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एपीडा और नाबार्ड ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य कृषि और कृषि से जुड़े क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल बनाते हुए सभी संबंधित हितधारकों को लाभ पहुंचाना है




दिल्ली : एपीडा लगातार यह प्रयास करता है कि वह कृषि क्षेत्र में संगठनों, संस्थाओं, पेशेवरों, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों को बेहतर प्लेटफॉर्म मुहैया कराए। जिसके जरिए ये लोग कृषि क्षेत्र के विकास और उसकी निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए आपस में बेहतर समन्वय कर कदम उठाए। एपीडा यह पहल भारत सरकार द्वारा घोषित कृषि निर्यात नीति के तहत करता है। एपीडा हमेशा किसान केंद्रित नजरिए पर जोर देता है। इसके तहत, वह कोशिश करता है कि ऐसे लाभकारी कदम उठाए जाएं, जिससे न केवल किसान की आय में बढ़ोतरी हो, बल्कि उसे उत्पादों की आपूर्ति के दौरान भी कम से कम नुकसान उठाना पड़े। इसी के तहत नीतियां तैयार की गई हैं। जिसका उद्देश्य प्रत्येक वातावरण के अनुसार विभिन्न क्लस्टर में ऐसे उत्पाद तैयार किए जाएं, जो उन क्षेत्रों के लिए अनुकूल हो। इसके लिए नीति, आपूर्ति संबंधित मुद्दों को भी दूर करने का सुझाव देती है। इसके तहत मृदा के अंदर मौजूद पोषक तत्वों का प्रबंधन, अधिक उत्पादकता, बाजार की मांग पर आधारित फसलों का उत्पादन, उच्च गुणवत्ता वाली कृषि पद्धतियों आदि का इस्तेमाल शामिल है।

कृषि निर्यात नीति के क्रियान्वयन के लिए एपीडा लगातार राज्य सरकारों के साथ सहयोग करता रहता है। इसी पहल के तहत महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल, नागालैंड, तमिलनाडु, असम, पंजाब, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, सिक्किम और उत्तराखंड ने राज्य आधारित एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। जबकि दूसरे राज्य भी एक्शन प्लान को तैयार करने के अंतिम चरण में हैं। इसी तरह 28 राज्यों और 4 केंद्र-शासित प्रदेशों ने नोडल एजेंसी भी नामांकित कर दी हैं। साथ ही 21 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय निगरानी समिति का भी गठन कर दिया गया है।

इसके अलावा पंजाब, यूपी (दो जिले) में आलू के लिए 20 क्लस्टर स्तर की समितियों का गठन किया गया है। इसी तरह राजस्थान में इसबगोल, महाराष्ट्र में संतरा, अनार, अंगूर, केले के लिए तीन जिले, तमिलनाडु और केरल में केले के लिए, यूपी में आम, गुजरात और यूपी में डेयरी उत्पाद, कर्नाटक में गुलाब, प्याज के लिए, यूपी में ताजी सब्जियों के लिए, संतरे और आलू के लिए गुजरात (दो जिले) में क्लस्टर समितियों का गठन किया गया है। सभी क्लस्टर में संबंधित पक्षों के साथ, दो दौर की वार्ता भी की जा चुकी है। जिसका उद्देश्य, योजना के प्रति जागरूकता फैलाना और जरूरी कदम उठाना है।

इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एपीडा और नाबार्ड ने अपने मुख्यालय में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कार्यक्रम वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया। नए समझौते का उद्देश्य कृषि और कृषि से संबंधित क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल बनाते हुए सभी संबंधित पक्षों को लाभ पहुंचाना है।

इस मौके पर एपीडा के चेयरमैन डॉ. एम.अंगमुथु और नाबार्ड के चेयरमैन डॉ. जी.आर.चिंताला भी मौजूद थे। उन दोनों ने कृषि निर्यात नीति के लिए एपीडा और नाबार्ड की साझेदारी को आज की जरूरत बताते हुए, उसके द्वारा होने वाले फायदे के बारे में भी जानकारी दी। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर एपीडा के सचिव डॉ. सुधांशु और नाबार्ड के चीफ जनरल मैनेजर श्री निलय डी. कपूर ने किए। संस्थाओं के काम-काज और उनके द्वारा समन्वय के जरिए होने वाले कार्यों की संक्षिप्त जानकारी:

नाबार्ड

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) का गठन कृषि के विकास के लिए कर्ज देने वाले बैंक के रूप में हुआ है जो कि प्रमुख रूप से कृषि, ग्रामीण स्तर पर छोटे और कुटीर उद्योग, हस्तकलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित गतिविधियों के लिए कर्ज देता है। जिसका उद्देश्य समेकित ग्रामीण विकास करना है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में संपन्नता बढ़े। नाबार्ड एक्ट-1981, नाबार्ड को विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने का अधिकार देता है। नाबार्ड, किसानों को सहयोग देने के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम चला रहा है। जिसके जरिए पूरे देश में किसानों को सहयोग मिल रहा है।

सहयोग के क्षेत्र

  1. एपीडा और नाबार्ड मिलकर, संबंधित हितधारकों के क्षमता विकास में योगदान करेंगे।
  2. एपीडी और नाबार्ड मिलकर, लोगों तक पहुंच के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे, जागरूकता कार्यक्रम चलाएंगे। साथ ही संबंधित हितधारकों के लिए कार्यशाला का आयोजन करेंगे।
  3. भारत सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए आय बढ़ाने के जरूरी कदम उठाएंगे।
  4. नाबार्ड और एपीडा एफपीओ के विकास के लिए जरूरी योजनाएं और कदम उठाएंगे, जिससे किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके।
  5. एपीडा, नाबार्ड के साथ मिलकर एक कार्यक्रम तैयार करेगा, जो सहकारी समितियों, एफपीओ को तकनीकी सहायता देगा। इस कार्यक्रम के जरिए एपीडा द्वारा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्धारित उत्पादों के लिए कटाई के बाद, आधारभूत संरचनाओं का विकास होगा।
  6. दोनों संस्थाएं मिलकर, राज्यों में क्लस्टर की पहचान करेंगी। एपीडा, एफपीओ द्वारा बनाए उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करेगा, जिसमें नाबार्ड भी  अहम भूमिका निभाएगा। 


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