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भारतीय जीवन दृष्टि से विश्व को परिचित कराने का महत्वपूर्ण कार्य किया स्वामी विवेकानंद ने – उच्च शिक्षा मंत्री डॉ यादव ; विक्रम विश्वविद्यालय में मेडिकल कॉलेज और कृषि शिक्षा प्रारंभ करने के लिए किए जाएंगे विशेष प्रयास ; विक्रम विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय युवा दिवस समारोह सम्पन्न

भारतीय जीवन दृष्टि से विश्व को परिचित कराने का महत्वपूर्ण कार्य किया स्वामी विवेकानंद ने – उच्च शिक्षा मंत्री डॉ यादव 

विक्रम विश्वविद्यालय में मेडिकल कॉलेज और कृषि शिक्षा प्रारंभ करने के लिए किए जाएंगे विशेष प्रयास

विक्रम विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय युवा दिवस समारोह सम्पन्न 




उज्जैन : स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस समारोह का आयोजन 12 जनवरी को प्रातः 10 : 30 पर किया गया। विश्वविद्यालय के शलाका दीर्घा सभागार में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव थे। प्रमुख वक्ता मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री विभाष उपाध्याय थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने की। यह आयोजन स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं पर अभिकेंद्रित था। 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री, मध्यप्रदेश शासन डॉ मोहन यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का चिंतन विराट है। उन्होंने भारतीय जीवन दृष्टि से संपूर्ण विश्व को परिचित कराने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने दशकों पहले कह दिया था कि इक्कीसवीं सदी भारत की होगी। आज यह बात चरितार्थ हो गई है। उन्होंने गुलामी के दौर में लोगों के मध्य स्वतंत्र चेतना का संचार किया। विक्रम विश्वविद्यालय में मेडिकल कॉलेज एवं कृषि शिक्षा प्रारंभ करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद पीठ की स्थापना की दिशा में पहल की जाएगी। वर्तमान शिक्षा सत्र में परीक्षा की दृष्टि से तैयारियां शुरू की जा रही हैं।

प्रमुख वक्ता मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री विभाष उपाध्याय ने कहा कि वैश्विक परिवर्तन के लिए आदि शंकराचार्य के पश्चात स्वामी विवेकानंद ने अविस्मरणीय योगदान दिया। श्री रामकृष्ण परमहंस ने दो प्रकार के महापुरुष बताए हैं - जीव कोटि और अवतार कोटि। स्वामी विवेकानंद अवतार कोटि के महापुरुष हैं। उन्होंने पुरुषार्थ द्वारा पूर्णता को प्राप्त करने का मार्ग दिखाया। महर्षि अरविंद की मान्यता है कि अवतार नया तत्त्व देकर जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने सिखाया कि मन के आनंद स्वरूप को जीवन में कैसे उतारा जा सकता है। स्वामी विवेकानंद की मान्यता है कि आत्मा का मोक्ष और जगत का हित करना हमारा ध्येय होना चाहिए। उन्होंने दुनिया को दिखाया कि सारे मत और संप्रदाय एक ही भागवत तत्व की ओर जा रहे हैं। उनकी दृष्टि में अस्पृश्यता सबसे बड़ा पाप है। भारतीय संविधान के निर्माण में स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं का समावेश हुआ है। भारत में शील और चरित्र की महिमा है, जिसे पश्चिम को सीखना होगा। भारतीय दृष्टि में प्रकृति का शोषण उचित नहीं है। इसी प्रकार अस्तित्व के लिए संघर्ष और योग्यतम की उत्तरजीविता जैसे सिद्धांत भारतीय दृष्टि में उपयुक्त नहीं हैं।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पांडे ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवा पीढ़ी के सर्वोच्च प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने  मूल्य आधारित चिंतन दिया। प्रकृति और संस्कृति में संतुलन आवश्यक है।  इसके अभाव में  कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी  से हम जूझ रहे हैं। विक्रम विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद पीठ की स्थापना के लिए प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के चिंतन के विविध आयामों पर केंद्रित शॉर्ट टर्म कोर्स प्रारंभ किया जाएगा। शिक्षण संस्थाएं समाज का आईना होती हैं। शिक्षा के माध्यम से व्यापक परिवर्तन संभव है।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडे के जन्मदिवस के अवसर पर और हाल ही में उन्हें प्राप्त हिन्द चक्र अंतरराष्ट्रीय सम्मान के लिए अतिथियों एवं कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने शॉल एवं मौक्तिक माल अर्पित कर उन्हें सम्मानित किया। स्वस्तिवाचन पंडित राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर ने किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो पांडेय को विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारियों और कर्मचारियों ने हार्दिक बधाई दी।  

भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला के  प्राध्यापक डॉ विश्वजीतसिंह परमार ने स्वामी विवेकानंद के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंग सुनाए।

प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने इस देश को दारिद्र्य से मुक्त करने का आह्वान किया था। उनका महत्त्वपूर्ण संदेश है कि अपनी आत्मा का अपने उद्योग से उद्धार करो।

कार्यक्रम में फार्मेसी संस्थान के डॉ नरेंद्र मंडेरिया ने विवेकानंद जी पर केंद्रित गीत प्रस्तुत किया।

संचालन डीएसडब्ल्यू डॉ आरके अहिरवार ने किया। आभार प्रदर्शन कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने किया।

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