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‘‘भारत का संविधान दुनिया का सबसे विशाल, सर्वश्रेष्ठ और बाकि संविधानों का मार्गदर्शक’’ - प्रो. हरिसिंह कुशवाह

 

उज्जैन : 26 नवंबर 2020 को विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन अध्ययन शाला में ‘संविधान दिवस’ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पाण्डेय ने की एवं मुख्य अतिथि माधव महाविद्यालय के प्रो. हरिसिंह कुशवाह रहे। विभागाध्यक्ष प्रो. दीपिका गुप्ता ने स्वागत भाषण। कुलपतिजी का स्वागत प्रो. दीपिका गुप्ता एवं डॉ. वंदना पण्डित ने किया। प्रो. कुशवाह का स्वागत डॉ. वीरेन्द्र चावरे तथा  विद्यार्थी कल्याण संकायाध्यक्ष का स्वागत डॉ. कनिया मेड़ा ने किया। स्वागत भाषण विभागाध्यक्ष डॉ. दीपिका गुप्ता ने दिया। उपस्थितजनों से संविधान की प्रस्तावना का वाचन डॉ. वीरेन्द्र चावरे द्वारा करवाया गया।

      कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. कुशवाह ने कहा कि भारत का संविधान दुनिया का सबसे विशाल, सर्वश्रेष्ठ और बाकि संविधानों का मार्गदर्शक है। दुनिया में छः में से एक भारतीय इस संविधान द्वारा शासित होता है। इस संविधान से भारत का वर्तमान और भविष्य तय होता दिखाई देता है। आपने भारतीय संविधान में उल्लेखित विभिन्न भागों, अनुच्छेदों, मूल अधिकार एवं कर्तव्य आदि पर विस्तार से प्रकाश डाला।



      विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत का संविधान दुनिया के सबसे बड़े गणतंत्र का सबसे विशाल और लिखित संविधान है। हमारा ध्येय वसुधैव कुटुम्बकम है, जो कि दुनिया के अन्य संविधानों से अलग है। आपने विभिन्न देशों के संविधानों से तुलना कर भारतीय संविधान की विशेषताओं का उल्लेख किया। आपने अधिकार और कर्तव्यों में सामंजस्य को जरूरी बताया। आम नागरिकों को संविधान के प्रति जागरूक बनाने एवं कानून के क्रियान्वयन पर भी प्रकाश डाला।




      कार्यक्रम में पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. निशा वशिष्ठ, प्रो. अचला शर्मा, डॉ. ज्योति उपाध्याय, डॉ. राजेश्वर शास्त्री मुसलगावकर, डॉ. नलिनसिंह पंवार, डॉ. मेघा पाण्डेय, डॉ. राज बोरिया, डॉ. कमल बुनकर एवं विभाग के शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे। रिपोर्टिंग डॉ. शिव कुशवाह ने की। संचालन डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने किया एवं आभार डॉ. अजयसिंह भदौरिया ने माना। जानकारी डॉ. वीरेन्द्र चावरे ने दी।

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