Skip to main content

खेल का अनुशासन हर क्षेत्र में लाने से बनेगा श्रेष्ठ भारत : श्री तोमर

■ विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह ताेमर ने पश्चिम क्षेत्रीय अंतर विश्वविद्यालयीन हॉकी टूर्नामेंट का शुभारंभ किया

🙏 राधेश्याम चौऋषिया, वरिष्ठ पत्रकार 🙏

भाेपाल, मंगलवार, 02 जनवरी, 2024 ।  मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को राजधानी के मेजर ध्यानचंद हॉकी स्टेडियम पर आयाेजित पश्चिम क्षेत्रीय अंतर विश्वविद्यालयीन हॉकी टूर्नामेंट का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अपने उद्बोधन में श्री तोमर ने कहा कि, खेल में अनुशासन का बहुत महत्व है, यही अनुशासन यदि हर क्षेत्र में हो तो हमारा भारत बहुत जल्दी श्रेष्ठ भारत बन सकता है।

श्री तोमर ने कहा कि, वैसे तो व्यक्ति के जीवन में शिक्षा का बड़ा महत्व है, लेकिन शिक्षा के साथ−साथ खेल का भी महत्व है। मुझे प्रसन्नता है कि, रवींद्र नाथ टैगाेर विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ ही खेल, संस्कृति, तकनीकी, काैशल विकास के क्षेत्र में भी बेहतर प्रदर्शन कर रही है। खेल सामान्य ताैर पर शारीरिक व्यायाम तक ही सीमित नहीं है, यह अनुशासन एवं जीवन जीने की कला के लिए भी जरूरी है। यदि किसी प्रतियोगिता में खिलाड़ी अनुशासन का प्रदर्शन न करें तो वह प्रतियोगिता पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकती है। खेल के मैदान में प्रतिस्पर्धा को सफल बनाने के लिए जब हम मैदान में हैं तो हमारी प्रमुख भूमिका अनुशासन की है। यही अनुशासन खिलाड़ी को सफलता दिलाता है और उसे गाैरव की अनुभूति भी कराता है।

श्री ताेमर ने कहा कि, भारत सरकार और प्रदेश की सरकार ने खेल को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। पिछले दिनों में खेल के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। बेहतर खेल सुविधाओं, सरकार की नीतियों एवं खिलाड़ियों के अभूतपूर्व प्रदर्शन के कारण आलंपिक से लेकर सभी मंचों पर भारत का गौरव बढ़ा है।

इस अवसर पर स्काेप ग्लोबस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सिद्धार्थ चतुर्वेदी, संचालक खेल एवं युवक कल्याण विभाग श्री रवि गुप्ता, पूर्व ओलंपियन एवं अर्जुन अवार्डी श्री अशोक ध्यानचंद, रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलपति श्री रजनीकांत,ओलंपियन एवं हॉकी के क्षेत्र में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित श्री विवेक सागर प्रसाद एवं अन्य गणमान्य नागरिक, देशभर से आई हॉकी टीमों के  खिलाड़ी, शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।

✍ राधेश्याम चौऋषिया 

Radheshyam Chourasiya

Radheshyam Chourasiya II

● सम्पादक, बेख़बरों की खबर
● राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार, जनसम्पर्क विभाग, मध्यप्रदेश शासन
● राज्य मीडिया प्रभारी, भारत स्काउट एवं गाइड मध्यप्रदेश
● मध्यप्रदेश ब्यूरों प्रमुख, दैनिक निर्णायक
● मध्यप्रदेश ब्यूरों प्रमुख, दैनिक मालव क्रान्ति

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

"बेख़बरों की खबर" फेसबुक पेज...👇

Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर

"बेख़बरों की खबर" न्यूज़ पोर्टल/वेबसाइट... 👇

https://www.bkknews.page

"बेख़बरों की खबर" ई-मैगजीन पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें...👇https://www.readwhere.com/publi.../6480/Bekhabaron-Ki-Khabar

🚩🚩🚩🚩 आभार, धन्यवाद, सादर प्रणाम। 🚩🚩🚩🚩

Comments

मध्यप्रदेश समाचार

देश समाचार

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्

तृतीय पुण्य स्मरण... सादर प्रणाम ।

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1003309866744766&id=395226780886414 Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bkk News Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets -  http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साहित्य