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पुराख्यान, जातीय स्मृतियों और लोक आस्था के प्रतीक हैं शक्ति के नौ रूप – प्रो शर्मा, राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी में हुआ शक्ति के नौ रूपों की आध्यात्मिक और सामाजिक महिमा पर मंथन

पुराख्यान, जातीय स्मृतियों और लोक आस्था के प्रतीक हैं शक्ति के नौ रूप – प्रो शर्मा 


राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी में हुआ शक्ति के नौ रूपों की आध्यात्मिक और सामाजिक महिमा पर मंथन   



प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के विद्वान वक्ताओं ने भाग लिया। यह संगोष्ठी शक्ति के नौ रूपों के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्त्व पर केंद्रित थी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। सारस्वत अतिथि शिक्षाविद डॉ शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे थे। विशिष्ट अतिथि श्री राकेश छोकर, नई दिल्ली, डॉ रश्मि चौबे, आगरा एवं संस्था के महासचिव डॉ प्रभु चौधरी ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ शैल चंद्रा, रायपुर ने की।



लेखक एवं संस्कृतिविद् प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि मातृ शक्ति की महिमा का अंकन और आराधना सुदूर अतीत से चली आ रही है। शक्ति के नौ रूप पुराख्यान, जातीय स्मृतियों और लोक आस्था के समन्वय के प्रतीक हैं। नवरात्रि मनुष्य की आद्य आस्था का पर्व है। समय के प्रवाह में इसमें परिवर्तन भी हुए हैं। सुदूर अतीत में देवी के निर्गुण, निराकार और परमसत्ता स्वरूप को महिमा मिली थी। कालांतर में तन्त्रोक्त विधानों,  पौराणिक आख्यानों,  मूर्ति एवं चित्रकला के माध्यम से देवी के विविध रूपों का अंकन होने लगा। यह महापर्व नारी शक्ति के प्रति आस्था के साथ मनुष्य को प्रकृति और पर्यावरण के महत्त्व से जोड़ता है। कृषि, वन्य और पर्वतीय संस्कृति के साथ मानव सभ्यता के रिश्तों को मजबूती देने का पाठ पढ़ाता है। विशिष्ट जलवायु और परिवेश के साथ स्वास्थ्य, जीवन शैली और खानपान के उचित व्यवहार के संकेत इस पर्व से मिलते हैं। समस्त प्रकार के व्यसनों मुक्ति का शाश्वत सन्देश इस पर्व को विशेष प्रासंगिकता देता है।  



शिक्षाविद डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे ने अपने उद्बोधन में मां दुर्गा के नौ रूपों का विस्तार से विवेचन किया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक और राष्ट्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्व है। इस पर्व के विशिष्ट वैज्ञानिक और आध्यात्मिक सरोकार हैं। अनेक श्रद्धालुजन अन्न का त्याग कर उपवास और अनुष्ठान करते हैं, जिनका स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष महत्व है।



विशिष्ट अतिथि समाजसेवी एवं पत्रकार श्री राकेश छोकर, नई दिल्ली ने कहा कि नवरात्रि पर्व के माध्यम से सदियों से नारी शक्ति के प्रति सम्मान के भाव का प्रसार होता आ रहा है। वर्तमान में इस पर्व के संदेश को जन जन तक पहुंचाने की जरूरत है। 



कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्था की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉक्टर शैल चंद्रा, रायपुर ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर मातृशक्ति के नौ रूपों की उपासना की जाती है। नवरात्रि पर्व नारी सशक्तीकरण और बेटी बचाओ का संदेश देता है। नारी के समुचित सम्मान से देवी की उपासना पूर्ण हो सकती है।



कार्यक्रम की रूपरेखा संस्था के महासचिव डॉक्टर प्रभु चौधरी ने प्रस्तुत की।



प्रारंभ में सरस्वती वंदना पूर्णिमा कौशिक ने की। स्वागत भाषण डॉ आशीष नायक, रायपुर ने दिया। संस्था एवं अतिथि परिचय डॉ प्रवीण बाला, पटियाला ने दिया।


कार्यक्रम में डॉक्टर लता जोशी, मुंबई, डॉ आशीष नायक, रायपुर, डॉ बालासाहब बछकर, डॉ रिया तिवारी, अशोक सिंह, डॉक्टर रोहिणी डाबरे, अहमदनगर, डॉ सुवर्णा जाधव, मुंबई, डॉ प्रियंका सोनी, श्रीमती आभा श्रीवास्तव, श्रीमती प्रभा बैरागी, समीर सैयद, सुनीता चौहान, डॉ वीरेंद्र मिश्रा, इंदौर, डॉ रश्मि चौबे आदि सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित थे।



राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का संचालन छत्तीसगढ़ राज्य की महासचिव डॉ मुक्ता कौशिक, रायपुर ने किया। आभार प्रदर्शन संस्था के राष्ट्रीय महासचिव डॉ प्रभु चौधरी ने किया। 


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