Skip to main content

कलेक्टर ने प्रवासी श्रमिकों के सर्वे और सत्यापन के सम्बन्ध में अधिकारियों को निर्देश जारी किये


 उज्जैन 27 मई। कलेक्टर श्री आशीष सिंह ने आयुक्त नगर पालिक निगम, सीईओ जिला पंचायत, परियोजना अधिकारी जिला शहरी विकास अभिकरण, समस्त सीईओ जनपद और समस्त मुख्य नगर पालिका अधिकारी को प्रवासी श्रमिकों के सर्वे, सत्यापन और पंजीयन के सम्बन्ध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये हैं। उल्लेखनीय है कि कोविड महामारी में मध्य प्रदेश के मूल निवासी जो अन्य राज्यों में श्रमिक के रूप में काम कर रहे थे, वे एक मार्च 2020 या उसके बाद बड़ी संख्या में प्रदेश में वापस आये हैं। ऐसे श्रमिकों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदाय करने की दृष्टि से राज्य सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है। श्रमिकों का सर्वे, सत्यापन और पंजीयन का कार्य अभियान की तरह 27 मई से लेकर 3 जून 2020 के मध्य किया जायेगा।


            सर्वे का कार्य एनआईसी द्वारा विकसित मोबाइल एप के माध्यम से किया जायेगा। मोबाइल एप संबल पोर्टल (sambal.mp.gov.in) में एवं गूगल प्लेस्टोर में उपलब्ध रहेगा। संबल पोर्टल में इस कार्य के लिये प्रवासी श्रमिक प्रबंधन प्रणाली को निर्मित किया गया है, जिसका उपयोग भी किया जा सकता है।


            सर्वे के दौरान ऐसे प्रवासी श्रमिक जो मध्य प्रदेश के मूल निवासी नहीं हैं, मध्य प्रदेश के मूल निवासी श्रमिक जो एक मार्च 2020 से पूर्व नियोजित राज्य से मध्य प्रदेश में प्रवासी श्रमिक के रूप में लौट आये हैं तथा मध्य प्रदेश के मूल निवासी श्रमिक जो राज्य के बाहर प्रवास पर नहीं गये हैं, उनका सर्वे, सत्यापन और पंजीयन नहीं किया जायेगा।


            जिन प्रवासी श्रमिकों का समग्र आईडी नहीं है तथा जो मध्य प्रदेश के मूल निवासी हैं, ऐसे प्रवासी श्रमिकों का समग्र आईडी नियत प्रक्रिया अनुसार समग्र पोर्टल पर जनरेट करने के निर्देश कलेक्टर द्वारा दिये गये हैं। इसके उपरान्त ही ऐसे प्रवासी श्रमिकों के सर्वे, सत्यापन और पंजीयन का कार्य पोर्टल पर समग्र आईडी का उल्लेख करते हुए सुनिश्चित किये जाने के लिये कहा गया है। गौरतलब है कि पोर्टल पर समग्र आईडी अंकित किया जाना बन्धनकारी है।


            सर्वे, सत्यापन तथा पंजीयन उन्हीं प्रवासी श्रमिकों का किया जायेगा, जो मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना अथवा भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल में पंजीयन के लिये पात्रता रखते हैं। इस अभियान में पात्र प्रवासी श्रमिकों से संलग्न सर्वे फार्म में जानकारी प्राप्त कर उसे पोर्टल के माध्यम से 3 जून 2020 के पूर्व अपलोड की जाये तथा पूर्ण रूप से भरे गये सर्वे फार्म को रिकार्ड में सुरक्षित रखा जाये।


            ग्राम पंचायतों के सचिव तथा नगरीय क्षेत्रों में वार्ड प्रभारी अधूरे सर्वे फार्म को पूरा भरे जाने में आवेदक की मदद सुनिश्चित करेंगे। सर्वे, सत्यापन तथा पंजीयन के लिये आधार कार्ड का नम्बर भरा जाना बन्धनकारी है तथा आधार अधिप्रमाणन आवश्यक होगा।


            ग्रामीण क्षेत्र के लिये मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं नगरीय क्षेत्र के लिये मुख्य नगर पालिका अधिकारी पदाभिहित अधिकारी होंगे। नगर निगमों में निगम आयुक्त द्वारा अधिकृत अधिकारी पदाभिहित अधिकारी होंगे। पदाभिहित अधिकारी द्वारा पोर्टल पर स्वीकृति प्रदान करने पर ही सर्वे किये हुए प्रवासी श्रमिक का पंजीयन पोर्टल पर दर्ज हो सकेगा।


            संबल पोर्टल में प्रवासी मजदूर के पंजीयन के बाद उनको योजनाओं के लाभ दिये जाने की कार्यवाही की जायेगी। इसके अतिरिक्त यह जानकारी ग्रामीण विकास विभाग को उपलब्ध कराई जायेगी, जिससे इच्छुक श्रमिकों को मनरेगा में कार्य दिया जा सके। खाद्य विभाग द्वारा पात्र श्रमिकों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से नि:शुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जायेगा।


            कलेक्टर ने निर्देश दिये हैं कि सर्वे कार्य के समय कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिये स्वास्थ्य विभाग के समस्त प्रोटोकाल तथा सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क का उपयोग आदि का आवश्यक रूप से पालन किया जाये। प्रक्रिया सम्बन्धित अन्य समस्त जानकारी और समय-समय पर जारी दिशा-निर्देश मार्गदर्शन संबल पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे।


Bkk News


Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets - http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar


Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक