Skip to main content

विद्युत उपभोक्ताओं को रजिस्टर्ड व्हाट्सअप पर मिलेगा बिल

चैटबॉट प्रणाली से होगा अन्य समस्याओं का समाधान 


भोपाल : बुधवार, अप्रैल 8, 2020, 18:30 IST

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं के लिए उनके रजिस्टर्ड व्हाट्सअप नंबर पर बिजली बिल प्रदान करने की सुविधा शुरू कर दी गयी है। कोविड-19 संक्रमण के मद्देनज़र उपभोक्ताओं को ज़्यादा से ज़्यादा ऑनलाइन तकनीक द्वारा बिल प्रदान किया जाने का निर्णय लिया गया है| उपभोक्ताओं को उनके रजिस्टर्ड Whatsapp नंबर पर हर माह बिजली का बिल उपलब्ध कराया जायेगा, इससे उपभोक्ताओं को बिल मिलने में विलम्ब की समस्या दूर होगी।


कंपनी द्वारा शिकायत पंजीकरण, शिकायत की स्थिति जानने, बिल देखने, बिल भुगतान की पावती एवं अन्य आवेदनों की स्थिति जानने के लिये मानवरहित चैटबॉट प्रणाली लागू की गयी है| इस प्रणाली का बिजली उपभोक्ता अपने व्हाट्सअप पर उपयोग कर सकते हैं| चैटबॉट को उपयोग करने के लिये उपभोक्ता को कंपनी के अधिकृत नंबर 07552551222 को अपने मोबाइल में सेव करना होगा| उपभोक्ता अपने व्हाट्सअप पर इस नंबर पर चैट से इन सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं| उपभोक्ता को चैट प्रारम्भ करने के लिये कोई भी मैसेज टाइप करना होगा, जिसके बाद चैटबॉट प्रारम्भ हो जायेगा|


बिलों का करें ऑनलाइन भुगतान


मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कोराना वायरस के फैलाव को रोकने के लिये बिजली बिल भुगतान केंद्रों को लाक डाउन अवधि तक बंद कर दिया गया है। उपभोक्ताओं से कहा गया है कि समय पर बिजली बिलों का भुगतान UPAY App, पेटीएम ,एमपी ऑनलाइन, फोनपे, गूगलपे ,अमेजॉनपे ,एच डी एफ सी पे App इत्यादि ऑनलाइन तरीके पर करें।


Bkk News


Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets - http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar


Comments

मध्यप्रदेश समाचार

देश समाचार

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्

तृतीय पुण्य स्मरण... सादर प्रणाम ।

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1003309866744766&id=395226780886414 Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bkk News Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets -  http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साहित्य