Skip to main content

मौत के सौदागरों को नेस्तनाबूत किया जाए, मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दिए निर्देश, उज्जैन जोन में डेढ़ हजार लीटर की जप्ती, अन्य जोन में भी कार्यवाही प्रारंभ

मौत के सौदागरों को नेस्तनाबूत किया जाए


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दिए निर्देश


उज्जैन जोन में डेढ़ हजार लीटर की जप्ती, अन्य जोन में भी कार्यवाही प्रारंभ


 


भोपाल : शुक्रवार, अक्टूबर 16, 2020, 14:27 IST



मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नशीली वस्तुओं के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों, उनके द्वारा अवैध रूप से ऐसे पदार्थों की आपूर्ति और बिक्री पर नजर रखी जाए। ऐसे लोगों की धरपकड़ की जाए और नशे के ऐसे सौदागरों को नेस्तनाबूत किया जाए। उज्जैन की तरह अन्य स्थानों पर यदि ऐसी वस्तुएं बेची जा रही हों तो दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज निवास पर आयोजित बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों से उज्जैन में जहरीले नशीले द्रव के सेवन से हुई मौतों के संबंध में दोषियों के विरुद्ध की गई कार्यवाही की समीक्षा कर रहे थे।


बैठक में बताया गया कि उज्जैन में दोषी और लापरवाह पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं। करीब डेढ़ हजार लीटर नशीले द्रव्य पदार्थ भी जप्त किए गए हैं। अन्य पुलिस जोन में भी ऐसी कार्यवाही चल रही है। पुलिस स्टाफ ऐसे व्यक्तियों की खोज और गिरफ्तारी कर रहा है जो यह व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने स्वास्थ्य विभाग को भी ऐसे पदार्थों की बिक्री और आपूर्ति करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने इस तरह की शराब अथवा अन्य नशीली चीजों के स्रोत, उनकी लायसेंसिंग और आपूर्ति के पहलुओं की जांच और अध्ययन कर प्रतिबंधात्मक वैधानिक कदम उठाए जाएं। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस ने बताया कि वे आज ही इस संबंध में एक अभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप दे रहे हैं। अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान ने स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर की जाने वाली कार्यवाही की जानकारी दी


मिलावट के विरुद्ध अभियान चलाएं


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मिलावट के विरुद्ध भी एक अभियान संचालित हो जिसमें दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मिलावटखोरों के विरुद्ध सख्त एक्शन लिया जाए। किसी भी तरह की मिलावट का मामला हो, दोषी व्यक्ति बचना नहीं चाहिए। आम जनता को बचाने के लिए सभी संबंधित विभाग सतर्क, सजग और सक्रिय रहें। सिस्टम चुस्त-दुरुस्त बनाएं ताकि गड़बड़ियां न हों। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि उन्हें प्रतिदिन इस दिशा में की गई कार्यवाही की जानकारी प्रदान की जाए। प्रदेश में किसी भी स्थान पर इस तरह की अवैध गतिविधियों को प्रश्रय न मिले, जो अधिकारी-कर्मचारी ऐसे कार्यों को प्रश्रय देंगे उनके विरुद्ध भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।


Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

चौऋषिया दिवस (नागपंचमी) पर चौऋषिया समाज विशेष, नाग पंचमी और चौऋषिया दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति और अर्थ: श्रावण मास में आने वा ली नागपंचमी को चौऋषिया दिवस के रूप में पुरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "चतुरशीतिः" से हुई हैं जिसका शाब्दिक अर्थ "चौरासी" होता हैं अर्थात चौऋषिया समाज चौरासी गोत्र से मिलकर बना एक जातीय समूह है। वास्तविकता में चौऋषिया, तम्बोली समाज की एक उपजाति हैं। तम्बोली शब्द की उत्पति संस्कृत शब्द "ताम्बुल" से हुई हैं जिसका अर्थ "पान" होता हैं। चौऋषिया समाज के लोगो द्वारा नागदेव को अपना कुलदेव माना जाता हैं तथा चौऋषिया समाज के लोगो को नागवंशी भी कहा जाता हैं। नागपंचमी के दिन चौऋषिया समाज द्वारा ही नागदेव की पूजा करना प्रारम्भ किया गया था तत्पश्चात सम्पूर्ण भारत में नागपंचमी पर नागदेव की पूजा की जाने लगी। नागदेव द्वारा चूहों से नागबेल (जिस पर पान उगता हैं) कि रक्षा की जाती हैं।चूहे नागबेल को खाकर नष्ट करते हैं। इस नागबेल (पान)से ही समाज के लोगो का रोजगार मिलता हैं।पान का व्यवसाय चौरसिया समाज के लोगो का मुख्य व्यवसाय हैं।इस हेतू समाज के लोगो ने अपन