्व मानवता को प्रभावित किया। श्री शुक्ला ने गांधी जी पर केंद्रित कविता सुनाईं, जिसकी पंक्तियां थीं, हे गाँधी!  तुम अमर रहोगे, हर जन तन पर खादी होगा। बच्चा-बच्चा स्वावलंबी होगा, वह कर्मयोगी गाँधी होगा।


प्रमुख वक्ता लेखक एवं आलोचक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि नए विश्व की रचना महात्मा गांधी के विचारों से संभव है। उनकी विश्व दृष्टि अत्यंत व्यापक है। गांधी जी ने विश्व संस्कृति पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने जिस लड़ाई को लड़ा था, वह अहिंसक तो थी, किंतु निष्कर्म और अनाक्रमक जरा भी नहीं थी। वह बड़ी ताकत के सामने किसी लाचार की अहिंसा और शांति नहीं थी, वरन उसमें सत्य, नीति और धर्म का आधार था। गांधी जी ने तुलसी के साहित्य का प्रयोग व्यापक राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन के लिए किया। उनके द्वारा पल्लवित सत्याग्रह, अहिंसा, असहयोग आदि की अवधारणाएँ भारतीय जमीन पर खड़ी हुई हैं। उन्होंने स्वभाषा प्रेम को स्वदेशाभिमान जैसा महत्त्व दिया। मानव सभ्यता के सभी क्षेत्रों में वे आज भी प्रेरणा पाथेय बने हुए हैं।


विशिष्ट अतिथि श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई ने कहा कि महात्मा गांधी ने गांव की ओर चलो का नारा दिया था। उन्होंने यंत्रों पर अति निर्भरता का विरोध किया और मानव श्रम को आवश्यक माना। वे सर्वधर्म समभाव और स्त्री शिक्षा के समर्थक थे।


संस्था के अध्यक्ष शिक्षाविद श्री ब्रजकिशोर शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी की आत्मकथा सत्य की महिमा को प्रतिष्ठित करती है। उन्होंने अपने आलेख, संपादकीय, भाषण आदि के माध्यम से समाज को जाग्रत किया। उनका व्यक्तित्व सार्वकालिक और सार्वदेशीय है। गांधी जी का शिक्षा दर्शन स्वावलंबी बनाने की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है।


श्रीमती लता जोशी, मुम्बई ने कहा कि अहिंसा एवं सत्य का पालन करना गांधीजी की दृष्टि में सर्वोच्च है। उनकी दृष्टि में अहिंसा मानवता का बल है। उन्होंने देश की स्वतंत्रता और आत्म गौरव को स्थापित करने के लिए अहिंसा का सहारा लिया। उन्होंने मौन की महिमा को स्थापित किया।


विशिष्ट वक्ता शिक्षाविद डॉ शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे ने कहा कि गांधी जी ने हिंदी और खादी के प्रति व्यापक चेतना जगाई। उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया। मातृभाषा के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा को अनिवार्य करने पर उन्होंने बल दिया। 


अध्यक्षीय भाषण में संस्था के महासचिव डॉ प्रभु चौधरी ने कहा कि गांधी जी ने स्वदेश के प्रति अभिमान जाग्रत कर स्वाधीनता आंदोलन को नई दिशा दी। उन्होंने चरखा और खादी के प्रति प्रेम जगाया। हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।


श्री डी पी शर्मा ने कहा कि गांधी जी ने विदेश से लौट कर आने के बाद स्वदेशी आंदोलन को जाग्रत कर इस देश को नई दिशा दी। 


महात्मा गांधी के योगदान पर केंद्रित  स्लाइड प्रस्तुति डॉ पूर्णिमा कौशिक रायपुर एवं  डॉ मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर ने की।


कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से श्रीमती ज्योति तिवारी ने किया।  स्वागत भाषण डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर ने दिया। संगोष्ठी की प्रस्तावना गरिमा गर्ग, पंचकूला ने प्रस्तुत की। 


आयोजन में श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई, डॉ मुक्ता कौशिक, रायपुर, डॉ गरिमा गर्ग, पंचकूला, पूर्णिमा झेंडे, सुनीता चौहान, मुंबई, डॉ आशीष नायक, रायपुर, गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी, प्रयागराज, लता जोशी, मुम्बई, डॉ रश्मि चौबे, गाजियाबाद, श्रीमती पूर्णिमा कौशिक, रायपुर सहित अनेक शिक्षाविद एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।


संगोष्ठी का सफल संचालन राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ मुक्ता कौशिक, रायपुर ने किया। आभार प्रदर्शन डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर ने किया।

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