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वसुधैव कुटुंबकम् की उदात्त भावभूमि के अनुरूप है संयुक्त राष्ट्र की स्थापना, संयुक्त राष्ट्र दिवस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ

वसुधैव कुटुंबकम् की उदात्त भावभूमि के अनुरूप है संयुक्त राष्ट्र की स्थापना  



संयुक्त राष्ट्र दिवस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ



भारत नॉर्वेजियन सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम, द्विभाषी पत्रिका स्पाइल दर्पण एवं वैश्विका द्वारा संयुक्त राष्ट्र दिवस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजन के प्रमुख अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं विद्वान डॉ मोहनकांत गौतम, नीदरलैंड, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा और केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली के सहायक निदेशक डॉक्टर दीपक पांडे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ प्रवासी साहित्यकार और संस्था के अध्यक्ष श्री सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे ने की। इस मौके पर नॉर्वेजीय लेखिका सिगरीड मैरी ने विश्व बंधुत्व को समर्पित सुमधुर गीत की प्रस्तुति की।



कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए नीदरलैंड के वरिष्ठ साहित्यकार एवं नृतत्वशास्त्री श्री मोहनकांत गौतम ने कहा कि दुनिया आज कई समस्याओं से जूझ रही है। उनसे मुक्त होने के लिए व्यापक प्रयास जारी हैं। भारत को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थायी सदस्यता मिले, इसके लिए गम्भीर प्रयासों की आवश्यकता है।



मुख्य वक्ता लेखक एवं संस्कृतिविद् प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना वसुधैव कुटुंबकम् की उदात्त भावभूमि के अनुरूप है। दुनिया में एकजुटता और भाईचारा बेहद मायने रखता है। संयुक्त राष्ट्र दिवस इस बात की ओर याद दिलाता है। कोविड 19 के दौरान यूएन ने इस पर विशेष ध्यान दिया है कि जलवायु परिवर्तन के खतरों से पूरी दुनिया को सचेत होना होगा। साथ ही आर्थिक असमानता से मुक्ति की राह खोजनी होगी। इस दौर में बाल स्वास्थ्य और शिक्षा के मुद्दों पर भी व्यापक पैमाने पर प्रयास जरूरी हैं। युद्ध मुक्त दुनिया के निर्माण, मानव अधिकारों के संरक्षण, लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने, अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के पालन के साथ सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए प्रयत्न अविस्मरणीय हैं। प्रो शर्मा ने वरिष्ठ कवि श्री शरद आलोक के संग्रह लॉकडाउन से संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों के अनुरूप चुनिन्दा काव्य पँक्तियाँ सुनाईं।




अध्यक्षीय उद्बोधन वरिष्ठ साहित्यकार एवं मीडिया विशेषज्ञ श्री सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र दिवस अहिंसा, विश्व शांति, मानव अधिकार और स्वास्थ्य के प्रादर्शों को लेकर महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहा है। इसमें सभी देशों और विचारधाराओं के लोग हिस्सेदार बनें। अंतरराष्ट्रीय संकटों से मुक्ति और अक्षय विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।



डॉ. दीपक पाण्डेय, नई दिल्ली ने अपने वक्तव्य में कहा कि संयुक्त राष्ट्र बेहद मजबूत संगठन है, जिसमें दुनिया के लगभग 200 देशों से जुड़े हुए हैं। भारत प्रारंभ से ही संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सदैव योगदान देता रहा है। विश्व शांति की स्थापना के लिए प्रारम्भ से ही भारत सहयोग देता आ रहा है।



कवि सम्मेलन में मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट के संस्थापक डॉ रामनिवास मानव, नारनौल, इलाश्री जायसवाल, नोएडा, प्रो नजीब बेगम, चेन्नई, जया वर्मा, लन्दन, डॉ विक्रम सिंह, विनोद कालरा, ऋचा पांडेय, लखनऊ आदि ने अपनी कविताओं से विश्व शांति और समानता का संदेश दिया।



कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ सत्येन्द्र कुमार सेठी ने आयोजन की संकल्पना एवं स्वागत भाषण दिया।


प्रारंभ में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस से मंगलाचरण श्री सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक ने प्रस्तुत किया।



डॉ सत्येन्द्र कुमार सेठी ने संगोष्ठी का संचालन किया। आभार प्रदर्शन श्री सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक ने किया।


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