Skip to main content

अधिक संख्या में रोगियों के उपचार होने से भारत की कुल रिकवरी 30 लाख से अधिक हुई


अधिक संख्या में रोगियों के उपचार होने से भारत की कुल रिकवरी 30 लाख से अधिक हुई

0.5% से कम रोगी वेंटिलेटर पर, 2% आईसीयू में और 3.5%  से कम ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं



Date: 04 SEP 2020 3:18PM  Delhi

 

केन्‍द्र सरकार की टेस्‍ट-ट्रैक-ट्रीट रणनीति का एक लक्ष्‍य कोविड के कारण मृत्‍यु दर को घटाना और मामला मृत्‍यु दर को कम करना है। उच्‍च स्‍तर की रिकवरी बरकरार रखने तथा लोगों का जीवन बचाने के लिए चिकित्‍सा देखभाल के एक समान मानकीकृत स्तर को उपलब्‍ध कराने के लिए नैदानिक ​​उपचार प्रोटोकॉल को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।


न केवल भारत की मामला मृत्‍यु दर वैश्विक औसत से कम है, बल्कि इसमें लगातार कमी आ रही है। वर्तमान में यह 1.74% है। लेकिन सक्रिय मामलों का अनुपात का  0.5% से कम हिस्‍सा वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। आंकड़े दर्शाते है कि 2% मामले आईसीयू में हैं, 3.5% से कम सक्रिय मामलें है, जो ऑक्सीजन युक्‍त बेड पर है।


 



 


इन उपायों के परिणामस्वरूप, भारत की कुल कोविड-19 रिकवरी आज 30 लाख (30,37,151) से अधिक हो गई है।


पिछले 24 घंटों में 66,659 मरीजों के ठीक होने से भारत ने लगातार 8वें दिन 60,000 से अधिक मरीजों के ठीक होने की गति जारी रखी है। कोविड-19 रोगियों के बीच रिकवरी दर 77.15% है, जो यह दर्शाती है कि पिछले कई महीनों में मरीजों के ठीक होने की संख्‍या में काफी बढ़ोतरी हुई।


अधिक संख्‍या में मरीजों के ठीक होने से ठीक हुए मरीजों और सक्रिय मामलों के बीच अन्‍तर में काफी बढ़ोतरी हुई है। यह अंतर अब तक 22 लाख को पार कर गया। इससे यह सुनिश्चित होता है कि देश में सक्रिय मामलों की वास्तविक संख्‍या (8,31,124 जो सक्रिय चिकित्सा देखभाल के अधीन हैं) कम हुई हैं और वर्तमान में सक्रिय मामले  कुल पॉजिटिव मामलों के केवल 21.11% हैं।


 


कोविड-19 से संबंधित तकनीकी मुद्दों, दिशा-निर्देशों एवं परामर्शों पर सभी प्रामाणिक और अद्यतन जानकारी के लिए कृपया नियमित रूप से https://www.mohfw.gov.in/ और @MoHFW_INDIA देखें।


कोविड-19 से संबंधित तकनीकी सवाल technicalquery.covid19@gov.in और अन्य सवाल ncov2019@gov.in एवं @CovidIndiaSeva पर भेजे जा सकते हैं।


 


कोविड-19 को लेकर यदि कोई सवाल हो तो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के हेल्पलाइन नंबर: + 91-11-23978046 या 1075 (टोल-फ्री) पर कॉल करें। राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के हेल्पलाइन नंबरों की सूची भी https://www.mohfw.gov.in/pdf/coronvavirushelplinenumber.pdf पर उपलब्ध है।


Bkk News


Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets - http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar


Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य