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आलोक के प्रति आस्था मनुष्य सभ्यता का प्रमुख अंग रही है – प्रो शर्मा, लौकिक जीवन पर अलौकिक आभा का पर्व पर केंद्रित राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी संपन्न

आलोक के प्रति आस्था मनुष्य सभ्यता का प्रमुख अंग रही है – प्रो शर्मा  
लौकिक जीवन पर अलौकिक आभा का पर्व पर केंद्रित राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी संपन्न  


देश की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ वक्ताओं और साहित्यकारों ने भाग लिया। राष्ट्रीय संगोष्ठी लौकिक जीवन पर अलौकिक आभा का पर्व पर केंद्रित थी। कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। विशिष्ट वक्ता शिक्षाविद डॉ शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे थे। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री राकेश छोकर, नई दिल्ली, वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरेराम वाजपेयी, इंदौर, डॉ रश्मि चौबे, आगरा, डॉक्टर मुक्ता कौशिक, रायपुर, डॉक्टर लता जोशी, मुंबई, महासचिव डॉ प्रभु चौधरी एवं उपस्थित वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई, ने की। यह संगोष्ठी दीपोत्सव पर्व पर आयोजित की गई।



मुख्य अतिथि लेखक एवं संस्कृतिविद् प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि अनादि काल से आलोक के प्रति आस्था मनुष्य सभ्यता का प्रमुख अंग रही है। दीपावली लोक से लोकोत्तर को जोड़ने का अनूठा अवसर देती है। दीपावली त्रिविध तापों से ग्रस्त लौकिक जीवन पर अलौकिक आभा का पर्व है। दीपावली के पाँच दिन अज्ञात अतीत से न जाने कितनी जातीय स्मृतियों, लोक एवं शास्त्र की परम्पराओं और सांस्कृतिक - सामाजिक मूल्यों को लेकर आते हैं और फिर हमारे आसपास से जुड़ी पारिवेशीय चेतना के साथ दोहराए जाते हैं। लक्ष्मी का स्थिर वास वहां माना गया है, जहां परस्पर प्रेम, शुभत्व, स्वच्छता और शुचिता होती है। इस पर्व के पीछे गहरी पर्यावरणीय दृष्टि रही है। लक्ष्मी का संबंध कृषि, वनस्पति, समुद्र एवं जल स्रोतों के साथ माना गया है। उनकी उपासना के लिए इन्हीं स्थानों से प्राप्त उपादानों को अर्पित किया जाता है। यह पर्व परंपरा के साथ आधुनिकता, पुराख्यान के साथ वैज्ञानिकता के समन्वय का पर्व है। दीपावली पर्व अनेक सदियों से सर्वधर्म सद्भाव और लोकोपकार के लिए समर्पित होने की प्रेरणा देता आ रहा है। सही अर्थों में यह समूचेपन का, मनुष्य जीवन के भरे-पूरेपन का उत्सव है।


विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ शिक्षाविद डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे ने कहा कि दीपावली पर्व भारतीय सभ्यता का सबसे अनूठा और परम पवित्र त्यौहार है। शास्त्र और लोक परंपरा में इस पर्व की विशेष महिमा मानी गई है, जिन पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है।


विशिष्ट अतिथि साहित्यकार श्री हरेराम वाजपेयी, इंदौर ने कहा कि दीपोत्सव अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला पर्व है। अलौकिक आभा के माध्यम से जन समुदाय को सार्थक संदेश मिलते हैं। उन्होंने इस अवसर पर दीप गीत भी प्रस्तुत किया।

 

विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री राकेश छोकर, नई दिल्ली ने कहा कि दीपावली पुरुषार्थ और बंधुत्व का पर्व है। ज्योति का यह पर्व सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुम्बई ने कहा कि दीपावली परस्पर स्नेह और सद्भाव का पर्व है। कोविड संकट के बावजूद लोगों ने दीपों के इस पर्व को नई आशा का संचार करते हुए मनाया।

 





दीपोत्सव से जुड़ी कविताएं डॉ रश्मि चौबे, आगरा, डॉक्टर मुक्ता कौशिक, रायपुर, डॉक्टर लता जोशी, मुंबई आदि ने प्रस्तुत कीं।




संस्था का परिचय, संगोष्ठी की संकल्पना एवं स्वागत भाषण राष्ट्रीय महासचिव श्री प्रभु चौधरी ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दीपावली ज्योति का सांस्कृतिक पर्व है। इसका संबंध लक्ष्मी पूजन के साथ भगवान राम के अयोध्या आगमन से भी माना गया है। संस्था की गतिविधियों का प्रतिवेदन डॉ भरत शेणकर, अहमदनगर ने प्रस्तुत किया।  

सरस्वती वंदना साहित्यकार श्री सुंदरलाल जोशी, नागदा ने की। अतिथि परिचय डॉ रोहिणी डाबरे, अहमदनगर ने दिया।

कार्यक्रम में डॉक्टर मुक्ता कौशिक, रायपुर, डॉ रश्मि चौबे, आगरा, डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर, डॉक्टर लता जोशी, मुंबई, राम शर्मा, मनावर, डॉ आशीष नायक, रायपुर, डॉक्टर गरिमा गर्ग, मथेसुल जयश्री अर्जुन आदि सहित अनेक प्रतिभागी उपस्थित थे। 



कार्यक्रम का संचालन संस्था की डॉक्टर रोहिणी डाबरे, अहमदनगर ने किया। आभार प्रदर्शन राष्ट्रीय उप महासचिव डॉक्टर लता जोशी, मुंबई ने किया।


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