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सादगी और सरलता की पुण्‍याई जीवन के बाद भी वर्षो-बरस तक रहती है - श्री कुशवाह


उज्‍जैन। मालवा ही नही प्रदेश के एकमात्र कवि जिन्‍होंने अपना रचनाकर्म सवैया छन्‍द में किया। सहज,सरल व्‍यक्तित्‍व के धनी सवैया सम्राट स्‍व. श्री दुलेसिंह जी सिकरवार के आज 13 वें पुण्‍य स्‍मरण पर ना सिर्फ परिजन बल्कि इष्‍ट -मित्र व नगर के साहित्‍य साधकगणों की उपस्थिति आज इस बात को प्रमाणित करती है कि सादगी और सरलता की पुण्‍याई जीवन के बाद भी वर्षो-बरस तक रहती है। उक्‍त विचार स्‍व.दुलेसिंह सिकरवार स्‍मृति मंच के संरक्षक श्री राजेश सिंह कुशवाह निदेशक अपना चैनल उज्‍जैन द्वारा व्‍यक्‍त किए। आप लक्ष्‍मी नगर स्थित दुलेसिंह स्‍मृति सभागार में नगर के वरिष्‍ठ कवि सवैया सम्राट स्‍व. दुलेसिंह सिकरवार के 13 वें पुण्‍य स्‍मरण समारोह में अतिथि के रूप बोल रहे थे।



यह जानकारी स्‍मृति मंच के संयोजक श्री श्‍याम सिंह सिकरवार ने दी आपने बताया कि म.प्र. संस्‍कृति संचालनालय एवं श्री दुलसिंह सिकरवार स्‍मृति मंच के संयुक्‍त तत्‍वाधान में प्रतिवर्ष अखिल भारतीय कवि सम्‍मेलन का आयोजन किया जाता था।



विश्‍वव्‍यापी इस कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष यह 13 वाॅ आयोजन स्‍व. दादा श्री दुलेसिंह जी के इष्‍ट-मित्र परिजनों के मध्‍य सादगी से मनाया गया। स्‍व. श्री दुलेसिंह सिकरवार जी की स्‍मृति में चामुण्‍डा माता मंदिर पर मंच के सभी सदस्‍यों द्धारा एकत्रित होकर अपनी और से दरिद्रनारायण भोज में भोजन-प्रसादी व फल वितरण किया गया।



परम्‍परानुसार इस वर्ष का श्री दुलेसिंह स्‍मृति सम्‍मान नगर के प्रसिद्ध ख्यातनाम हास्‍य कवि श्री सुभाष शर्मा ‘’ मंगल’’ को प्रदान किया गया सम्‍मान में अतिथियों द्धारा ‘’मंगल’’ को शाल- श्रीफल, स्‍मृतिचिंह व अभिनंदन पत्र भेंट किया गया। इस अवसर पर श्री मंगल द्धारा करोना पर अपनी नवीनतम रचना का पाठ किया।



राष्‍टीय स्‍तर पर स्‍थापित शहर के युवा कवि श्री सतीश सागर ने भी कविता पाठ किया। कार्यक्रम में श्री राजेश सिंह सिकरवार; श्री राजेन्‍द्र सिंह तोमर राजपूत आध्‍यात्मिक मण्‍डल उज्‍जयिनी, श्री बलवीर सिंह पंवार अध्‍यक्ष अ.भा. क्षत्रिय महासभा, श्री राजेश सिंह भदौरिया संभागीय अध्‍यक्ष अ.भा. युवा क्षत्रिय महासभा, श्री राजेश तिवारी आदि ने ऋद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर श्रीमति मंजु सिकरवार, श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह सिरवार, श्री नितिन सिंह सेंगर, आदि उपस्थित थे कार्यक्रम का संचालन कवि श्री नृसिंह इनानी ने किया आभार- श्री युवराज सिंह सिकरवार ने व्‍यक्‍त किया।


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