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नार्वेजियन भाषा में सूरदास द्वारा रचित श्रीकृष्ण जन्म के पदों का अनुवाद और पाठ सुरेश चन्द्र शुक्ल द्वारा

आजु नन्द के द्वारे भीर के मूल पाठ और नॉर्वेजियन अनुवाद ने भारत और नॉर्वेवासी दर्शकों को मोहा 



उज्जैन। ओस्लो में प्रवासी लेखक सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' ने नार्वेजीय भाषा में अनुवाद करके श्रीकृष्ण जन्म पर प्रसिद्ध पद 'आजु नन्द के द्वारे भीर' सुनाया, जो महाकवि सूरदास ने रचा है। इस अवसर पर श्री सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सूरसागर के चुनिंदा पदों के अनुवाद द्वारा दो अलग परिवेश, संस्कृति और भाषाओँ के बीच श्रीकृष्ण के उदार चरित्र को जोड़ने का माध्यम बनाया गया है। पूरे विश्व में भारतवंशियों ने जन्माष्टमी मनायी, वहीं हम लोग ओस्लो, नार्वे में जन्माष्टमी मना रहे हैं। कृष्ण की विद्यास्थली उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में कृष्ण चरित की चित्र दीर्घा और सूरदास जी के गुरु महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की तिहत्तरवीं बैठक के दर्शन के दौरान उन्हें इस अनुवाद की प्रेरणा मिली थी। 



श्रीकृष्ण के जन्म के प्रसंग सूरदास कृत सूरसागर में वर्णित हैं। उनके प्रसिद्ध पद आजु नन्द के द्वारे भीर' का मूल पाठ और नॉर्वेजियन भाषा में अनूदित पाठ नार्वे के साहित्यकार सुरेशचन्द्र शुक्ल ने प्रस्तुत किया और इसका उपस्थित हिन्दी एवं नार्वेजियन भाषी समुदाय ने आनन्द लिया। सदियों पहले रोमावंशी भारत से यूरोप पहुंचे थे, जिनमें अनेक लोग अपने को राम और कृष्ण की परंपरा से जोड़ते हैं।  



उल्लेखनीय है कि दो सप्ताह पूर्व तुलसी जयन्ती पर नार्वे के सुरेशचन्द्र शुक्ल ने रामचरित मानस में गुरु वन्दना के अंशों का अनुवाद नार्वेजीय भाषा में प्रस्तुत किया था, जिसकी प्रशंसा भारत के विभिन्न प्रांतों के साथ स्कैंडिनेवियन देशों के प्रबुद्ध जनों ने की थी।


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