Skip to main content

हायर सेकेण्डरी एवं हाईस्कूल पूरक परीक्षा, हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक पाठ्यक्रम के द्वितीय अवसर की परीक्षा आवेदन 4 अगस्त से लिये जाएंगे 

भोपाल : शुक्रवार, जुलाई 31, 2020, 19:06 IST

हायर सेकेण्डरी एवं हाईस्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा वर्ष 2020 की पूरक परीक्षा एवं हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक पाठ्यक्रम द्वितीय अवसर परीक्षा के लिये आवेदन 4 अगस्त 2020 से हायर सेकेण्डरी परीक्षा प्रारंभ होने के एक दिन पूर्व मध्य रात्रि तक किये जा सकते हैं। इसी प्रकार हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक तथा हाईस्कूल परीक्षा के लिये विषयवार परीक्षा प्रारंभ दिनांक के एक दिन पूर्व मध्य रात्रि तक भरे जा सकेंगे।


एमपी ऑनलाइन कियोस्क से कर सकेंगे आवेदन


पूरक पात्र छात्र स्वयं एमपी ऑनलाइन के कियोस्क पर अपनी मुख्य परीक्षा के परीक्षाफल के आधार पर पूरक के विषय, रोल नंबर की जानकारी देकर शुल्क अदा कर आवेदन-पत्र भर सकेंगे। जो छात्र कियोस्क में जाकर पूरक परीक्षा के लिये आवेदन नहीं कर सकते, ऐसे नियमित छात्र अपनी शिक्षण संस्थान में तथा स्वाध्यायी छात्र आवदेन-पत्र अग्रेषण करने वाली संस्था में पूरक परीक्षा के आवेदन के लिये प्राचार्य को अपने नाम, अनुक्रमांक तथा पूरक के विषय की जानकारी भरने के साथ परीक्षा शुल्क जमा करा सकते हैं। संस्था ऐसे छात्रों को शुल्क जमा करने की रसीद देगी तथा कियोस्क में ऑनलाइन आवेदन भरेंगे।


हाई एवं हायर सेकेण्डरी पूरक परीक्षा तिथि


हायर सेकेण्डरी परीक्षा में केवल एक विषय तथा हाईस्कूल परीक्षा में 2 विषयों में अनुत्तीर्ण छात्रों को ही पूरक की पात्रता प्रदान की गई है। हायर सेकेण्डरी के समस्त विषयों की पूरक परीक्षा 14 सितंबर को होगी। हाईस्कूल पूरक परीक्षा 15 सितंबर से 22 सितंबर 2020 तक सुबह 9 से 12 बजे तक संपन्न होगी। पूरक परीक्षा में शामिल होने वाले सभी परीक्षार्थियों के प्रवेश-पत्र 5 सितंबर से ऑनलाइन प्राप्त किये जा सकेंगे। हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के नियमित एवं स्वाध्यायी विद्यार्थियों के लिये प्रति विषय परीक्षा शुल्क 350 रूपये एवं कियोस्क का शुल्क 25 रूपये होगा।


हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक पाठ्यक्रम द्वितीय अवसर परीक्षा


हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक पाठ्यक्रम द्वितीय अवसर परीक्षा में केवल ऐसे परीक्षार्थी शामिल होंगे जो हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक पाठ्यक्रम मुख्य परीक्षा 2020 में पूर्ण विषयों में शामिल होकर परीक्षा में अनुत्तीर्ण अथवा अनुपस्थित रहे हों। परीक्षा 15 सितंबर से 21 सितंबर 2020 तक सुबह 9 से 12 बजे संपन्न होगी। हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक परीक्षा शुल्क 2 विषय तक 350 रूपये, 4 विषय तक 500 रूपये, 4 से अधिक विषय तक 600 रूपये शुल्क देना होगा, कियोस्क शुल्क 25 रूपये देय होगा।


प्रायोगिक परीक्षा


हायर सेकेण्डरी एवं हाईस्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा के ऐसे विषय जिनमें प्रायोगिक परीक्षा के प्रावधान है, सैद्धांतिक अथवा प्रायोगिक भाग जिसमें भी छात्र अनुत्तीर्ण रहे हैं केवल उसी भाग की परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। यदि कोई छात्र केवल प्रायोगिक परीक्षा के अनुत्तीर्ण है तो उसे सैद्धांतिक परीक्षा में शामिल होने की आवश्यकता नहीं है। इसी प्रकार यदि कोई छात्र सैद्धांतिक परीक्षा में अनुत्तीर्ण है तो उसे प्रायोगिक परीक्षा में शामिल होने की आवश्यकता नहीं है।


बेस्ट 5 के तहत एक विषय में अनुत्तीर्ण छात्र


माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा इस वर्ष हाईस्कूल परीक्षा में बेस्ट फाइव योजना के तहत परीक्षा परिणाम घोषित किया गया था, जिसमें यदि छात्र एक विषय में अनुत्तीर्ण होता है तो उसका परीक्षा परिणाम उत्तीर्ण घोषित किया गया है। ऐसी स्थिति में यदि छात्र अनुत्तीर्ण विषय की परीक्षा देना चाहे तो उसी सत्र की पूरक परीक्षा में शामिल हो सकेगा। ऐसे छात्र परीक्षा में शामिल होने के लिये 4 अगस्त से 20 अगस्त तक आवेदन कर सकेंगे।




Bkk News


Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets - http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar


Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह