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ध्वनि और रस सिद्धांत पर आचार्य त्रिपाठी का योगदान अद्वितीय ; शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ एवं आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी जयंती समारोह संपन्न

ध्वनि और रस सिद्धांत पर आचार्य त्रिपाठी का योगदान अद्वितीय  

शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ एवं आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी जयंती समारोह संपन्न


उज्जैन : मध्यप्रदेश लेखक संघ द्वारा चार धाम मंदिर सभागार में आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी एवं भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी दिव्यानन्द तीर्थ जयंती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि महामंडलेश्वर श्री शांतिस्वरूपानंद जी थे।  विशिष्ट अतिथि श्री नारदानन्द जी, कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पांडेय एवं पूर्व कुलपति प्रोफ़ेसर बालकृष्ण शर्मा थे। प्रमुख वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा एवं प्रो शैलेंद्र पाराशर ने विचार व्यक्त किए। संस्थाध्यक्ष प्रो हरिमोहन बुधौलिया ने कार्यक्रम की पीठिका प्रस्तुत की।

प्रो बालकृष्ण शर्मा ने आदि शंकराचार्य के बहुआयामी व्यक्तित्व और योगदान प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अल्प वय में भारतीय दर्शन, भक्ति, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के लिए महत्वपूर्ण अवदान दिया। स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने उनकी परंपरा को नए दौर में जीवंत किया। 

 प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी के योगदान पर केंद्रित व्याख्यान देते हुए कहा कि आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी ने चिंतन और समालोचना में दुर्गम पथ चुना था, जिस पर वे आजीवन चलते रहे। भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति गहन निष्ठा,  काव्यशास्त्रीय चिंतन की पुनराख्या, प्राचीन और नवीन रचनाधर्मिता की तलस्पर्शी आलोचना और आगमिक दृष्टि से काव्य एवं काव्यशास्त्र की पड़ताल आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी को समूची आलोचना धारा में अद्वितीय बनाते हैं।  आलोचना के क्षेत्र में ध्वनि और रस सिद्धांत पर उनका योगदान अनुपम है, जो सदैव याद किया जाएगा। भारत की पहचान के अभिलक्षणों के प्रसार के लिए वे निरन्तर गतिशील बने रहे। 

प्रोफेसर शैलेंद्र पाराशर ने आचार्य त्रिपाठी के साहित्यिक लेखन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि त्रिपाठी जी का संपूर्ण जीवन अध्ययन ,अध्यापन, लेखन एवं प्रबोधन को समर्पित रहा।

कार्यक्रम में पूर्व कुलपति प्रोफ़ेसर बालकृष्ण शर्मा को शंकराचार्य दिव्यानंद तीर्थ सम्मान तथा साहित्यकार डॉ देवेंद्र जोशी को आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी सम्मान से महामंडलेश्वर श्री शांति स्वरूपानंद जी , स्वामी नारदानन्द जी एवं अतिथियों ने सम्मानित किया। अभिनंदन पत्र का वाचन  साहित्यकार डॉ हरीश कुमार सिंह एवं श्री सूरज नागर उज्जैनी ने किया।

सरस्वती वंदना श्रीमती सीमा जोशी ने की। साहित्य सारथी कैलेंडर का विमोचन डॉ हरीशकुमार सिंह ने करवाया। कार्यक्रम में डॉ पुष्पा चौरसिया, डॉ अभिलाषा शर्मा,डॉ रफीक नागौरी, संतोष सुपेकर आदि सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित थे।

 कार्यक्रम का  संयोजन डॉ देवेंद्र जोशी ने किया। आभार प्रदर्शन प्रोफेसर हरिमोहन बुधौलिया ने किया।

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