Skip to main content

मंत्रिमंडल ने ‘प्राकृतिक गैस मार्केटिंग सुधारों’ को मंजूरी दी

मंत्रिमंडल ने ‘प्राकृतिक गैस मार्केटिंग सुधारों’ को मंजूरी दी


दिनांक : 07 OCT 2020 4:31PM by PIB Delhi



प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने गैस आधारित अर्थव्‍यवस्‍था की दिशा में एक और महत्‍वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘प्राकृतिक गैस मार्केटिंग (विपणन) सुधारों को मंजूरी दे दी है। इस नीति का उद्देश्‍य पारदर्शी और प्रतिस्‍पर्धात्‍मक प्रक्रिया, गैस की बिक्री की बोली प्रक्रिया में सम्‍बद्ध गैस उत्‍पादकों को भाग लेने की अनुमति देने और उत्‍पादन साझा करने के ठेकों में पहले से ही मूल्‍य निर्धारित करने की आजादी देने वाली कुछ क्षेत्र विकास योजनाओं को विपणन की आजादी देकर गैस उत्‍पादकों द्वारा बाजार में बेची जाने वाली गैस के बाजार मूल्‍य का पता लगाने के लिए मानक कार्य पद्धति निर्धारित करना है।


 


इस नीति का उद्देश्‍य ई-बोली के जरिये ठेकेदारों द्वारा की जाने वाली बिक्री के लिए दिशा-निर्देश जारी कर बाजार मूल्‍य का पता लगाने के लिए पारदर्शी और प्रतिस्‍पर्धात्‍मक तरीके से प्राकृतिक गैस की बिक्री के लिए मानक कार्य पद्धति प्रदान करना है।


 


इस नीति ने खुली, पारदर्शी और इलैक्‍ट्रॉनिक बोली को ध्‍यान में रखते हुए सम्‍बद्ध कम्‍पनियों को बोली प्रक्रिया में भाग लेने की इजाजत दी है। इससे गैस की मार्केटिंग सरल हो जाएगी और प्रतिस्‍पर्धा को अधिक बढ़ावा मिलेगा। लेकिन यदि सम्‍बद्ध गैस उत्‍पादक ही इसमें भाग लेते हैं और कोई अन्‍य बोलीकर्ता नहीं होंगे तो दोबारा बोली लगानी होगी।


 


यह नीति क्षेत्र विकास योजनाओं (एफडीपी) को उन ब्‍लॉकों की मार्केटिंग की आजादी देगी जहां उत्‍पादन साझा करने के ठेके पहले से ही मूल्‍य निर्धारित करने की आजादी प्रदान कर रहे हैं।


 


ये सुधार पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा किए गए परिवर्तनकारी सुधारों पर आधारित हैं। गैस क्षेत्र में ये सुधार और गहरे होंगे और निम्‍नलिखित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्‍साहित करेंगे :



  • उत्‍पादन से जुड़ी नीतियों की सम्‍पूर्ण पारिस्थितिकी प्रणाली, प्राकृतिक गैस के बुनियादी ढांचे और मार्केटिंग को अधिक पारदर्शी बनाया गया है जिसमें कारोबार को सुगम बनाने पर विशेष ध्‍यान दिया गया है।

  • ये सुधार प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्‍पादन में निवेश को बढ़ावा देकर और आयात निर्भरता को कम करके आत्‍मनिर्भर भारत के लिए काफी महत्‍वपूर्ण साबित होंगे।

  • ये सुधार निवेश को प्रोत्‍साहित कर गैस आधारित अर्थव्‍यवस्‍था की ओर बढ़ने में एक और मील का पत्‍थर साबित होंगे।

  • बढ़े हुए गैस उत्‍पादन का उपभोग पर्यावरण में सुधार में मदद करेगा।

  • ये सुधार एमएसएमई सहित गैस उपभोग क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करेंगे।

  • घरेलू उत्‍पादन शहरी गैस वितरण और सम्‍बद्ध उद्योगों जैसे डाउनस्‍ट्रीम उद्योगों में निवेश बढ़ाने में मदद करेगा।


सरकार ने कारोबार को सुगम बनाने पर ध्‍यान केन्द्रित करते हुए निवेश को आसान बनाने के लिए अपस्‍ट्रीम क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधार हाथ में लिए हैं। ओपन एसरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी) जो निवेशक चालित क्षेत्रफल नीलामी प्रक्रिया है, उसने देश में पर्याप्‍त क्षेत्रफल बढ़ाया है। 2010 और 2017 के बीच किसी ब्‍लॉक का आवंटन नहीं किया गया जिससे घरेलू उत्‍पादन की दीर्घकालिक व्‍यवहार्यता प्रभावित हुई। 2017 के बाद से 105 अन्‍वेषण ब्‍लॉकों के अंतर्गत 1.6 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र आवंटित किया गया है। इससे आने वाले समय में घरेलू उत्‍पादन की स्थिरता सुनिश्चित होगी।


 


सरकार गैस क्षेत्र में अनेक सुधार लेकर आई है और इसके परिणामस्‍वरूप पूर्वी तट में 70,000 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश किया गया है। पूर्वी तट से गैस उत्‍पादन देश की बढ़ी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर आत्‍मनिर्भर भारत के लिए योगदान देगा।


 


फरवरी 2019 में, सरकार ने अपस्‍ट्रीम क्षेत्र में बड़े सुधारों को लागू किया और अधिकतम उत्‍पादन पर ध्‍यान देकर मिसाल के तौर पर परिवर्तन किया। ओएएलपी राउंड्स के अंतर्गत क्षेत्रफल आवंटित किया जा रहा है जो केवल कैट II और कैट III बेसिन की कार्य योजना पर आधारित होगा।


घरेलू गैस उत्‍पादन में पूर्ण मार्केटिंग और मूल्‍य निर्धारित करने की आजादी है। 28 फरवरी 2019 के बाद मंजूर सभी अन्‍वेषण और क्षेत्र विकास योजनाओं को पूर्ण बाजार और मूल्‍य निर्धारित करने की आजादी है।


Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक