Skip to main content

महाविद्यालयों में 29 जून से 31 जुलाई के मध्य होंगी परीक्षाएँ

स्नातक अंतिम, स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम अगस्त में होंगे घोषित 


 


भोपाल : गुरूवार, जून 11, 2020, 20:29 IST



प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के क्षेत्राधिकार में आने वाले महाविद्यालयों में 29 जून से 31 जुलाई 2020 के मध्य स्नातक अंतिम तथा स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएँ आयोजित की जाएंगी। इन परीक्षाओं के परिणाम अगस्त माह में ही घोषित कर दिए जाएँगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कोविड-19 के दृष्टिगत विश्वविद्यालयीन परीक्षाओं के सफलतापूर्वक संचालन के लिए सभी कुलसचिव, प्राचार्य, परीक्षा केंद्र अधीक्षक और परीक्षार्थियों के लिए दिशा-निर्देश किये गए हैं।



कुलसचिव के लिए र्निदेश


विश्वविद्यालय को कोविड-19 के संदर्भ में मानव संसाधन विकास मंत्रालय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा समय-समय पर जारी निर्देश का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा। यदि कोई परीक्षार्थी परीक्षा आरंभ के समय विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार वाले स्थलों पर निवासरत न होने के कारण जून-जुलाई 2020 से आयोजित होने वाली परीक्षा से वंचित होता है, तो ऐसे परीक्षार्थी के लिए पृथक से परीक्षा का आयोजन विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा। परीक्षा संचालन के दौरान किसी परीक्षा केंद्र के आकस्मिक रूप से हॉटस्पॉट की श्रेणी में चयनित होने पर वैकल्पिक परीक्षा केंद्र और परीक्षा आयोजन की व्यवस्था की संपूर्ण तैयारी पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए हैं। ऐसे परीक्षार्थी जो लॉकडाउन की अवधि में अपने परीक्षा केंद्रों से पृथक स्थानों पर हैं और उन्होंने अपनी जानकारी उच्च शिक्षा विभाग के पोर्टल के माध्यम से अद्यतन की है, उनकी परीक्षाएँ संबंधित विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में आने वाले निकट के परीक्षा केंद्र पर आयोजित किया जाना सुनिश्चित किया जाएगा।



प्राचार्य/केंद्र अधीक्षकों के लिए निर्देश


प्रदेश के सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षाएँ सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होंगी। संबंधित विश्वविद्यालय की ओर से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित शासकीय महाविद्यालय से पर्यवेक्षक को नियुक्त किया जाएगा। पर्यवेक्षक को संबंधित शासकीय महाविद्यालय द्वारा पहचान-पत्र उपलब्ध कराया जाएगा। यदि किसी पर्यवेक्षक के पास पहचान-पत्र नहीं है तो परीक्षा अधीक्षक संबंधित शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य से जानकारी लेकर उनके पहचान-पत्र बनाने के लिए अधिकृत होंगे। परीक्षा केंद्रों/उपपरीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षक की उपस्थिति और सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में ही प्रश्न-पत्र खोलना अनिवार्य होगा। जिन परीक्षा केंद्रों पर शारीरिक दूरी के संदर्भ में पर्यवेक्षक की नियुक्ति की गई है, उन केंद्रों/उप केंद्रों पर परीक्षा समाप्ति के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के सील लिफाफे के ऊपर पर्यवेक्षक के समय के साथ हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे।


 


संस्थाओं को अपने परीक्षा अधीक्षक का नाम, मोबाइल नंबर, लैंडलाइन नंबर, ई-मेल आईडी की जानकारी संबंधित विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक को ईमेल कर 20 जून तक अनिवार्य रूप से प्रेषित करना होगा। परीक्षा कार्य में लगे सभी अधिकारी-कर्मचारियों को पहचान पत्र जारी किया जाना आवश्यक होगा।


 


परीक्षा कक्ष में मोबाइल आदि ले जाना प्रतिबंधित होगा। केंद्रों के परिसर में केवल परीक्षा में कार्यरत शिक्षकों, स्टाफ को ही प्रवेश की पात्रता होगी। महाविद्यालय के प्राचार्य को वरिष्ठ परीक्षा अधीक्षक नियुक्त किया गया है। संस्था प्रमुख को भी परीक्षा अवधि में संस्था में ही उपस्थित रहना अनिवार्य होगा।



कोविड संक्रमण से बचाव कि व्यवस्था


संस्था द्वारा परीक्षा केंद्रों पर संपूर्ण कक्ष प्रसाधन कॉरिडोर तथा सीढ़ियां आदि को परीक्षा प्रारंभ होने के पूर्व तथा परीक्षा अवधि समाप्त होने के बाद प्रतिदिन सैनिटाइज किया जाना आवश्यक होगा। प्रत्येक संस्था में कम से कम 5 थर्मल स्क्रीनिंग उपकरण उपलब्ध होना अनिवार्य होगा। महाविद्यालयों में सीटिंग प्लान को प्रदर्शित करना होगा। परीक्षा कक्ष में जिस सीट पर भी किसी परीक्षार्थी को नहीं बैठना है, उस सीट पर क्रॉस का चिन्ह लगाया जाए। सीटों के साइड में चलने वाली जगह में भी सोशल डिस्टेंसिंग के हिसाब से गोला बनाया जाए। परीक्षा केंद्रों पर उपस्थित सभी पर्यवेक्षकों कर्मचारियों स्टाफ और परीक्षार्थियों को मास्क लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही सैनिटाइजर की छोटी बोतल भी साथ रखना होगा। यदि किसी कारणवश परीक्षार्थी के पास मास्क नहीं हो तो संस्था द्वारा इसकी व्यवस्था की जाएगी। छात्रों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश के समय अपने साथ सैनिटाइजर दवाई (यदि परीक्षार्थी पूर्व से उपयोग कर रहा हो)तथा पानी की बोतल ले जाने की अनुमति होगी। परीक्षा केंद्रों में प्रत्येक कक्ष में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अधिकतम 20 परीक्षार्थियों के अनुपात में एक ही पर्यवेक्षक कक्ष में रहेगा। परीक्षार्थियों के मध्य कम से कम एक मीटर की दूरी रखना तथा महाविद्यालय द्वारा सूचना पटल पर माडल सीटिंग प्लान उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य होगा।


 


परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र पर परीक्षा शुरू होने के एक घंटे पहले उपस्थित होना अनिवार्य होगा। केंद्र में जांच के दौरान थर्मल स्क्रीनिंग परीक्षण में किसी प्रकार की असामान्यता पाए जाने पर या अन्य किसी शारीरिक परेशानी होने पर परीक्षार्थी की पृथक बैठक व्यवस्था की जाएगी। ऐसे परीक्षार्थी के लिए अनिवार्य होगा की वे आगामी परीक्षा दिवस के पूर्व अधिकृत चिकित्सक से स्वास्थ्य परीक्षण करा कर प्रमाण-पत्र परीक्षा केंद्र मे प्रस्तुत करें।



कन्टेनमेंट जोन मे यदि कोई परीक्षा केंद्र निर्धारित है अथवा किसी परीक्षा केंद्र महाविद्यालय को क्वारेंटाइन सेन्टर बनाया गया हो तो ऐसे क्षेत्र के परीक्षा केंद्र विश्वविद्यालय को तत्काल अवगत कराएं और विश्वविद्यालय से प्राप्त निर्देशानुसार अन्य परीक्षा केंद्र की व्यवस्था की कार्रवाई करें। सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा पूर्व परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देश का मॉक टेस्ट अनिवार्य रूप से किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन ने सभी संभाग आयुक्तों एवं कलेक्टरों को इस संबंध में पत्र जारी कर सफलतापूर्वक परीक्षाएं संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं।



Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर हुआ है। राकेश मुख्यतः आधुन

नरेश जिनिंग की जमीन पर मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए विधायक श्री पारस चन्द्र जैन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

 ■ नरेश जिनिंग की जमीन पर मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए विधायक श्री पारस चन्द्र जैन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र ● विधायक ने उज्जैन जिला कलेक्टर को आवश्यक कार्यवाही करने के लिए लिखा पत्र   उज्जैन । भारत स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश के राज्य मीडिया प्रभारी राधेश्याम चौऋषिया ने जानकारी देते हुए बताया कि, आज विधायक श्री पारस चन्द्र जैन जी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी श्री शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र लिखकर उनके द्वारा उज्जैन में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा किए जाने पर उज्जैन की जनता की ओर से बहुत बहुत धन्यवाद देकर आभार प्रकट किया गया । मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में विधायक श्री जैन ने लिखा कि, उज्जैन शहर के मध्य आगर रोड़ स्थित नरेश जिनिंग की जमीन को उज्जैन जिला प्रशासन द्वारा हाल ही में  अतिक्रमण से मुक्त करवाया गया है । इस जमीन का उपयोग मेडिकल कॉलेज हेतु किया जा सकता है क्योंकि यह शहर के मध्य स्थित है तथा इसी जमीन के पास अनेक छोटे-बड़े अस्पताल आते हैं । इसी प्रकार विनोद मिल की जमीन भी उक्त मेडिकल कॉलेज हेतु उपयोग की जा सकती हैं क्योंकि इसी जमीन के आसपास उज्जैन का शासकीय जिला चिकित्सालय, प्रसूतिग