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जल की गुणवत्ता पर नियंत्रण से स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर भारत का निर्माण सम्भव  –  डॉ शुक्ला


विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा आत्मनिर्भर भारत - आगे की राह पर तीन दिवसीय व्याख्यानमाला में हुए महत्त्वपूर्ण व्याख्यान


उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आइक्यूएसी) द्वारा आयोजित त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय वेब व्याख्यान शृंखला के समापन दिवस पर दो विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान सम्पन्न हुए। यह व्याख्यान शृंखला आत्मनिर्भर भारत - आगे की राह पर केंद्रित थी, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने महत्त्वपूर्ण व्याख्यान दिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति प्रोफेसर बालकृष्ण शर्मा ने की।



त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय वेब व्याख्यान शृंखला के तीसरे एवं अंतिम दिन दो विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान सम्पन्न हुए। डा. जय प्रकाश शुक्ल, प्रमुख, जल संसाधन एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग, सी.एस.आई.आर.- ए.एम.पी.आर.आई. (भारत सरकार) भोपाल ने “आत्मनिर्भर भारत हेतु जल प्रबंधन एवं जल सुरक्षा’ विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारा संपूर्ण जीवन पानी पर निर्भर है। दुनिया की अर्थव्यवस्था इसी पर टिकी हुई है। उन्होंने देश में जल की माँग, जल की उपलब्धता एवं प्रति व्यक्ति जल की खपत को विस्तार से बताते हुए जल अंकेक्षण की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बृहद पैमाने पर जल के संरक्षण की आवश्यकता को प्रतिपादित करते हुये “खेत का पानी खेत में’ और ‘घर का पानी घर में’ ही संरक्षित कर जल आत्मनिर्भरता का लक्ष्य प्राप्त करने का संदेश दिया। वर्षा के जल को संरक्षित कर हम भूमिगत जल बैंक में वृद्धि कर सकते हैं एवं जल की गुणवत्ता पर नियंत्रण कर हम स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकते हैं। 



दूसरा व्याख्यान इंजीनियर शैलेन्द्र शुक्ल, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज, रायपुर द्वारा “आत्मनिर्भर भारत के लिए ऊर्जा प्रबंधन” विषय पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने भारत में ऊर्जा उत्पादन की उपलब्धता एवं भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हम विद्युत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो गए हैं। साथ ही काफी तेजी से गैर-पारंपरिक स्रोतों से ऊर्जा उत्पादन की ओर अग्रसर हैं। विशेष रूप से उन्होने सौर ऊर्जा पर ज़ोर देते हुये कहा कि हम सबको अपने-अपने छतों पर सोलर पैनल लगवा कर स्थानीय स्तर पर ऊर्जा-आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होना चाहिए। आँकड़ों के माध्यम से उन्होंने बताया कि नाभिकीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा, समुद्री-लहर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा का समुचित उपयोग कर हम पूर्णतया हरित-ऊर्जा आत्मनिर्भर हो सकते हैं। 



कार्यक्रम के अध्यक्ष विक्रम विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. बालकृष्ण शर्मा ने कहा कि शैक्षिक संस्थानों के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तैयार करना होगा। इस आयोजन से प्राप्त निष्कर्ष आने समय में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। 


आई. क्यू. ए. सी. के निदेशक प्रो. प्रमोद के. वर्मा ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विक्रम  विश्वविद्यालय ने पहला कदम उठाया है। वर्तमान में फोकल फॉर लोकल, वोकल फॉर लोकल एवं लोकल टू ग्लोबल के सूत्र को आत्मसात करते हुए स्थानीय संसाधनों को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने आगामी दिनों में आरंभ की जाने वाली योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया।  



प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, कुलानुशासक, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि, गूगल मीट प्लेटफॉर्म  पर  संपन्न  हुए इस महत्वपूर्ण व्याख्यान शृंखला में पहले दो दिन डॉक्टर मनोज पटेरिया, प्रोफेसर पवन कुमार सिंह, डॉक्टर संदीप गोयल और डॉक्टर एन पी राजीव  ने आत्मनिर्भर भारत की राह में स्मार्ट कम्युनिकेशन के महत्व, विचार की प्रक्रिया, डिजिटल जीवन शैली एवं नवाचार के लिए वातावरण पर व्याख्यान दिए। कार्यक्रम देश के विभिन्न संस्थानों से जुड़े सैकड़ों शिक्षाविदों, विक्रम विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के महाविद्यालयों, संस्थानों और अध्ययनशालाओं  के शिक्षकों एवं अध्येताओं ने सहभागिता की।


कार्यक्रम का सफल संचालन डा. स्वाति दुबे, प्रमुख, भौतिकी अध्यनशाला ने किया। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं एवं श्रोताओं का आभार प्रदर्शन कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने किया। 






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