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जीवन में व्याप्त अंधकार और निराशा को समाप्त कर नया उजास लाती है कविता – प्रो शर्मा ; अंतरराष्ट्रीय वेब काव्य संगोष्ठी में पढ़ी गईं जीवन के विविध रंगों की कविताएँ ; भारतरत्न श्री अटल स्मृति काव्य संगोष्ठी सम्पन्न

  •  जीवन में व्याप्त अंधकार और निराशा को समाप्त कर नया उजास लाती है कविता  – प्रो शर्मा 
  • अंतरराष्ट्रीय वेब काव्य संगोष्ठी में पढ़ी गईं जीवन के विविध रंगों की कविताएँ 
  • भारतरत्न श्री अटल स्मृति काव्य संगोष्ठी सम्पन्न 

देश की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा अंतरराष्ट्रीय वेब काव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें देश - दुनिया के साहित्यकारों और विद्वान वक्ताओं ने भाग लिया। संगोष्ठी में दुनिया के अनेक कवियों ने जीवन के विविध रंगों को अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवंत किया। यह संगोष्ठी भारतरत्न श्री अटलबिहारी वाजपेयी की स्मृति को समर्पित थी।

कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि शिक्षाविद डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे थे। मुख्य वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई ने की। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि  वरिष्ठ प्रवासी साहित्यकार एवं अनुवादक श्री सुरेशचंद्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्व, महासचिव डॉ प्रभु चौधरी एवं उपस्थित रचनाकारों ने अपनी कविताओं का पाठ किया। 

मुख्य अतिथि डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे ने कहा कि साहित्य की सबसे क्षमतावान विधा कविता है। यह सरल शब्दों के माध्यम से जीवन संदर्भों को अभिव्यक्त करने वाली विधा है।  कविताओं के माध्यम से जीवन के अनुभवों के साथ युगीन सामाजिक परिवेश की अभिव्यक्ति होती है।

प्रमुख वक्ता लेखक एवं आलोचक प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि कविता जीवन में व्याप्त अंधकार और निराशा को समाप्त कर नया उजास लाती है। श्रेष्ठ कविता मनुष्य - मनुष्य के बीच की खाई को पाटने का काम करती है। कवि की भूमिका कोरे उपदेशक से बड़ी मानी गई है। कवि का अनुभव जब पूरे समुदाय का अनुभव बन जाता है, तब कविता सार्थकता पाती है। आज के दौर के कई रचनाकार सन्त कबीर और मीरा की महान  परम्परा से जुड़कर समकालीन जीवन की विद्रूपताओं, असमंजस और  विसंगतियों पर तीखा प्रहार कर रहे हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक बदलाव का स्वर मुखरित हो रहा है।

विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ प्रवासी साहित्यकार, पत्रकार एवं अनुवादक श्री सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे ने कहा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौर में साहित्यकारों ने नव ऊर्जा का संचार किया है। उन्होंने अपने सुमधुर गीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उनके गीत की पंक्तियां थीं, जीवन की कारा का दीप नहीं बुझता है, समय के पांवों में कदम नहीं रुकता है। 

अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुम्बई ने कहा कि श्रेष्ठ कविताएं जीवन में नई प्रेरणा का संचार करती हैं। अटल जी की कविताएं इसी प्रकार की हैं। श्रीमती जाधव ने स्वरचित कविता घर का पाठ किया।

विशिष्ट अतिथि संस्था के  महासचिव डॉ प्रभु चौधरी ने वरिष्ठ कवि श्री जगन्नाथ विश्व के अवदान पर प्रकाश डाला और उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।  


वरिष्ठ पत्रकार डॉ शंभू पवार, झुंझुनू ने अटल जी की कविता गीत नया गाता हूं का पाठ किया।


वरिष्ठ साहित्यकार श्री अनिल ओझा, इंदौर ने नए वर्ष की मंगलकामना कविता के माध्यम से कहा कि जो मान प्रतिष्ठा है पाई वह अखंड अक्षुण्ण बनी रहे।


श्री राकेश छोकर, नई दिल्ली ने अपनी कविता के माध्यम से नव प्रेरणा का संचार किया।

डॉ रश्मि चौबे, गाजियाबाद में पानी पर केंद्रित अपना गीत सुनाया। जिसका मुखड़ा था पानी रे पानी तू मुझे लुभाता क्यों है। तू बेरंग होकर भी मेरी जिंदगी के हर रंग में नजर आता क्यूं है। बचपन को देखूं तो डुप  डुप करती हुई बूंदों के साथ मेरी कागज की नाव बहकर, मेरे बचपन में मेरे साथी की तरह मेरे साथ खेलता।


श्रीमती कुसुम लता कुसुम, नई दिल्ली ने चुनौती शीर्षक कविता सुनाई, जिसकी पंक्तियां थीं, जीवन है एक कठिन चुनौती जिसको है स्वीकार किया। बंजर है सपनों की धरती नहीं कभी प्रतिकार किया।

डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर ने अपनी रचना के माध्यम से कहा कि ए जिंदगी तू पहली सी  कितनी खूबसूरत है। जीवन में तूने कितने रंग है दिए, कदम कदम पर तूने कई रंग भरे। पर हमने ही तुझे बदरंग कर दिया, कितना सरल था जिंदगी का रास्ता। हमारे अहम और वहम से पड़ा वास्तव, जीवन बना कांटों का रास्ता।

श्रीमती अनीता मांडिलवार ने पुस्तकें शीर्षक कविता सुनाई। डॉक्टर गरिमा गर्ग, पंचकूला ने अपनी रचना के माध्यम से कहा मन के मीत दुनिया में अब मिलते नहीं हैं, इसलिए हम भी मुहब्बत करते नहीं हैं। माथेसुल जयश्री अर्जुन ने सुंदरता शीर्षक कविता सुनाई। 

जितेंद्र पांडेय, नई दिल्ली ने अटल जी पर केंद्रित कविता सुनाई।

कवयित्री अनुराधा अच्छवान, नई दिल्ली ने अपनी कविता से श्रोताओं को प्रभावित किया। 

संगोष्ठी के प्रारंभ में सरस्वती वंदना डॉ रश्मि चौबे, गाजियाबाद ने की। स्वागत गीत डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर ने प्रस्तुत किया।  

अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में  संस्था की साहित्यकार श्री अनिल ओझा इंदौर, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉक्टर सुवर्णा जाधव, मुंबई, डॉ लता जोशी, मुंबई, डॉ मुक्ता कौशिक, रायपुर, डॉ शंभू पंवार, झुंझुनू, डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर, डॉ राकेश छोकर, नई दिल्ली, डॉ संगीता पाल, कच्छ, डॉ शिवा लोहारिया, जयपुर, डॉ रोहिणी डाबरे, अहमदनगर, गरिमा गर्ग, पंचकूला, समीर सैयद, श्रीमती कुसुम लता कुसुम, नई दिल्ली, श्रीमती अनीता मांडिलवार, अनुराधा अच्छवान, नई दिल्ली आदि सहित अनेक साहित्यकारों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के अंत में हिंदी, मालवी और राजस्थानी के वरिष्ठ कवि श्री जगन्नाथ विश्व के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त किया गया और मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

अंतरराष्ट्रीय काव्य संगोष्ठी का संचालन साहित्यकार डॉ लता जोशी, मुंबई ने किया। आभार प्रदर्शन वरिष्ठ कवि श्री अनिल ओझा, इंदौर ने किया।

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