Skip to main content

विधानसभा चुनाव 2021: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, पुदुच्चेरी में कब-कब होगा मतदान, कब आएंगे नतीजे

 कोरोना काल में समस्याओं के बीच काम करते चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में तथा असम में तीन चरणों में मतदान करवाने का फैसला किया है.



केंद्रीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने शुक्रवार को पांच राज्यों - पश्चिम बंगाल (West Bengal Elections), तमिलनाडु (Tamil Nadu Elections), केरल (Kerala Elections), असम (Assam Elections) और पुदुच्चेरी (Puducherry Elections) - में विधानसभा चुनाव कार्यक्रम (Assembly Elections 2021 Schedule) की घोषणा कर दी है. कोरोना काल में समस्याओं के बीच काम करते चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में तथा असम में तीन चरणों में मतदान करवाने का फैसला किया है. शेष तीनों राज्यों में मतदान की प्रक्रिया एक ही चरण में पूरी हो जाएगी. पांचों राज्यों में मतदान 27 मार्च से शुरू होगा, तथा सभी राज्यों में चुनाव परिणाम एक साथ 2 मई को घोषित किए जाएंगे. विधानसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल आप ख़बर के नीचे देख सकते हैं.

पश्चिम बंगाल की कुल 294 सीटों पर कुल आठ चरणों में मतदान होगा. पहले चरण में 30 सीटों पर 27 मार्च को, दूसरे चरण में 30 सीटों पर 1 अप्रैल को, तीसरे चरण में 31 सीटों पर 6 अप्रैल को, चौथे चरण में 44 सीटों पर 10 अप्रैल को, पांचवें चरण में 45 सीटों पर 17 अप्रैल को, छठे चरण में 43 सीटों पर 22 अप्रैल को, सातवें चरण में 36 सीटों पर 26 अप्रैल को तथा आठवें चरण में 35 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान करवाया जाएगा.

असम की कुल 126 सीटों पर कुल तीन चरणों में मतदान होगा. पहले चरण में 47 सीटों पर 27 मार्च को, दूसरे चरण में 39 सीटों पर 1 अप्रैल को तथा तीसरे चरण में 40 सीटों पर 6 अप्रैल को मतदान करवाया जाएगा.

तमिलनाडु में सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में 6 अप्रैल को मतदान करवाया जाएगा.

केरल में सभी 140 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में 6 अप्रैल को मतदान करवाया जाएगा.


पुदुच्चेरी में सभी 30 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में 6 अप्रैल को मतदान करवाया जाएगा.


राज्य (कुल सीटें)मतदान चरणमतदान तिथिविधानसभा सीटेंमतगणना
पश्चिम बंगाल (294)127 मार्च, 2021302 मई, 2021
21 अप्रैल, 2021302 मई, 2021
36 अप्रैल, 2021312 मई, 2021
410 अप्रैल, 2021442 मई, 2021
517 अप्रैल, 2021452 मई, 2021
622 अप्रैल, 2021432 मई, 2021
726 अप्रैल, 2021362 मई, 2021
829 अप्रैल, 2021352 मई, 2021
असम (126)127 मार्च, 2021472 मई, 2021
21 अप्रैल, 2021392 मई, 2021
36 अप्रैल, 2021402 मई, 2021
तमिलनाडु (234)16 अप्रैल, 20212342 मई, 2021
पुदुच्चेरी (30)16 अप्रैल, 2021302 मई, 2021
केरल (140)16 अप्रैल, 20211402 मई, 2021















































































Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह