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नई शिक्षा नीति में हिंदी और भारतीय भाषाओं के विकास की अपार संभावनाएं हैं – प्रो. शर्मा

नई शिक्षा नीति में हिंदी और भारतीय भाषाओं के विकास की अपार संभावनाएं हैं – प्रो. शर्मा


नई शिक्षा नीति 2020 : भारतीय भाषाओं और बोलियों के संदर्भ में पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी संपन्न



देश की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 : भाषाओं और बोलियों के संदर्भ में पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिंदी विभाग के अध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। प्रमुख वक्ता डॉ शहाबुद्दीन नियाज़ मोहम्मद शेख, पुणे थे। अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष श्री ब्रजकिशोर शर्मा, उज्जैन ने की। विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध प्रवासी साहित्यकार एवं अनुवादक श्री सुरेशचंद्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे, राजकुमार यादव, मुंबई, श्री मोहनलाल वर्मा, जयपुर एवं संस्था के महासचिव डॉ प्रभु चौधरी ने विचार व्यक्त किए। यह संगोष्ठी हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित की गई।



मुख्य अतिथि लेखक एवं आलोचक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अधुनातन ज्ञान - विज्ञान को हिंदी एवं विभिन्न भाषाओं एवं बोलियों में लाने की आवश्यकता है। नई शिक्षा नीति में इस दिशा में महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रकट हो रही है। उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में दुनिया की प्रमुख भाषाओं से हिन्दी में त्वरित अनुवाद कार्य को बढ़ावा मिलना चाहिए। आने वाले समय में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए गहरे दायित्व बोध की जरूरत है, अन्यथा समानांतर शिक्षा व्यवस्था एवं अंग्रेजी माध्यम का फिर से वर्चस्व हो जाएगा। पूर्ण मानवीय क्षमता के विकास, गुणवत्तापूर्ण सार्वभौमिक शिक्षा और राष्ट्रीय एकीकरण के लिए हिंदी और भारतीय भाषाओं पर बल देना आवश्यक है। बहुभाषिकता भारत की शक्ति है, इसे नई शिक्षा नीति में महत्त्व मिला है।  



विशिष्ट अतिथि ओस्लो, नॉर्वे के वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक ने कहा कि अत्याधुनिक ज्ञान से जुड़ी पुस्तकें बोलियों में आएं, यह जरूरी है। शिक्षा को परिवेश से जोड़ने की आवश्यकता है। नए ज्ञान विज्ञान, स्थानीय पर्यावरण और कृषि से जुड़ी सामग्री को पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया जाना चाहिए।


अध्यक्षीय उद्बोधन में शिक्षाविद् श्री ब्रजकिशोर शर्मा कहा कि आज हिंदी को राष्ट्रीय गर्व से जोड़ना होगा। समाज में व्याप्त अंग्रेजी से जुड़ी ग्रंथि से मुक्त होना होगा। अपनी भाषाओं की प्रतिष्ठा के लिए विशेष उपाय करने होंगे। समय के अनुरूप नए शब्दों को हिंदी में लाने के लिए प्रयास करने होंगे। साथ ही हिंदी को उदार बनाना होगा


संगोष्ठी के प्रमुख वक्ता डॉ शहाबुद्दीन नियाज़ मोहम्मद शेख, पुणे ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक अंग्रेजों द्वारा दी गई शिक्षा प्रणाली को ही भारत में आगे बढ़ाया गया। नई शिक्षा नीति में बदलाव के अनेक सूत्र मौजूद हैं। इसमें विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर बल दिया गया है। अपनी भाषा के माध्यम से विद्यार्थी में समझदारी आती है। नई शिक्षा नीति इस बात पर बल देती है कि परिवार और क्षेत्र की भाषा के माध्यम से शिक्षा दी जाए, उससे ही प्रगति संभव है। हिंदी आगे बढ़ेगी तो बोलियाँ भी आगे बढ़ेंगी।



विशिष्ट अतिथि श्री राजकुमार यादव, मुंबई ने कहा कि नई शिक्षा नीति हिंदी एवं भारतीय भाषाओं की समृद्धि में सहायक सिद्ध होगी। बोलियां राष्ट्रभाषा को आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भाषाएं संस्कृति को आधार देती हैं। अपनी भाषा के माध्यम से शिक्षा से प्रगति होगी। साथ ही इससे रचनात्मकता को बल मिलेगा।


श्री रामेश्वर शर्मा मनावर, धार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।


विषय प्रवर्तन विशिष्ट अतिथि श्री मोहनलाल वर्मा, जयपुर ने किया। श्री वर्मा ने कहा कि बोलियों और भाषाओं को लुप्त होने से बचाने के लिए व्यापक जागरूकता लानी होगी।


संगोष्ठी की प्रस्तावना एवं संस्था की गतिविधियों का परिचय महासचिव डॉ प्रभु चौधरी ने प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण एवं संस्था परिचय दिनेश परमार ने दिया।


संगोष्ठी में डॉ वी के मिश्रा, इंदौर, डॉ रश्मि चौबे, डॉ लता जोशी, मुंबई, डॉ रोहिणी डाबरे, अहमदनगर, डॉ प्रवीण बाला, पटियाला, डॉ भरत शेणकर, डॉ शिवा लोहारिया, जयपुर, प्रभा बैरागी, डॉ शम्भू पंवार, झुंझुनूं, डॉ ज्योति सिंह, इंदौर, अनुराधा अच्छावन, रघुवीर सोलंकी, डॉ मुक्ता कौशिक, दिनेश परमार, ज्योति तिवारी, जयंत जोशी, सुनीता चौहान, दयाराम नर्गेश, मनीषा सिंह, जयभारती चंद्राकर, पूर्णिमा जेंडे, पंढरीनाथ देवले, डॉ शैल चंद्रा, डॉ ममता झा, विनोद विश्वकर्मा, अरुणा शुक्ला, आलोक कुमार सिंह आदि सहित देश के विभिन्न भागों के साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी एवं प्रतिभागी उपस्थित थे।


प्रारंभ में सरस्वती वंदना ज्योति तिवारी, इंदौर ने की।


कार्यक्रम का संचालन डॉ रश्मि चौबे, आगरा किया। आभार प्रदर्शन डॉ विनोद सोनगिर ने किया।


संगोष्ठी के अंत में वरिष्ठ कवि श्री अमि आधार निडर, आगरा एवं डॉ नवीन डबराल, उज्जैन के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त किया गया और उन्हें उपस्थित जनों द्वारा मौन श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


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