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गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर किया गया गांधीवादी चिंतक श्री कुलश्रेष्ठ का सम्मान  ; महात्मा गांधी का संदेश सार्वभौमिक है -  शर्मा

महात्मा गांधी का संदेश सार्वभौमिक है -  शर्मा 


गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर किया गया गांधीवादी चिंतक श्री कुलश्रेष्ठ का सम्मान 



महात्मा गांधी की 151 वीं जयंती एवं वृद्धजन दिवस के अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी एवं गांधीवादी चिंतक श्री कृष्णमंगलसिंह कुलश्रेष्ठ का सम्मान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष शिक्षाविद् श्री ब्रजकिशोर शर्मा थे। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के महासचिव डॉक्टर प्रभु चौधरी थे।



कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लेखक एवं आलोचक प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी एक असाधारण समाजसेवी और इंसान थे। उन्होंने असमानता और उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई के माध्यम से असंख्य व्यक्तियों और विश्व नेताओं को प्रभावित और प्रेरित किया। गांधी जी का संघर्ष भारत के लोगों की स्वतंत्रता के साथ उनके जीवन में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए था। उनका संदेश सार्वभौमिक है। विश्व शांति, मानवता, समानता और अहिंसा के लिए उनकी आवाज को वैश्विक मान्यता मिली। दुनिया भर में शांतिपूर्ण स्वतंत्रता संघर्षों के लिए उनका योगदान अद्वितीय है। उनके द्वारा रोपित मूल्यों की प्रतिष्ठा से ही नए विश्व का निर्माण संभव है।


श्री ब्रजकिशोर शर्मा ने कहा कि भारतीय परंपरा में वृद्धजनों के प्रति आदर सम्मान का विशेष महत्त्व है। वरिष्ठ नागरिकों द्वारा समाजहित में दिए जा रहे मार्गदर्शन और कार्यों को महत्त्व दिया जाना चाहिए। नई पीढ़ी वृद्धजनों का सम्मान करे।


अपने सम्मान के प्रत्युत्तर में गांधीवादी चिंतक श्री कृष्णमंगलसिंह कुलश्रेष्ठ ने कहा कि संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने अल्प अवधि में ही विशिष्ट पहचान बना ली है। आज यह संस्था राष्ट्रीय फलक पर शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।


कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संस्था के महासचिव डॉ प्रभु चौधरी ने कहा कि अपने उत्कृष्ट कार्यों द्वारा समाज को दिशा दिखाने वाले विशिष्ट जनों का सम्मान संस्था करती आ रही है। श्री कुलश्रेष्ठ का सम्मान इसी कड़ी में एक विशिष्ट अवसर है। 


श्री कुलश्रेष्ठ को अतिथियों द्वारा सम्मान स्वरूप अभिनन्दन पत्र, शॉल, श्रीफल एवं सूत की माला अर्पित की गई।



कार्यक्रम में डॉक्टर प्रभु चौधरी द्वारा लिखित पुस्तक देवनागरी लिपि : तब से अब तक का लोकार्पण अतिथियों ने किया। पुस्तक में देवनागरी से जुड़े विभिन्न पक्षों के साथ देवनागरी प्रचार आंदोलन में महात्मा गांधी एवं आचार्य विनोबा भावे के प्रयासों पर केंद्रित आलेख संकलित किए गए हैं। 


प्रारंभ में अतिथियों द्वारा भारती ज्ञानपीठ परिसर में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर सूत की माला अर्पित की गई। स्वागत भाषण संस्था के प्रदेश सचिव श्री संजय जौहरी ने दिया।


कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि और संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री सुंदरलाल जोशी नागदा ने किया। आभार  वरिष्ठ मीडिया विशेषज्ञ श्री संदीप कुलश्रेष्ठ ने माना |


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