Skip to main content

अतिवृष्टि एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किया हवाई निरीक्षण

प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचे हेलीकाप्टर और एनडीआरएफ की टीमें
कई लोगों को नाव से निकाला सुरक्षित बाहर
राहत एवं बचाव कार्यों के साथ भोजन-आवास की सुविधा 


भोपाल : शनिवार, अगस्त 29, 2020, 20:32 IST


प्रदेश में अतिवृष्टि के कारण कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति से निपटने और आमजन को सुरक्षित जगह पहुँचाने के लिये युद्ध स्तर पर राहत कार्य किये जा रहे है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिये सीहोर में 2 हेलीकाप्टर और एनडीआरएफ की टीम, छिन्दवाड़ा में एक हेलीकाप्टर और एक सैनिक यूनिट कम्पनी तथा होशंगाबाद में भी एक सैनिक यूनिट कम्पनी पहुँच चुकी है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हेलीकाप्टर से जायजा भी लिया।


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज सुबह प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सभी संभागीय आयुक्त एवं कलेक्टर्स के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलों में प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर अतिवृष्टि एवं बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य शुरू कर दिये हैं। जिलों का मैदानी शासकीय अमला भी राहत एवं बचाव कार्यों में जुट गया है।





































































बाढ़/अतिवृष्टि की जानकारी



क्र



जिले का नाम



बाढ़ राहत हेतु संचालित शिविरों की संख्या



राहत शिविरों में रखे गये व्यक्तियों की



1



छिंदवाड़ा



59



4563



2



बालाघाट



42



890



3



रायसेन



8



788



4



होशंगाबाद



26



970



5



सीहोर



18



860



6



विदिशा



5



275



7



देवास



3



532



8



सिवनी



9



430



 



कुल



170



9308



विगत 24 घंटों में 13 जिलों के 394 ग्रामों में लगभग 4777 लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला गया है। छिन्दवाड़ा जिले में हवाई ऑपरेशन के माध्यम से 5 व्यक्तियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला गया। एक अन्य व्यक्ति के बचाव का ऑपरेशन जारी है। प्रभावित जिलों में 170 राहत शिविर संचालित हैं, जिनमें 9308 व्यक्तियों को ठहराया गया है।



होशंगाबाद : जिले में हो रही लगातार भारी बारिश और तवा, बारना एवं बरगी बांध से पानी छोड़े जाने से नर्मदा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से बाढ़ की स्थिति निर्मित हो रही है। बाढ़ आपदा नियंत्रण हेतु जिला प्रशासन की टीम पूरी तरह मुस्तैद है। जिले में निचली बस्तियों में जहां जलभराव की स्थिति निर्मित हो रही है वहां प्रशासन, पुलिस व होमगार्ड की टीम द्वारा लोगों को सुरक्षित स्थानों/राहत पुनर्वास केंद्रों पर पहुंचाने का कार्य लगातार किया जा रहा है। होशंगाबाद शहर की निचली बस्ती मालाखेड़ी में जलभराव के कारण फंसे लोगो को मोटर बोट से एनडीआरएफ व होमगार्ड की टीम ने रेस्क्यू किया।









बचाव कार्य एवं प्रबंधन


अतिवृष्टि से उत्पन्न हुई स्थिति से निपटने के लिये राज्य में बचाव कार्यों के लिये 6300 होमगार्ड के जवान और 150 मोटरवोट विशेष रूप से तैनात हैं। सीहोर और होशंगाबाद के लिये एयरफोर्स के 2 हेलीकाप्टर कल सुबह पहुँच जायेंगे। छिंदवाड़ा में एयरफोर्स का तीसरा हेलीकाप्टर पहले से ही तैनात है। एनडीआरएफ की एक-एक टीम होशंगाबाद, सीहोर और नरसिंहपुर में लगी हुई है। बनारस से एक एनडीएफ की टीम और आ रही है। सभी जिलों में एसडीआरएफ की टीमें पहले से ही तैनात हैं और बचाव कार्य कर रही हैं। अलर्ट सेना के 20 स्तंभ रखे गये हैं। राज्य शासन की एक उच्च-स्तरीय बैठक में पुलिस एवं सेना के अधिकारियों द्वारा यह निर्णय लिया गया कि बांध के गेट खोलने और बाढ़ की स्थिति के बारे में रेलवे, जिला प्रशासन सहित सीमावर्ती राज्यों के जिलों के साथ जानकारी साझा की जाये।



जिले में निचली बस्तियों एवं तटीय इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हुई है। वहां पर प्रशासन, होमगार्ड, एनडीआरफ व एसडीआरएफ की टीम द्वारा लोगों को रेस्क्यू कर राहत पुनर्वास केंद्रों पर पहुंचाने का कार्य लगातार किया जा रहा है। होमगार्ड के 110 जवान एवं एसडीआरएफ के 28 जवानों की टीम द्वारा महिमा नगर से लगभग 400 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इसी तरह विकासखंड बाबई के ग्राम बलाभेंट छोटा और बड़ा, चपलासर, पीलीकरार, कीरपुरा से लगभग 70 लोगों को, होशंगाबाद के ग्राम जासलपुर से 4 एवं जासलपुर टील से 14 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। भोपाल से आयी एनडीआरएफ के 30 जवानों की टीम द्वारा होशंगाबाद के ग्राम बांद्राभान, देवबसेरा, घानाबड, रामजीबाबा पर फंसे लगभग 80 लोगों को एवं होशंगाबाद के संजय नगर कॉलोनी में लगभग 20 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इटारसी के ग्राम पहानबर्री में डीआरसी केंद्र एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा लगभग 20 लोगों को रेस्क्यू किया गया। जिले में निचली बस्ती एवं तटीय इलाकों में राहत एवं बचाव का कार्य लगातार जारी है। साथ ही निचली बस्तियां एवं ग्रामों जहां जलभराव की स्थिति निर्मित हो रही है वहां के लोगों को नजदीकी राहत पुनर्वास केंद्र में त्वरित रूप से शिफ्ट किया जा रहा है। राहत पुनर्वास केंद्रों में राशन, बिजली स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधा आदि की समुचित व्यवस्था की गई है।


सीहोर : जिले के बुदनी विकासखण्ड के सोमलवाड़ा गाँव में बचाव एवं राहत के कार्य निरंतर जारी है। इस गाँव में एक व्यक्ति को एयर लिफ्ट किया गया। बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने का कार्य  किया जा रहा है। अतिवृष्टि से निर्मित हुई स्थिति में संभाग आयुक्त श्री कवींद्र कियावत और आईजी श्री उपेंद्र जैन पानी से घिरे हुए गाँव में बोट से पहुँचे। गाँव में फंसे हुए सभी आमजनों को स्थिति सामान्य होने और प्रशासन द्वारा हर संभव मदद उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। अतिवृष्टि और जलभराव की स्थितियों का जायजा लेने संभागायुक्त सुबह से पूरे संभाग के भ्रमण पर है।  


 संभागायुक्त श्री कियावत और आई जी भोपाल श्री उपेन्द्र जैन कई नदी नाले पार कर इस गांव तक पहुँचे। लगभग 250 आबादी वाला गाँव पूरी तरह पानी से घिरा हुआ है। पुलिस, होमगार्डस और स्थानीय प्रशासन ग्रामीणों को नाव से निकालने के लगातार प्रयास कर रहे है। नाव और गोताखोर बचाव कार्य मे लगे हुए है प्रशासन द्वारा भोजन सहित हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है।


विदिशा : ग्राम कुंआखेड़ी का आश्रित मजरा उस्नापुर में नेवन नदी में आई बाढ़ के कारण लगभग 250 लोग पानी में फंस गये, जिन्हें जिला एवं पुलिस ने होमगार्ड की सहायता से रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थलों पर लाया गया।


नरसिंहपुर : तहसील साईंखेड़ा के ग्राम बमोरी में रेस्क्यू टीम द्वारा 23 लोगों को नांवों के माध्यम से सुरक्षित बाहर निकाला। इसी प्रकार ग्राम बगदरा में बाढ़ में फंसे करीब 200 लोगों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित निकला गया। ग्राम सांगई और चिरहकलां से करीब 50 लोगों को रेस्क्यू किया जा रहा है। बाढ़ के कारण पेड़ों और मकानों की छतों से भी लोगों को रेस्क्यू किया। ग्राम कीरटोला, कड़ियाटोला सहित शक्कर नदी के निचले इलाके के गाँवों में राहत और बचाव के कार्य किये गये। प्रभावित लोगों के लिये राहत शिविर लगाकर भोजन, पेयजल एवं आवास की समुचित व्यवस्था की गई।



छिन्दवाड़ा : जिले में अतिवृष्टि के कारण जल भराव से जो क्षेत्र प्रभावित हुए वहाँ प्रशासन एवं एनडीआरएफ की टीम ने सक्रियता से राहत एवं बचाव कार्य किये। ग्राम बेलखेड़ा में 150 लोगों को सुरक्षित कैम्प पहुँचाया गया। बाढ़ में फँसे मधु कहार को हेलीकाप्टर से रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया।



Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह