Skip to main content

भारत में कोरोना मृत्‍यु दर 22 मार्च के बाद से सबसे कम

भारत में कोरोना मृत्‍यु दर 22 मार्च के बाद से सबसे कम


पिछले 24 घंटों में 500 से कम मौतें दर्ज की गईं


14 राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों में केस मृत्‍यु दर 1 प्रतिशत से कम


दिनांक : 26 OCT 2020 12:01PM Delhi


देश के विभिन्‍न अस्‍पतालों में भर्ती कोरोना के मरीजों के प्रभावी चिकित्‍सकीय प्रबंधन को लेकर केन्‍द्र और राज्‍य/संघ शासित प्रदेशों के केन्द्रित प्रयासों से भारत में कोरोना से होने वाली मृत्‍यु दर 1.5 प्रतिशत हो गई है। कोरोना के नए मामलों की रोकथाम (कंटेनमेंट) की प्रभावी रणनीति, व्‍यापक पैमाने पर टेस्टिंग और सभी सरकारी एवं निजी अस्‍पतालों में मानकीकृत चिकित्‍सकीय प्रबंधन प्रोटोकॉल के कारण मौतों की संख्‍या में काफी गिरावट आई है।


देश में पिछले 24 घंटों में 500 से कम मौतें (480) दर्ज की गईं हैं।



विश्‍व में भारत में कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा सबसे कम है और यह 22 मार्च के बाद कम दर्ज किया गया है तथा इसमें लगातार गिरावट आ रही है।



कोविड प्रबंधन और प्रतिक्रिया नीति के एक हिस्‍से के रूप में केन्‍द्र सरकार ने कोविड की रोकथाम पर अधिक ध्‍यान केन्द्रित किया है और कोविड के गंभीर मरीजों को गुणवत्ता युक्‍त चिकित्‍सकीय देखभाल सेवा उपलब्‍ध कराई है जिससे मौतों में काफी कमी आई है और लोगों का जीवन बचाने में मदद मिली है। केन्‍द्र और राज्‍य/संघ शासित प्रदेशों की सरकारों के समन्वित प्रयासों से देश भर में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिली है और इस समय 2218 कोविड समर्पित अस्‍पताल गुणवत्तापूर्ण चिकित्‍सा सेवा उपलब्‍ध करा रहे हैं।


 


कोरोना से होने वाली मौतों को रोकने के लिए गंभीर रूप से पीडि़त मरीजों के चिकित्‍सकीय प्रबंधन में आईसीयू में कार्यरत डॉक्‍टरों की क्षमता को बढ़ाने की दिशा में नई दिल्‍ली स्थित एम्‍स ने ई-आईसीयू की शुरुआत की है। हफ्ते में दो दिन मंगलवार और शुक्रवार को टेली/वीडियो सलाह सत्रों का आयोजन किया जा रहा है जिसमें विशेषज्ञ राज्‍यों के अस्‍पतालों में आईसीयू में तैनात डॉक्‍टरों को परामर्श दे रहे हैं।


 


अभी तक ऐसे 25 टेली सत्रों का आयोजन किया जा चुका है और 34 राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों में 393 संस्‍थानों में इसमें हिस्‍सा लिया है।


 


कोरोना के गंभीर मरीजों के उपचार के लिए आईसीयू/डॉक्‍टरों की चिकित्‍सकीय प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एम्‍स नई दिल्‍ली ने स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के सहयोग से बार-बार पूछे जाने वाले सवालों की सूची तैयार की है और इन्‍हें केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्‍ट किया है। इन्‍हें निम्‍न लिंक के जरिए देखा जा सकता है।


 


https://www.mohfw.gov.in/pdf/AIIMSeICUsFAQs01SEP.pdf


अधिकतर राज्‍यों ने कोरोना की चपेट में आने की आशंका वाली आबादी की पहचान संबंधी सर्वेक्षण किए हैं जिनमें अधिक आयु वाले वृद्धजन, गर्भवती महिलाएं और अन्‍य बीमारियों से पीडि़त लोग शामिल हैं। इसके अलावा, विभिन्‍न प्रकार की तकनीकों जैसे मोबाइल एप्‍लीकेशन का इस्‍तेमाल कर अधिक जोखिम वाली आबादी पर लगातार निगरानी करना सुनिश्चित हुआ है जिससे कोरोना के मरीजों की जल्‍द पहचान, इनका बेहतर उपचार और मौतों में कमी लाने में सफलता मिली है। जमीनीस्‍तर पर अग्रिम पंक्ति के स्‍वास्‍थ्‍यकर्ताओं जैसे आशा और एएनएम ने प्रवासी आबादी के प्रबंधन तथा समुदाय स्‍तर पर इनमें जागरूकता बढ़ाने की दिशा में सराहनीय काम किया है। इसके परिणामस्‍वरूप 14 राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों में कोरोना मृत्‍यु दर 1 प्रतिशत से कम है।



पिछले 24 घंटों में 59,105 मरीज ठीक हुए हैं इसके साथ ही देश में कोरोना को मात देने वाले मरीजों की संख्‍या 71 लाख से अधिक (71,37,228) हो गई है। एक दिन में कोरोना से ठीक होने वाले सबसे अधिक मरीजों की वजह से भी राष्‍ट्रीय रिकवरी दर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और यह इस समय 90.23 प्रतिशत है।


 


भारत में लगातार कोरोना के सक्रिय मामलों में कमी आ रही है और इस समय कोरोना के सक्रिय मामले कुल पॉजिटिव मामलों का 8.26 प्रतिशत है और इनकी संख्‍या 6,53,717 है। यह आंकड़ा 13 अगस्‍त के बाद सबसे कम है जब कोरोना के सक्रिय मामले 653622 थे।


 


कोरोना से जितने नए मरीज ठीक हुए हैं उनमें से 78 प्रतिशत 10 राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों में है।


 


एक दिन में सबसे ज्‍यादा ठीक होने वाले कोरोना के मरीजों कर्नाटक से हैं जहां 10,000 से ज्‍यादा लोग ठीक हुए हैं और इसके बाद केरल का स्‍थान है जहां 7000 से ज्‍यादा लोग ठीक हुए हैं।



देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 45,148 नए पुष्‍ट मामले दर्ज किए गए हैं। नए पुष्‍ट मामलों में 82 प्रतिशत 10 राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों से हैं। केरल और महाराष्‍ट्र का नए मामलों में सबसे अधिक योगदान है जहां 6,000 से अधिक (प्रत्‍येक राज्‍य) मामले देखे गए हैं। इसके बाद कर्नाटक, दिल्‍ली और पश्चिम बंगाल में 4,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।



पिछले 24 घंटों में कोरोना से 480 मौतें हुईं हैं जिनमें से लगभग 80 प्रतिशत 10 राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों से है। मौत के नए मामलों में 23 प्रतिशत से अधिक महाराष्‍ट्र (112 मौतें) से हैं।



Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य