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समस्त भाषाओं और बोलियों के बीच मजबूत रिश्ता जरूरी – प्रो शर्मा

समस्त भाषाओं और बोलियों के बीच मजबूत रिश्ता जरूरी – प्रो शर्मा   


अन्तरराष्ट्रीय बहुभाषी वेब कवि सम्मेलन में देश दुनिया के कवियों ने किया काव्य पाठ



राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा अंतरराष्ट्रीय बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजन में देश - विदेश की अनेक भाषाओं के रचनाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ प्रवासी साहित्यकार एवं अनुवादक सुरेशचंद्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे थे। मुख्य वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद श्री बृजकिशोर शर्मा ने की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ बी एल आच्छा, चेन्नई, डॉ. सुजाता शुक्ल, रायपुर, डॉ. मनीषा वर्मा, इंदौर एवं डॉ प्रभु चौधरी थे। कवि सम्मेलन में हिन्दी, नॉर्वेजियन, मराठी, बांग्ला, निमाड़ी, मालवी, भोजपुरी, अवधी, छत्तीसगढ़ी आदि के कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।



ओस्लो, नॉर्वे के प्रवासी साहित्यकार एवं अनुवादक श्री सुरेश चंद शुक्ल शरद आलोक ने कहा कि अपनी संस्कृति को प्रतिष्ठित करने के लिए निरंतर प्रयास करना जरूरी है। दुनिया की तमाम भाषाएँ इस दुनिया को खूबसूरत बनाती हैं। भाषाएँ भिन्न - भिन्न हों, लेकिन भाव एक ही होते हैं। उन्होंने अवधी और नॉर्वेजियन भाषाओं में अपनी एक - एक कविता सुनाई।



लेखक एवं आलोचक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि देश - दुनिया की सभी भाषाएँ और बोलियाँ सदियों से मानवीय संवेदनाओं और मूल्यों की संवाहिका बनी हुई हैं। उनके बीच परस्पर विरोध और वैमनस्य के बजाय मजबूत रिश्ता कायम करने की आवश्यकता है। वर्तमान में अनेक बोलियां उपेक्षा की शिकार हैं। बोलियों के संरक्षण के लिए कोई बाहरी संरक्षक पदार्थ उपलब्ध नहीं है, उनका समुचित प्रयोग ही उन्हें बचा सकता है। विभिन्न बोलियों को संरक्षित करने के लिए लोक समुदायों में व्यापक सजगता लाना होगी। भाषाएं और बोलियां मिलकर ही किसी राष्ट्र की पहचान बनती है। उनसे दूर होकर राष्ट्र की पहचान से हम वंचित हो जाएंगे।  



अध्यक्षीय उद्बोधन में शिक्षाविद् श्री ब्रजकिशोर शर्मा ने कहा कि अनेक आक्रमणों के बावजूद हमारी भाषाएं और संस्कृति सुरक्षित बनी हुई है। उन्होंने सीता वनवास पर केंद्रित कविता रास्ते का सत्य सुनाई।


प्रो बी एल आच्छा, चेन्नई ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि बहुभाषी काव्य पाठ से बोलियों की जीवन्तता का प्रमाण मिला। बोलियाँ, भाषाओं को रस देती हैं। उन्होंने अपनी कविता स्पंदन का पाठ भी किया।


कवि सम्मेलन में साहित्यकार सुजाता शुक्ला, डॉ. उर्वशी उपाध्याय (हिन्दी), श्रीमती आर्यमा सान्याल (बांग्ला), श्रीमती सुवर्णा जाधव (मराठी), श्री शिशिर उपाध्याय (निमाड़ी), सुश्री हेमलता शर्मा (मालवी), डॉ. संगीता पाल (भोजपुरी), डॉ. जय भारती चन्द्राकर (छत्तीसगढ़ी) आदि ने काव्य पाठ किया।



निमाड़ी में श्री शिशिर उपाध्याय, बड़वाह ने मेहनो आयो कुमार को, ने पाक्यो भुट्टो जुवार को सुनाकर श्रोताओं को रस से सराबोर किया।


श्रीमती आर्यमा सान्याल, इंदौर ने जीवन के सुख - दुख पर केंद्रित स्वरचित बांग्ला रचना सुनाई। कविता की पंक्तियां थीं, सुख दुख मानिक जोर चिरंतन चिरस्थाई, आलोआर छायार मोतो। सुख आछे ताई दुख ओ आछे।


विशेष अतिथि डॉ. सुजाता शुक्ल ने हिंदी कविता दुर्गा स्तुति सुनाई। पंक्तियाँ थीं, दुर्गा मात भवानी काली जग से सब संताप हरो। विपदा आन पड़ी जन जन पे सुख दे कर निज ओज भरो। सत्कर्मों की लड़ियों से जीवन मे भर दो प्रभात। पूरी कर दो मनोकामना हाथ जोड़ नवाऊँ माथ।


मालवी में हेमलता शर्मा भोली बैन, इंदौर ने कविता मोबाइल को डब्ल्यो सुनाई। उनकी काव्य पंक्तियां थीं, मोबाइल का डबल्या ने असी कुच्मात मचई। खाणो छुट्यो, पीणो छुट्यों वर्जिश छूटी गई। बालक हुण की पढ़ई छूटी, आंख्यां फूटी गई। इनी मोबाइल का डबल्या ने असी कुच्मात मचई।


छत्तीसगढ़ी में जयभारती चंद्राकर, रायपुर ने स्वरचित जस गीत एवं मुक्ता कौशिक ने देवी वंदना प्रस्तुत की। डा. कौशिक की पंक्तियाँ थीं, माता तेरे चरणों में, भेंट हम चढ़ाते हैं। कभी नारियल तो कभी फूल चढ़ाते हैं।


श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुंबई ने मराठी कविता उंबरठा सुनाई। कविता की पंक्तियां थीं, आता तिनं, घराचा उंबरठाच टाकलाय काढून। आणि चौकटही टाकली मोडून। आता घेतेय मोकळा श्वास। आणि करते मुक्त संचार जगात।



श्रीमती रागिनी शर्मा, इन्दौर कवि सम्मेलन की सूत्रधार थीं। उन्होंने काव्य पंक्तियों के माध्यम से कहा, नये से ख़्वाब ले आये, नये अरमान ले आये। अजी हम आज महफ़िल में, नई मुस्कान ले आये।



उर्वशी उपाध्याय, इलाहाबाद ने हिंदी कविता का पाठ किया। इसकी पंक्तियां थी, कविता है तो लय है, जीवन में सरसता है। सागर की है गहराई, नदियों में तरलता है। धरा पर आते हैं जब हम, बहुत दुलारती है कविता। विदा की होती जब बेला, ठिठक सी जाती है कविता सुबह की गुनगुनी सी धूप, तारों ने लिखी कविता। पिता के मन की अभिलाषा, आंचल में पली कविता।।


भोजपुरी में संगीता पाल, कच्छ ने लोक गीत प्रस्तुत किया। उनके गीत की पंक्तियां थीं, आईल कोरोना बीमारी ए माई कइसे मंदिर में जाईं हो। छाईल बढ़ी महंगाई ए माई कइसे चुनरी चढ़ाईं हो।


प्रवीण बाला, पटियाला ने शक्ति की उपासना में गीत प्रस्तुत किया, जिसकी पंक्तियाँ थीं, शक्ति है माँ शक्तिदायिनी, सिंह पर सवार है सिंहवाहिनी। काल का भी काल बने महाकाली हो, असुरों का दमन करे शक्तिशाली वो।


स्वागत भाषण श्री जी डी अग्रवाल इंदौर में दिया। संस्था परिचय श्री अनिल ओझा, इंदौर ने दिया। प्रारंभ में सरस्वती वंदना लता जोशी, मुंबई में की।



कार्यक्रम में डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, डॉ मधुकर देशमुख, डॉ वीरेंद्र मिश्रा, इंदौर, श्रीमती लता जोशी, मुंबई डॉ शैल चंद्रा, डॉ रश्मि चौबे, डॉक्टर मुक्ता कौशिक आदि सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित थे।


अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन का संचालन रागिनी शर्मा, इंदौर ने किया। आभार प्रदर्शन संस्था के महासचिव डॉक्टर प्रभु चौधरी ने किया।




केंद्रीय मंत्री श्री गेहलोत की पुत्रवधू के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित



भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गेहलोत की पुत्रवधू और पूर्व विधायक श्री जितेंद्र गहलोत की धर्मपत्नी श्रीमती चंद्रकला गेहलोत के असामयिक दुखद निधन पर राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के पदाधिकारियों द्वारा गहरा शोक व्यक्त किया गया। संस्था के सदस्यों ने दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।


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