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अभिव्यक्ति - लघुकथा : दोहरा मापदण्ड ✍️ नीरज त्यागी

       


हर साल की तरह इस साल भी जैसे ही नए साल की पढ़ाई शुरू हुई। प्रिंसिपल मैडम साधना जी ने प्रार्थना स्थल पर खड़े होकर प्रार्थना के बाद अपनी स्पीच देना शुरू किया। उनकी स्पीच सभी बच्चों के लिए और स्कूल में पढ़ाने वाली सभी अध्यापकों के लिए थी।उन्होंने अपने सभी अध्यापकों और स्कूल में आए नए और पढ़ने वाले पुराने विद्यार्थियों को समझाते हुए अपनी बातों को उनके सामने रखना शुरू किया।


           साधना जी ने बड़े ही प्यार से बच्चों को समझाया कि नए साल में सभी अपने किताबों को ध्यान से पढ़े और अपने भविष्य के लिए बडी ही मेहनत से पढ़ाई करें। उन्होंने अपने अध्यापकों से अनुरोध किया कि बच्चों को इस तरीके से पढ़ाया जाए कि उन्हें किसी भी प्रकार के ट्यूशन की जरूरत ना पड़े। उनकी पढ़ाई की सारी परेशानी कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही दूर की जाएं और जिससे की बच्चों के माता-पिता द्वारा ट्यूशन फीस का अलग से खर्चे ना हो।


          साधना जी ने अपने टीचरों को समझाया कि उन्हें इतनी लगन से पढ़ाये कि जैसे अपने बच्चों को पढ़ाते है। उनकी शिक्षा से बच्चे आगे बढ़े और उन्हें किसी भी ट्यूशन की जरूरत ना पड़े। भाषण के बाद और स्कूल समाप्त होने के बाद साधना जी घर पहुंची। घर पहुंचने के बाद उन्होंने शाम को उनके पास जो बच्चे ट्यूशन पढ़ने आते थे। उनको पढ़ाना शुरू किया बच्चों को पढ़ाते-पढ़ाते उन्हें समझा रही थी कि देखो बच्चो स्कूल में आजकल कहां इतनी बढ़िया पढ़ाई होती है। ट्यूशन तो बहुत ही जरूरी हो गया है। बिना ट्यूशन के अब केवल स्कूल के समय मे पढ़ाई पूरा करना बड़ा मुश्किल है।


          क्लास में तो केवल औपचारिकता ही पूरी हो पाती है। राधा जो नवीं कक्षा की विद्यार्थी है। सुबह ही उसने स्कूल में साधना मैडम का भाषण के दौरान एक दूसरा चेहरा देखा था और अब ट्यूशन के दौरान उनका कोई दूसरा ही चेहरा दिखाई दे रहा था। अपने भोलेपन में राधा ने साधना जी से पूछ लिया, मैडम आप अपने चेहरे पर दो-दो चेहरे कैसे लगा लेते हो। स्कूल में कुछ कहते हो और घर में कुछ ओर कहते हो। साधना मैडम ने राधा को डांट कर एक कोने पर बैठा दिया। शायद अपनी बेशर्मी को छिपाने का उनके पास और कोई तरीका नही था।



नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश ).
मोबाइल 09582488698
65/5 लाल क्वार्टर राणा प्रताप स्कूल के सामने ग़ाज़ियाबाद उत्तर प्रदेश 201001


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