Skip to main content

आप स्वयं का और अपने परिवार का ख्याल रखे : राधेश्याम चौऋषिया .... "शिकारी आएगा... दाना डालेगा... जाल बिछाएगा... हम नही फसेंगे....": शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री


आदरणीय मित्रों
नमस्कार,


#22मार्च2020 #जनता_कर्फ्यू


#25मार्च2020 #देश में #लॉकडाउन


के बाद 01 जून 2020 से देश मे #लॉकडाउन05 - #अनलॉक01 में रियायतें देने का क्रम शुरू हो चुका है ।
इस अवधि में आपके द्वारा धैर्यपूर्वक, मास्क लगाकर, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए, शासन-प्रशासन के द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का भी पालन, एक अच्छे भारतीय नागरिक की तरह आपके द्वारा किया गया, उसके लिए आप सभी को धन्यवाद के साथ सादर प्रणाम भी करता हूँ ।


परंतु जिस प्रकार आप #तालाबंदी खुलने का इंतज़ार कर रहे थे उसी प्रकार कोरोना भी इंतेज़ार कर रहा है, उसे भी आपको संक्रमित करना है। परंतु आप सजग और सतर्क रहें तो, आप संक्रमित होने से बच सकते हैं । कोरोना की चैन को तोड़ सकते हैं, कोरोना की चैन को खत्म कर सकते हैं, ऐसा आप सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कर सकते हैं, ऐसा आप मास्क लगाकर कर सकते हैं, ऐसा आप समय रहते... अगर संक्रमण के लक्षण दिखाई देते है तो तत्काल ही डॉक्टर को दिखाकर, उसका इलाज करवाकर भी कर सकते हैं... ऐसा आप शासन-प्रशासन के द्वारा बताए गए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए भी कर सकते हैं । अगर आप यह सब कुछ करते हैं तो यह भी आपकी देश सेवा ही मानी जाएगी ।



🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️
आपको मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का 31 मई 2020 की रात 8 बजे मध्यप्रदेश वासियों को संबोधित संदेश जरूर याद होगा, जिसमे आपने कहा था कि,


👇
"शिकारी आएगा...
दाना डालेगा...
जाल बिछाएगा...
हम नही फसेंगे....""
☝️


इस संदेश के भावार्थ को हमे समझना जरूरी है तभी हम कोरोना की चैन को खत्म कर पाएंगे ।
🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️🕵️


मुझे अपना हर आदरणीय मित्र, रिश्तेदार स्वस्थ और सुरक्षित चाहिए, आप मेरी अमूल्य धरोहर हैं।


आप अपने आपको और परिवार को स्वस्थ रखते है तो मुझ पर आपका बड़ा ऋण रहेगा।।


मैं, सदैव परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि, परम पिता परमेश्वर आपको और आपके परिवार को सदैव ही स्वस्थ बनाए रखें। समृद्धि तो आप और हम अर्थात हमारी एकता से पुनः अर्जित कर ही लेंगे..!!


🙏कृपया आप स्वयं का और अपने परिवार का ख़्याल रखे🙏


✍ राधेश्याम चौऋषिया


■ E-mail : radhebkk@gmail.com


■ सम्पादक : बेख़बरों की खबर


■ राज्य मीडिया प्रभारी : भारत स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश


■ दैनिक निर्णायक : मध्यप्रदेश ब्यूरों प्रमुख


■ राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार, जनसम्पर्क विभाग, मध्यप्रदेश शासन


https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1052422885166797&id=395226780886414


● ट्विटर हैंडल : @bkknewsindia


● https://bkknews.page/


● www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-Ki-Khabar


● Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


● https://www.facebook.com/radheshyam.chourasiya


https://www.facebook.com/radheshyam.chourasiyaii


https://www.facebook.com/BekhabaronKiKhabar/


● इन्स्टाग्राम - https://www.instagram.com/radheshyam.chourasiya/


● ट्विटर हैंडल - https://twitter.com/bkknewsindia


Bkk News


Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets - http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar


Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक