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मौसम में बदलाव ही देता उपहार है - श्री वाजपेयी ; राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना वेब काव्य संगोष्ठी सम्पन्न

मौसम जब अनुकुल हो, सुंदर लगे बयार, 

छटा निराली देख के हर्षित हे मन यार। 

मौसम का आनंद लो, ठंडी की शुरूआत, 

गर्मी अब नहीं भा रही, केवल ओढ़ो रात ।।



‘‘मौसम के बदलाव ही देता उपहार‘‘ विषय पर सारगर्भित कविता के साथ ही उद्बोधन राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के ऑनलाईन वेब काव्य संगोष्ठी के मुख्य वक्ता श्री हरेराम वाजपेयी(अध्यक्ष, हिन्दी परिवार इन्दौर) ने दिया।

 राष्ट्रीय काव्य संगोष्ठी का शुभारम्भ राष्ट्रीय सचिव गरिमा गर्ग(पंचकुला) ने सुमधुर सरस्वती वंदना से एवं राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री अनिल ओझा ने कवितामय स्वागत भाषण दिया।

 संस्था का प्रतिवेदन राष्ट्रीय उपमहासचिव डॉ. आशीष नायक ने एवं काव्य संगोष्ठी की प्रस्तावना उपमहासचिव श्रीमती लता जोशी ने प्रस्तुत की। संगोष्ठी में सर्वप्रथम एयरपोर्ट के रनवे पर सुमधुर आवाज में बांग्लाभाषी कवयित्री आर्यामा सान्याल ने कविता सुनायी, जी.डी. अग्रवाल ने कविता ‘‘कौन जाने यह पल.. जब तलक जिंदगी, तब तलक खुल के जी, कौन जाने ये पल, कल मिलें न मिलें‘‘, प्रियंका द्विवेदी द्वारा मुक्तक - ‘‘जख्म पे जख्म हम यार सहते गये, संग धारा मिली और बहते गये। चांदनी रात में दूर 

तुम जो हुए, आँसुओ से नयन रोज भरते गये, निक्की शर्मा रश्मि, मुम्बई ने कविता -‘‘पियूष दायिनी है ये, करुणा के अवतार। ममता स्नेहिल जिंदगी, माँ जीवन आधार ।। नारी के सम्मान से, सुखी होता परिवार। नारी को भी है सभी, नर जैसा अधिकार ।।‘‘ राकेश छोकर द्वारा कविता - ‘‘चुप्पी साधे हैं माँ पिता की मौत के बाद हो मृत्यु पराजित माँ का विश्वास ! झुकी रीढ़ का कोण किस हद तक टिकेगा समतल धरती से किस्सा दोहरायेगा..... सुनाई। श्रीमती पूर्णिमा कौशिक द्वारा कविता-‘‘मुस्कुराती हूं मैं...गुनगुनाती हूं मैं गीत गाती हूं मैं। मैं ने हंसने का वादा किया था कभी ।।

इसलिए सदा मुस्कुराती हूं मैं।। ऐ खुशी के पल कितने अनमोल हैं । फूलों से नाजुक मेरे बोल हैं।।

सबको फूलों की माला पहनाती हूं मैं। इसलिए सदा मुस्कुराती हो मैं ।।‘‘ एवं वरिष्ठ कवि-कवयित्री श्री सुंदरलाल जोशी ‘सूरज‘, सुश्री दिनेश परमार, डॉ. शैलचन्द्रा, दिव्या पाण्डेय, डॉ. रश्मि चौबे, श्रीमती सुवर्णा जाधव, श्रीमती हेमलता म्हस्के, हेमलता साहू, डॉ. सुशिला पाल, डॉ. शिवा लोहारिया, श्री अशोसिंह, श्री जितेन्द्र पाण्डेय, डॉ. शम्भू पंवार, अनुराधा अच्छवान आदि ने कविता पाठ किया।

 मुख्य अतिथि श्री ब्रजकिशोर शर्मा, डॉ. शहाबुद्दीन शेख ने मार्गदर्शन दिया। काव्य संगोष्ठी का संचालन डॉ. मुक्ता कौशिक ने काव्यमय किया जबकि आभार राष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी ने माना।

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