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लोक भाषाएँ हैं संस्कृति की संवाहिका - श्री सत्तन

लोकभाषा लिटरेचर फेस्टिवल के पहले दिन हुई लोकभाषाओं के विविध पक्षों पर परिचर्चा, साक्षात्कार और सम्मान 

वरिष्ठ मालवी कवि कैलाश तरल को झलक निगम लोक संस्कृति सम्मान अर्पित 

उज्‍जैन। झलक निगम सांस्कृतिक न्यास द्वारा सांस्कृतिक नगरी उज्जैन में प्रथम लोकभाषा लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध मालवी कवि श्री झलक निगम की पुण्य स्मृति में आयोजित इस दो दिवसीय उत्सव में प्रथम दिवस पर दो सत्र सम्पन्न हुए। प्रथम सत्र परिचर्चा सह कार्यशाला के रूप में हुआ, जिसका केंद्रीय विषय लोक भाषाएं : गति और प्रगति था  अतिथि वक्ता के रूप में श्री मणिमोहन चवरे, पुणे, प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, मंजू कोरेमोरे, नागपुर, श्री कैलाश तरल थे। संयोजन श्रीमती जेड श्वेतिमा निगम ने किया। 

द्वितीय सत्र में लोकभाषा के विविध आयामों को लेकर वरिष्ठ कवि और भाषा विशेषज्ञों के साक्षात्कार लिए गए। इस सत्र में वरिष्ठ कवि श्री सत्यनारायण सत्तन, इंदौर, श्री गिरेंद्रसिंह भदौरिया प्राण, इटावा, श्री नन्दकिशोर चौहान, इंदौर नीलू सक्सेना, देवास सम्मिलित हुए। समाहार प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने किया।

वरिष्ठ कवि श्री सत्यनारायण सत्तन ने कहा कि इस देश की लोक भाषाएं सही अर्थों में संस्कृति की लंबाई का है अत्यंत प्राचीन काल से बोलियों के माध्यम से सिद्ध कवियों के द्वारा विविध प्रकार के भाव अभिव्यक्त किए गए हैं। गोस्वामी तुलसीदास जैसा महान लोक कवि आज विश्व कवि के रूप में प्रतिष्ठित है। उनका काव्य निरंतर लोक कंठहार बना हुआ है।

इस सत्र में  वरिष्ठ मालवी कवि श्री कैलाश तरल को झलक निगम लोक संस्कृति सम्मान से अलंकृत किया गया। श्री नन्दकिशोर चौहान, इंदौर की पुस्तक मांडवो का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। 

आयोजन में प्रोफेसर श्री कृष्ण जोशी, वरिष्ठ कवि श्री अशोक भाटी, मालवी कवियित्री माया मालवेंद्र बधेका, सुनीता राठौर, अक्षय चवरे, खंडवा, रफीक नागौरी, नारायण मंघवानी आदि सहित अनेक लोक भाषा प्रेमी उपस्थित थे।

अतिथियों का स्वागत श्रीमती जेड श्वेतिमा निगम, श्री रुचिरप्रकाश निगम, डॉ भावना निगम, लक्षिता निगम आदि ने किया ।

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