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डॉ.अंबेडकर देश को एकजुट करने वाले महान दूरदृष्टा थे - मंत्री डॉ.यादव ; डॉ.अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस पर विक्रम वि.वि.में विशिष्ट सारस्वत आयोजन हुआ

मंत्री डॉ.यादव के द्वारा डॉ अंबेडकर विशेषांक का विमोचन किया गया
विधि अध्ययनशाला का शुभारंभ किया उच्च शिक्षा मंत्री डॉ यादव ने


उज्जैन 06 दिसम्बर। रविवार को डॉ.अंबेडकर शोधपीठ, विक्रम विश्वविद्यालय और मप्र हिन्दी ग्रंथ अकादमी भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित डॉ.बीआर अंबेडकर के 64 वें महापरिनिर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव विशिष्ट सारस्वत आयोजन में शामिल हुए। साथ ही उनके द्वारा विक्रम विश्वविद्यालय के शलाका दीर्घा सभागार में मप्र हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित डॉ.अंबेडकर पर केन्द्रित पत्रिका 'रचना' और 'भारत का संविधान' का विमोचन भी किया गया। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ यादव ने विश्वविद्यालय के वाग्देवी भवन में विधि अध्ययनशाला का शुभारंभ किया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अखिलेश कुमार पाण्डेय ने की।

इस अवसर पर डॉ.अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलाधिपति डॉ.प्रकाश बरतुनिया, पूर्व कुलपति प्रो रामराजेश मिश्र,  प्रो.शैलेंद्र कुमार शर्मा, डॉ.आरके अहिरवार, मप्र हिन्दी ग्रंथ अकादमी भोपाल के संचालक श्री अशोक कड़ेल, विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.यूएन शुक्ला, डॉ.अंबेडकर शोधपीठ विक्रम विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ.एसके मिश्रा, मप्र हिन्दी ग्रंथ अकादमी के सहायक संचालक श्री रामविश्वास कुशवाह, श्री महेन्द्रसिंह सिसौदिया, शासकीय विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर एसएन शर्मा, डॉ.सत्येंद्रकिशोर मिश्रा, विश्वविद्यालय के अन्य व्याख्याता और शोधार्थी तथा गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ.निवेदिता वर्मा द्वारा किया गया। अतिथियों द्वारा डॉ.अंबेडकर के चित्र के समक्ष पुष्पांजली अर्पित की गई। स्वागत भाषण डॉ.एसके मिश्रा द्वारा दिया गया। 

डॉ.प्रकाश बरतुनिया ने कहा कि बाबा साहब को केवल संविधान के निर्माण ही नहीं, बल्कि दलितों के सशक्त नेतृत्व में उनके द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के लिये भी जाना जाता है। डॉ.अंबेडकर उत्कृष्ट लेखक, साहित्यकार तथा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। अनेक देशों में उनकी प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। बाबा साहब ने पूरी दुनिया में भारत की भूमिका का गौरव बढ़ाया है। वे उन चुनिन्दा लोगों में से थे, जिन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। जातिगत भेदभाव को खत्म किया और समाज में भाईचारे को बढ़ावा दिया। बाबा साहब ने कई संगठन बनाये। शिक्षा के क्षेत्र में उनका अभूतपूर्व योगदान था। उन्होंने लगभग 36 सालों तक पत्रकारिता की। इस दौरान उन्होंने कई सम्पादकीय लिखे। अल्पसमय में बाबा साहब ने कई डिग्रियां हासिल की। बाबा साहब के गुरू का नाम अंबेडकर था। अपने गुरू के सम्मान में उन्होंने अपने नाम के साथ अंबेडकर लगाया। बाबा साहब ने साहित्य के क्षेत्र में भी काफी काम किया। उनके पुस्तकालय में लगभग 50 हजार पुस्तकें थी। उन्होंने कई आन्दोलन किये। बाबा साहब द्वारा निर्मित भारत का संविधान संसार के श्रेष्ठ संविधानों में से एक है।

श्री अशोक कड़ेल ने भारत का संविधान पुस्तक और रचना पुस्तिका के सन्दर्भ में संक्षिप्त में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब तक के समस्त संशोधनों सहित भारत के संविधान के हिन्दी और अंग्रेजी संस्करण का विमोचन गौरव का विषय है। इसके पश्चात अतिथियों द्वारा पुस्तकों का विमोचन किया गया।

मंत्री डॉ.यादव ने इस अवसर पर कहा कि देश को आजादी दिलाने के लिये देश के पटल पर कई महापुरूषों का उदय हुआ। डॉ.अंबेडकर जैसे देश के महान रत्नों ने देश को परतंत्रता दि बेड़ियों से मुक्त करवाने में अविस्मरणीय योगदान दिया। उनमें से एक डॉ.बीआर अंबेडकर थे। बाबा अंबेडकर ने निरन्तर संघर्ष किया, लेकिन वे कभी हतोत्साहित नहीं हुए। यदि बाबा अंबेडकर नहीं होते तो देश कभी एकजुट नहीं रह पाता। उन्होंने समाज को जोड़ने के लिये निरन्तर प्रयास किये। हम सभी बाबा साहब के बताये हुए मार्ग पर चलें। एक-दूसरे के साथ मिलकर देश के विकास में योगदान दें। स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि 21वी सदी भारत की होगी। यह बात आज सत्य सिद्ध हो गई है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.पाण्डेय ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि बाबा अंबेडकर प्रकृतिप्रेमी भी थे। विश्वविद्यालय के शोधार्थी वर्ष में एक बार शोधपत्र हिन्दी में प्रकाशित अवश्य करें। उन्होंने बताया कि अब से विश्वविद्यालय में वाग्देवी भवन में विधि अध्ययनशाला, एलएलएम और एमए योगा कोर्सेस भी प्रारम्भ किये जायेंगे। आभार प्रदर्शन कुल सचिव डॉ.शुक्ला द्वारा किया गया।

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