Skip to main content

मध्यप्रदेश के सभी जिलों में सप्ताह में एक दिन लगाएं आवश्यक प्रतिबंध ; सीमावर्ती जिलों को करें एडवाइजरी जारी ; मास्क लगाने एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग का हो कड़ाई से पालन

मास्क लगाने एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग का हो कड़ाई से पालन


सीमावर्ती जिलों को करें एडवाइजरी जारी
सभी जिलों में सप्ताह में एक दिन लगाएं आवश्यक प्रतिबंध
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की
 


भोपाल : बुधवार, जुलाई 8, 2020, 19:20 IST


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि प्रदेश में पिछले एक सप्ताह में प्रदेश के कुछ जिलों, विशेषकर सीमावर्ती जिलों से कोरोना के अधिक मामले आने से प्रदेश की कोरोना ग्रोथ रेट बढ़ी है। प्रदेश में पहले कोरोना ग्रोथ रेट 1.72 थी, जो बढ़कर 2.01 हो गई है। सभी जिलों में मास्क लगाने एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन हो यह सुनिश्चित किया जाए।  सभी सीमावर्ती जिलों में पब्लिक एडवाइजरी जारी की जाए। सभी जिलों में सप्ताह में एक दिन आवश्यक प्रतिबंध लागू किए जाएं।


मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री नरोत्तम मिश्रा, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, डीजीपी श्री विवेक जौहरी, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य डॉ मोहम्मद सुलेमान आदि उपस्थित थे।


मुख्य सचिव एवं डीजीपी तैयार करें मैकेनिज्म


बड़वानी, मुरैना एवं अन्य सीमावर्ती जिलों की समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वहां कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। वहां सीमा पार दूसरे प्रांतों में संक्रमण अधिक होने से इन जिलों में संक्रमण बढ़ रहा है। इस पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मुख्य सचिव एवं डीजीपी को निर्देश दिए कि वे इस संबंध में मैकेनिज्म तैयार कर पब्लिक एडवाइजरी जारी करें। हमें प्रदेश में हर स्थान पर कोरोना संक्रमण को बढ़ने से हर-हाल में रोकना है।


सैनिटाइजर नहीं तो जुर्माना


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि प्रदेश में मास्क का प्रयोग अनिवार्य किया गया है। इसी प्रकार शॉपिंग मॉल, कार्यालयों आदि  मैं सैनिटाइजर रखना आवश्यक है। ऐसा न करने पर जुर्माना किया जाए। सभी स्थानों पर फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन हो, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।


किल कोरोना अभियान के अच्छे परिणाम


बैठक में श्री सुलेमान ने बताया कि प्रदेश में किल कोरोना अभियान के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। पहले प्रदेश में टेस्टिंग क्षमता 6000 टेस्ट प्रतिदिन थी, जो इस अभियान के चलते 12104 पहुँच गई है। किल कोरोना अभियान  के अंतर्गत लिए गए सैंपल की पॉजिटिविटी दर 2.2 प्रतिशत आ रही है जो कि अच्छे संकेत हैं।


इंदौर की हालत में निरंतर सुधार


इंदौर जिले की समीक्षा में पाया गया कि वहां की हालत में निरंतर सुधार हो रहा है। इंदौर में कोरोना की पॉजीटिविटी दर निरंतर कम हुई है। पहले यह दर 11 प्रतिशत तक थी जो अब घटकर 2.12 प्रतिशत रह गई है। इंदौर में वर्तमान में 875 एक्टिव प्रकरण हैं तथा 3871 मरीज स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। इंदौर में मृत्यु दर एक प्रतिशत से भी नीचे आ चुकी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पूरी टीम को बधाई दी।


Bkk News


Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets - http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar


Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक