Skip to main content

कोरोना वारियर्स के लिए गाइड लाइन जारी . अत्यावश्यक सेवाओ में लगे व्यक्तियों से पालन करने की अपील 

ऑफिस से वापिस घर जाते वक़्त यह करे -



1) ऑफिस से निकलते ही घर पर फोन लगाकर सूचित कर दें।
2) घर में रहने वाला ही सदस्य आपके लिए घर का मुख्य द्वार खुला रखेगा ( ताकि आपको घर की घंटी या दरवाजे के हैंडल ना छूना पड़े) और घर के मुख्य द्वार पर ही ब्लीचिंग पाउडर या नहाने का वाशिंग पाउडर मिली हुई पानी से भरी हुई एक बाल्टी रख देगा।
3) अपने साथ रखी हुई चीजों को घर के बाहर ही एक बॉक्स में रख दें ( कार की चाबी , पेन, सैनिटाइजर, बॉटल और फोन वगैरह)।
4) अपने हाथों को  बाल्टी के पानी से धोएं और कुछ देर उसी पानी में खड़े रहे। इसी दौरान सैनिटाइजर और टिशू पेपर से जो चीजें आपने बॉक्स में रही थी उनको पोछ ले।
5) अपने हाथों को फिर से साबुन के पानी से धोएं।
6) अब बिना किसी चीज को छुए घर में प्रवेश करें।
7) बाथरूम का दरवाजा किसी के द्वारा खुला छुड़वा दे और  डिटर्जेंट मिला हुआ एक बाल्टी पानी  रखवा दें। अपने सारे कपड़े अंतर्वस्त्रों के साथ उतारे और डिटर्जेंट मिली हुई बाल्टी के पानी में भिगो दें।
8) इसके बाद शैंपू से सर धोए और साबुन लगाकर नहाए।
9) उच्च तापमान की सेटिंग लगाकर वॉशिंग मशीन में अपने कपड़ों को धोएं और उन कपड़ों को धूप में सुखाएं।



   इन  दिशा निर्देश का पालन करके सभी अधिकारी कर्मचारी,पुलिस नगर निगम और मीडिया साथी अपने आपको और अपने परिवार को कार्यालय में काम करने के दौरान और कार्यालय से  घर  जाने के दौरान  इस महामारी  से बचाए  रख सकते है।यह दिशा निर्देश सिर्फ कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के लिए ही नहीं बल्कि आवश्यक कार्यों से घर से बाहर जाने वाले व्यक्तियों के लिए भी लाभकारी है।


Bkk News


Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets - http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar


Comments

मध्यप्रदेश समाचार

देश समाचार

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्

तृतीय पुण्य स्मरण... सादर प्रणाम ।

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1003309866744766&id=395226780886414 Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bkk News Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets -  http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साहित्य