Skip to main content

सीबीएसई ने कोविड-19 के कारण मौजूदा परिस्थितियों के मुद्देनजर 1 जुलाई से 15 जुलाई, 2020 तक कक्षा X और XII की होने वाली परीक्षाएं रद्द कर दीं


दसवीं और बारहवीं दोनों कक्षा के लिए सीबीएसई की समिति द्वारा सुझाई गई आकलन योजना के अनुसार रद्द की गई परीक्षाओं का मूल्यांकन

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने छात्रों की सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के प्रति आभार जताया

मूल्यांकन योजना के आधार पर परिणाम 15 जुलाई, 2020 तक घोषित किए जाएंगे- श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’



दिनांक : 26 JUN 2020 4:37PM : दिल्ली 

सीबीएसई ने विभिन्न राज्य सरकारों से प्राप्त अनुरोधों और आज की तारीख में कोविड-19  के कारण मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दसवीं और बारहवीं कक्षा के लिए परीक्षाएं रद्द करने का फैसला किया है, जो 1 जुलाई से 15 जुलाई, 2020 तक आयोजित होने वाली थी। आज सर्वोच्च न्यायालय ने परिक्षा रद्द करने के सीबीएसई के प्रस्ताव और दसवीं तथा बारहवीं के छात्रों के अंतिम प्रदर्शन का आकलन करने की योजना पर सहमति जताई है। 


 


केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने पहली जुलाई से 15 जुलाई, 2020 तक बारहवीं कक्षा की सीबीएसई परीक्षा आयोजित नहीं करने और छात्रों की सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता देने के सीबीएसई के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दसवीं और बारहवीं दोनों कक्षाओं के परीक्षा परिणाम की घोषणा के लिए सीबीएसई की सक्षम समिति द्वारा सुझाई गए मूल्यांकन योजना के आधार पर रद्द की गई परीक्षा में छात्रों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा।


     श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि माहौल में सुधार होते ही सीबीएसई कक्षा बारहवीं के छात्रों के लिए उन विषयों में एक वैकल्पिक परीक्षा आयोजित करेगा, जिनके लिए परीक्षा पहली जुलाई से 15 जुलाई, 2020 तक आयोजित की जानी थी। उन्होंने बताया कि जिन उम्मीदवारों के परिणाम मूल्यांकन योजना के आधार पर घोषित किए जाएंगे उन्हें, यदि वे चाहें तो, अपने प्रदर्शन में सुधार करने के लिए इन वैकल्पिक परीक्षाओं में उपस्थित होने की अनुमति दी जाएगी। श्री निशंक ने कहा कि दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए आगे कोई परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी और मूल्यांकन योजना के आधार पर सीबीएसई द्वारा घोषित परिणाम को अंतिम माना जाएगा।


     केंद्रीय मंत्री श्री निशंक ने कहा कि मूल्यांकन योजना के आधार पर नतीजे 15 जुलाई, 2020 तक घोषित किए जाएंगे, ताकि छात्र उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकें। उन्होंने कहा कि हमने इस योजना को सर्वोच्च न्यायालय के सामने प्रस्तावित किया क्योंकि छात्रों, उनके माता-पिता और शिक्षकों का स्वास्थ्य हमारी प्रमुख चिंता है।


     कृपया कक्षा X और XII की परीक्षाओं से संबंधित सीबीएसई अधिसूचना के लिए यहां क्लिक करें।





Bkk News


Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets - http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar


Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक