Skip to main content

रंग नेत्रहीनता से हल्के या मध्यम स्तर पर प्रभावित लोगों को भी अब ड्राइविंग लाइसेंस देने के योग्य माना जाएगा

 


दिनांक : 26 JUN 2020 3:16PM  Delhi


सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय नेरंग नेत्रहीनता से हल्के या मध्यम स्तर पर प्रभावित लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस देने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के फॉर्म 1 तथा फॉर्म 1ए में संशोधन के लिए एक अधिसूचना जारी की है। दिनांक 24 जून 2020 का जीएसआर 401 (ई) मंत्रालय द्वारा प्रकाशित एक सामाजिक तथा सुगमकारी विनियमन है।


मंत्रालय दिव्यांगजनों को परिवहन संबंधित सेवाओं, विशेष रूप से, ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने से संबंधित सेवाओं को प्राप्त करने में सक्षम बनाने के लिए कई प्रकार के कदम उठाता रहा है। दिव्यांगजनों को ड्राइविंग लाइसेंस की प्राप्ति सुगम बनाने के संबंध में परामर्शी जारी की जा चुकी है तथा इसके अतिरिक्त मोनोकलर विजन वाले व्यक्तियों के लिए पहले भी एक परामर्शी जारी की जा चुकी है।



मंत्रालय को अभ्यावेदन प्राप्त हुआ कि रंग नेत्रहीन नागरिक ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि शारीरिक फिटनेस ( फॉर्म 1) या चिकित्सा प्रमाणपत्र  ( फॉर्म 1ए) में इस बारे में घोषणा करने की आवश्यकता उनके लिए इसे कठिन बना देती है।


इस मुद्वे को चिकित्सा विशेषज्ञ के समक्ष उठाया गया तथा उनसे सलाह मांगी गई। जो अनुशंसाएं प्राप्त हुईं, उनके अनुसार रंग नेत्रहीनता से हल्के या मध्यम स्तर पर प्रभावित लोगों को ड्राइव करने की अनुमति दी जानी चाहिए और केवल बहुत अधिक रंग नेत्रहीनता वाले व्यक्तियों को ही प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। दुनिया के दूसरे देशों में भी इसे अनुमति दी गई है। तदनुरुप टिप्पणियों एवं सुझावों को आमंत्रित करने के लिए एक प्रारूप अधिसूचना जारी की गई।


Bkk News


Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets - http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar


Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक