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स्नातक अंतिम वर्ष एवं स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं ओपन बुक प्रणाली से, मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लिये महत्वपूर्ण निर्णय

भोपाल : सोमवार, जुलाई 27, 2020, 17:56 IST


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा है कि कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत उच्च शिक्षा में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और उनके कैरियर एवं भविष्य को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। स्नातक प्रथम, द्वितीय वर्ष एवं स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं को गत वर्ष के परीक्षा परिणाम तथा वर्तमान सत्र के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर आगामी कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। इसी प्रकार स्नातक अंतिम वर्ष एवं स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं के लिए कोरोना के संक्रमण से बचाव एवं शारीरिक दूरी को ध्यान में रखते हुए उनकी परीक्षाएं निवास में ही रहकर ओपन बुक प्रणाली से करवाई जाएंगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विद्यार्थियों को जनरल प्रमोशन देने पर उनकी फायनल डिग्री पर हमेशा सवाल उठाये जाते हैं, इसलिये ओपन बुक प्रणाली से परीक्षा लेने का निर्णय लिया गया है।


स्नातक अंतिम वर्ष एवं स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं को उनके लॉगिन आईडी तथा निर्धारित वेबसाइट पर प्रश्न पत्र उपलब्ध करवाये जाएंगे। ओपन बुक परीक्षा प्रणाली में परीक्षार्थी अपने निवास में ही रहकर उत्तर पुस्तिका लिख सकेंगे। परीक्षार्थी को अपनी उत्तर पुस्तिका संग्रहण केन्द्र में जमा करना होगी। इसके लिये हजारों की संख्या में संग्रहण केन्द्र स्थापित किये गये हैं। उत्तर पुस्तिका जमा करने के लिये परीक्षार्थी के पास दो विकल्प और होंगे, जिसमें डाक द्वारा और ई-मेल द्वारा भी उत्तर पुस्तिका भेजने की सुविधा होगी। इन छात्र-छात्राओं को गत वर्षो के प्राप्तांकों का 50 प्रतिशत वेटेज तथा ओपन बुक परीक्षा के प्राप्ताकों का 50 प्रतिशत वेटेज देते हुए स्नातक अंतिम वर्ष एवं स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम घोषित किए जाएंगे। स्नातक अंतिम वर्ष एवं स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा में 5.71 लाख छात्र-छात्राएँ शामिल होंगे।


विश्वविद्यालयीन परीक्षाएं सितम्बर माह में आयोजित की जाएंगी, जिसके परीक्षा परिणाम माह अक्टूबर में घोषित होंगे।


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने छात्र-छात्राओं से आव्हान किया कि सुनहरे भविष्य के लिये मन लगाकर पढ़ाई करें और कड़ी मेहनत करें, जिससे माता-पिता के साथ मध्यप्रदेश का भी गौरव बढ़ सके।



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