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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए समवेत और व्यवस्थित प्रयास जरूरी – प्रो शर्मा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति : वैशिष्ट्य और क्रियान्वयन पर केंद्रित राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी संपन्न

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए समवेत और व्यवस्थित प्रयास जरूरी – प्रो शर्मा  


राष्ट्रीय शिक्षा नीति : वैशिष्ट्य और क्रियान्वयन पर केंद्रित राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी संपन्न



देश की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें देश के अनेक विशेषज्ञ वक्ताओं ने भाग लिया। यह संगोष्ठी राष्ट्रीय शिक्षा नीति : वैशिष्ट्य और क्रियान्वयन पर केंद्रित थी। कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं मुंबई विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य डॉ शीतला प्रसाद दुबे, मुंबई थे। प्रमुख वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि डॉक्टर अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलाधिपति डॉ प्रकाश बरतुनिया, डॉ मंजू रूस्तगी, चेन्नई, डॉ राजेंद्र साहिल लुधियाना, श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई, डॉ शम्भू पंवार, चिड़ावा, झुंझुनूं, श्री राकेश छोकर, नई दिल्ली, डॉ शिवा लोहारिया, जयपुर, महासचिव डॉ प्रभु चौधरी एवं उपस्थित वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे ने की। यह संगोष्ठी राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित की गई।



मुख्य अतिथि डॉक्टर शीतला प्रसाद दुबे, मुंबई ने कहा कि शिक्षा में मातृभाषा और प्रादेशिक भाषा का समावेश महत्वपूर्ण है। नई शिक्षा नीति में कला, वाणिज्य, विज्ञान आदि सभी संकायों को समान महत्व मिलेगा। विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार किसी भी विषय का चयन कर सकेंगे। नई शिक्षा नीति मानवीय मूल्यों और राष्ट्रीयता की भावना में अभिवृद्धि के साथ आर्थिक उपार्जन में भी सहायक सिद्ध होगी। इस शिक्षा नीति के माध्यम से रचनात्मकता को निर्णयात्मक बनाया जाएगा।



कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉक्टर अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलाधिपति डॉ प्रकाश बरतुनिया ने नई शिक्षा नीति की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।



मुख्य वक्ता लेखक एवं संस्कृतिविद् प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा, उज्जैन ने कहा कि तेजी से परिवर्तनशील स्थितियों के मध्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पर्याप्त लचीलापन रखा गया है। इसमें विषय वस्तु बढ़ाने से ज्यादा इस बात पर बल है कि विद्यार्थी तार्किक और रचनात्मक ढंग से विचार करने के लिए आगे आएं। साथ ही विविध विषयों के मध्य अन्तः संबंधों को देखने में समर्थ हों। यह शिक्षा नीति वैश्विकता के साथ-साथ स्थानीय विशेषताओं के साथ जुड़ने के लिए अवसर देगी। विद्यार्थियों में नई जानकारियों को बदलती परिस्थितियों में उपयोग में लाने की क्षमता का निर्माण जरूरी है। नई शिक्षा नीति में भाषा, प्रकृति, संस्कृति, परम्परा आदि सभी स्तरों पर विद्यार्थियों को स्थानीय परिवेश से भी जोड़ने पर बल दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए समवेत और व्यवस्थित प्रयास जरूरी हैं। इसके माध्यम से आमूलचूल परिवर्तन होगा। ऐसे में शिक्षक, विद्यार्थी और पालक सभी की मानसिकता में व्यापक बदलाव जरूरी है।




कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे ने कहा कि नवीन शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर बल दिया गया है। नई शिक्षा नीति में किए गए प्रावधानों से राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत आधार प्राप्त होगा।


आयोजन के विशिष्ट अतिथि संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ शंभू पवार, झुंझुनूं एवं राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार श्री राकेश छोकर, नई दिल्ली ने अपने उद्बोधन में नई शिक्षा नीति में अंतर्निहित संभावनाओं की चर्चा की।


मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई ने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से बालिकाओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्हें अनेक प्रकार के प्रशिक्षण दिए जाएंगे।



डॉक्टर शिवा लोहारिया, जयपुर ने कहा कि नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों को अपनी रुचि और दक्षता के अनुरूप विषय के अध्ययन की सुविधा प्राप्त होगी। योग और प्राणायाम को भी नई शिक्षा नीति में स्थान मिला है, जो शरीर, मन और मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।


डॉ राजेंद्र साहिल, लुधियाना ने अनुसंधान के क्षेत्र में स्तरीयता और गुणवत्ता वृद्धि के संबंध में राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किए गए प्रावधानों की चर्चा की। उन्होंने नैक द्वारा उच्च शिक्षण संस्थाओं के मूल्यांकन के लिए किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।


राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ मंजू रुस्तगी, चेन्नई ने नई शिक्षा नीति में अन्तरानुशासनिक अध्ययन और अनुसंधान की महत्त्वपूर्ण भूमिका की चर्चा की।


संगोष्ठी की संकल्पना एवं संस्था की गतिविधियों का प्रतिवेदन राष्ट्रीय महासचिव श्री प्रभु चौधरी ने प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण डॉक्टर ममता झा, मुंबई ने दिया। संस्था का परिचय डॉ भरत शेणकर, अहमदनगर ने प्रस्तुत किया।



सरस्वती वंदना डॉक्टर रोहिणी डाबरे, अहमदनगर ने की। अतिथि परिचय डॉ सुनीता चौहान, मुंबई ने दिया।


कार्यक्रम में डॉक्टर मुक्ता कौशिक, रायपुर, डॉ रश्मि चौबे, आगरा, प्रवीण बाला, पटियाला, मनीषा सिंह, पूनम सप्रा, लुधियाना, समीर सैयद, डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर, राव कुलदीप सिंह, भोपाल, डॉ संगीता पाल, कच्छ, मंजू रुस्तगी, चेन्नई आदि सहित अनेक प्रतिभागी उपस्थित थे।


कार्यक्रम का संचालन संस्था की राष्ट्रीय उप महासचिव डॉक्टर लता जोशी, मुंबई ने किया। आभार प्रदर्शन महाराष्ट्र इकाई की महासचिव डॉ कामिनी बल्लाल, अहमदनगर ने किया।


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