Skip to main content

मानव संसाधन विकास मंत्री ने प्रबंधकों के लिए यूकेआईईआरआई-यूजीसी उच्च शिक्षा लीडरशिप विकास कार्यक्रम की शुरुआत की

मानव संसाधन विकास मंत्रालय


मानव संसाधन विकास मंत्री ने प्रबंधकों के लिए यूकेआईईआरआई-यूजीसी उच्च शिक्षा लीडरशिप विकास कार्यक्रम की शुरुआत की


केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने ‘प्रबंधकों के लिए उच्च शिक्षा लीडरशिप विकास कार्यक्रम’ की शुरुआत की। यह ब्रिटेन, भारत शिक्षा और अनुसंधान पहल (यूकेआईईआरआई) के तत्वाधान में यूजीसी और ब्रिटिश काउंसिल की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय विश्वविद्यालयों में मध्यम और वरिष्ठ स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों तक लीडरशिप विकास कार्यक्रम पहुंचाना है। कार्यक्रम की शुरुआत के दौरान मंत्रालय में सचिव श्री अमित खरे; यूजीसी के अध्यक्ष प्रोफेसर डी.पी. सिंह, ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया की ओबीई-निदेशक सुश्री बारबरा विकहैम और मंत्रालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथ ब्रिटिश काउंसिल के अन्य अधिकारी मौजूद थे।


इस अवसर पर श्री पोखरियाल ने कहा कि यह एक अनूठा कार्यक्रम है, जिसमें भारतीय विश्वविद्यालयों के मध्यम और उच्च स्तर के अधिकारियों की लीडरशिप क्षमता बढ़ाने के महत्वपूर्ण पहलुओं को रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम हमारे विश्वविद्यालयों में प्रदान की जा रही शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए हमारी सरकार की प्रतिबद्धता की तर्ज पर संस्थागत विकास की दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से वैश्विक नजरिया विकसित करने में मदद मिलेगी और इससे समावेशी तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ी उच्च शिक्षा प्रणालियों के लिए ज्ञान को बढ़ावा देगा, जो ब्रिटेन और भारत में आर्थिक और सामाजिक विकास को प्रोत्साहित करती है। मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम अधिकारियों के लिए एक प्रेरक के रूप में काम करेगा ताकि वे अपनी प्रदर्शन और क्षमताओं में सुधार ला सकें, जिससे संस्थागत रूप रेखा और भारत में विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा बढ़ाई जा सके।


कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ और मध्यम स्तर पर शैक्षणिक प्रशासकों को प्रशिक्षित करना है ताकि वे नवीन दृष्टिकोणों, क्षमता, साधनों और कौशल के साथ भारत के विश्वविद्यालयों में सर्वांगी परिवर्तन ला सकें। ‘प्रशासकों के लिए उच्च शिक्षा लीडरशिप विकास कार्यक्रम’ विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक काम-काज पर कार्य साधकता सुनिश्चित करेगा। इस कार्यक्रम में दो कार्यशालाएं शामिल हैं, जिन्हें ब्रिटेन के प्रशिक्षकों द्वारा कराया जाएगा, जो लगभग 300 शैक्षणिक अधिकारियों को रजिस्ट्रार और संयुक्त/उप/सहायक रजिस्ट्रार प्रशिक्षित करेंगी ताकि वे उच्च शिक्षा संस्थानों में बदलाव ला सकें। कार्यक्रम में निरंतरता बनाए रखने के लिए 300 भागीदारों में से भविष्य में 30 संभावित लीडरशिप विकास कार्यक्रम प्रशिक्षकों का चयन किया जाएगा और उन्हें अन्य लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण दिया जाएगा।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) वैश्विक दृष्टि से मान्यता प्राप्त संस्थागत विशेषज्ञों और ब्रिटेन की उत्कृष्ट लीडरशिप के साथ प्रशिक्षण सहयोगी के रूप में एडवांस एचई के सहयोग से इस कार्यक्रम को चलाएगा।


Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets - http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar


Comments

मध्यप्रदेश समाचार

देश समाचार

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्

तृतीय पुण्य स्मरण... सादर प्रणाम ।

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1003309866744766&id=395226780886414 Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bkk News Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets -  http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साहित्य