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महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति जी के करकमलों से सिंहस्थ विमर्श पुस्तक का लोकार्पण सम्पन्न, राजभवन में हुआ सिंहस्थ विमर्श पुस्तक का लोकार्पण

महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति जी के करकमलों से सिंहस्थ विमर्श पुस्तक का लोकार्पण सम्पन्न


राजभवन में हुआ सिंहस्थ विमर्श पुस्तक का लोकार्पण



विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा प्रकाशित पुस्तक सिंहस्थ विमर्श का लोकार्पण मध्यप्रदेश की महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनन्दीबेन पटेल के करकमलों से भोपाल स्थित राजभवन में सम्पन्न हुआ। पुस्तक का विमोचन विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने करवाया। कुलपति प्रो पांडेय ने इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल जी को विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा महात्मा गांधी के एक सौ पचासवें जयंती वर्ष पर प्रकाशित पुस्तक महात्मा गांधी : विचार और नवाचार की प्रति भेंट की। महामहिम राज्यपाल जी ने इन दोनों पुस्तकों की सराहना की।


सिंहस्थ विमर्श पुस्तक सिंहस्थ महापर्व पर विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा करवाए गए अपने ढंग के अद्वितीय अन्तरानुशासनिक अनुसंधानात्मक अध्ययन पर केंद्रित है। पुस्तक के प्रधान संपादक विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा हैं। पुस्तक के संपादक मंडल में डॉ राकेश ढंड, डॉ रूबल वर्मा, डॉ प्रशांत पुराणिक एवं रमण सोलंकी सम्मिलित हैं। पुस्तक का आकल्पन वरिष्ठ चित्रकार श्री अक्षय आमेरिया ने किया है। पुस्तक में वरिष्ठ चित्रकार श्री संदीप राशिनकर एवं श्री अक्षय आमेरिया के सिंहस्थ महापर्व पर केंद्रित विशेष रेखांकन प्रकाशित किए गए हैं।



विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा उज्जैन में प्रति बारह वर्ष में होने वाले सिंहस्थ महापर्व के विविध पक्षों का समग्र दृष्टिकोण से अनुसंधानात्मक अध्ययन करने की एक महत्त्वाकांक्षी परिकल्पना संकल्पित की गई थी, जो विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं शोधार्थियों द्वारा सम्पन्न की गई। विश्वविद्यालय द्वारा इस योजना के अन्तर्गत प्रमुखतः सांस्कृतिक, आर्थिक, सामाजिक, पार्यटनिक, ऐतिहासिक एवं दार्शनिक आदि पक्षों पर केन्द्रित अनुसन्धानात्मक अध्ययन एवं विश्लेषण किया गया, जो पुस्तक सिंहस्थ विमर्श (सिंहस्थ महापर्व 2016: अन्तरानुशासनिक अनुसंधानात्मक अध्ययन) के रूप में प्रकाशित हुआ है।


इस सम्पूर्ण परियोजना के आधार बिन्दु थे - सिंहस्थ की ऐतिहासिक - पौराणिक पृष्ठभूमि, सिंहस्थ की खगोलीय एवं भौगोलिक स्थिति, सिंहस्थ का दार्शनिक एवं मानव-मूल्यपरक अध्ययन, सिंहस्थ: एक सांस्कृतिक समागम, सिंहस्थ महापर्व का पर्यावरणीय आयाम, सिंहस्थ का समाजशास्त्रीय अध्ययन, सिंहस्थ महापर्व का आर्थिक विश्लेषण, सिंहस्थ का साहित्यिक सन्दर्भ, सिंहस्थ का पार्यटनिक सन्दर्भ तथा भावी सिंहस्थ 2028: परामर्श एवं संभावनाएँ।



सम्पूर्ण अध्ययन के लिये प्राध्यापकों एवं उनके सहयोगियों ने सम्पूर्ण मेला क्षेत्र का भ्रमण कर विभिन्न यात्रियों, व्यवसायियों, साधु-संतों से जानकारी संकलित कर सम्यक् विश्लेषण-विवेचन किया है। कई स्तरों पर यात्रियों से प्रश्नावली के माध्यम से जानकारियाँ एकत्र कर उनका वैज्ञानिक ढंग से विश्लेषण किया गया। नदी जल की शुद्धता को भी इस पुस्तक में सम्मिलित किया गया है। स्वच्छता एवं शौचालयों की उपलब्धता, यात्रियों द्वारा उनके उपयोग पर भी तथ्य संकलन किए गए। समग्र और सारगर्भित तथ्यों के अध्ययन एवं विश्लेषण से परिपूर्ण पुस्तक सिंहस्थ विमर्श तैयार हुई है, जो सम्पूर्ण देश - दुनिया की किसी भी अकादमिक संस्था द्वारा किया गया अपने ढंग का विलक्षण उपक्रम है।



प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा, कुलानुशासक , विक्रम विश्वविद्यालय , उज्जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि सिंहस्थ विमर्श एवं महात्मा गांधी : विचार और नवाचार पुस्तकों के ई - संस्करण शीघ्र ही जारी होंगे, जिसका लाभ देश - दुनिया के विद्वान, प्रबुद्धजन, शोधकर्ता और जिज्ञासुजन ले सकेंगे।


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