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जिलाधिकारी श्री सविन बंसल ने बताया है कि वर्तमान में डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय हल्द्वानी को नोवल कोरोना वायरस हेतु एक स्पेशलिस्ट हास्पिटल के रूप में विकसित किया जा रहा है


हल्द्वानी - 11 अप्रैल (सूचना) - जिलाधिकारी श्री सविन बंसल ने बताया है कि वर्तमान में डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय हल्द्वानी को नोवल कोरोना वायरस हेतु एक स्पेशलिस्ट हास्पिटल के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिसके कारण सुशीला तिवारी चिकित्सालय हल्द्वानी में अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों का उपचार किया जाना सम्भव नही हो पायेगा। ऐसे में जनस्वास्थ्य की सुरक्षा हेतु अतिरिक्त चिकित्सालय की आवश्यकता के दृष्टिगत निजी चिकित्सालयों को आपदा प्रबन्धन एक्ट -2005 के तहत हल्द्वानी शहर के 6 निजी अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से अधिकृत कर लिया गया हैै। उन्होने बताया कि हल्द्वानी के बृजलाल हास्पिटल, कृष्णा हास्पिटल,नीलकण्ठ हास्पिटल, विवेकानन्द हास्पिटल, सांई हास्पिटल तथा सेन्ट्रल हास्पिटल को अधिकृत कर लिया गया है।


 



उन्होने जारी आदेश मे कहा है कि समस्त चिकित्सालयों मे चिकित्सक एवं सहवर्ती स्टाफ सुचारू रूप से सामान्य दिवसों में चिकित्सालय संचालन की भांति तैनात रहकर कार्य करेंगे। चिकित्सालय में परीक्षण,उपचार से सम्बन्धित समस्त उपकरण,लैब, एक्सरे, एमआरआई, वेन्टीलेटर व अन्य सुविधायें सुचारू रूप से संचालित रखेंगे। चिकित्सालय में रोस्टर के अनुसार दिन व रात्रि में चिकित्सकीय स्टाफ की तैनाती भी की जायेगी। उन्होने कहा कि चिकित्सालय प्रबन्धन यह सुनिश्चित करेगा कि चिकित्सालय मे उपचार हेतु राजकीय चिकित्सालय से रैफर होकर आने वाले मरीजों के उपचार तथा भर्ती की प्रक्रिया में कोई व्यवधान ना हो। सभी अधिकृत चिकित्सालयों का मेडिकल स्टोर भी सुचारू रूप से संचालित किये जायेंगे। अधिग्रहित चिकित्सालयों में उक्त कार्यवाही मे शिथिलता व लापरवाही बरतनेे पर सम्बन्धित प्रबंधक, चिकित्सक, चिकित्सकीय स्टाफ के विरूद्व डिजास्टर मेैनेजमैंट एक्ट-2005, एपिडैमिक डिजीज एक्ट-1897 की सु


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संगत धाराओं मे दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी। उपचार एवं उपचार प्रक्रिया में शिथिलता बरतने पर मेडिकल काउन्सिल एक्ट 1956 के प्राविधानों के अन्तर्गत चिकित्साधिकारी के विरूद्व विधिक कार्यवाही की जायेगी। उन्होेने कहा क्लिीनिकल स्टैब्लिसमैंट रजिस्टेªशन एण्ड रेगुलेशन एक्ट-2010 एवं उत्तराखण्ड क्लीनिकल स्टैब्लिसमैंट रजिस्टेªशन एवं रेगुलेशन रूल्स-2015 मे निहित  प्राविधानों के अन्तर्गत लापरवाही का प्रतिकूल संज्ञान लिया जा सकता है। आदेशों के अनुपालन मे शिथिलता बरतने में सम्बन्धित के विरूद्व आईपीसी की धारा 188 एवं अन्य सुसंगत धाराओं में दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।


 


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