Skip to main content

श्रावण - भादों मास के लिए सभी तैयारियां लगभग पूर्ण : सभी का सुखद अनुभव हो यही हमारा उद्देश्य : अध्यक्ष एवं कलेक्टर


उज्जैन | श्रावण -भादों मास में भगवान महाकाल के भक्तों, कावड़ यात्रियों, भक्ति भजनों, भजन मंडलियों से पूरा शहर भक्तिमय हो जाता है. इसी कड़ी में श्रद्धालुओं के सुलभ दर्शन, स्वछता, सुरक्षा आदि के मद्देनजर मंदिर द्वारा की जा रही तैयारियां पूर्णता की ओर हैं. मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष व जिला कलेक्टर श्री आशीष सिंह के दिशानिर्देश में मंदिर प्रशासक श्री गणेश कुमार धाकड़ द्वारा बताया है कि श्रद्धालुओं के स्वागत हेतु तैयारियां पूर्ण कर ली गयी हैं. सभी श्रेणियों के श्रद्धालुओं हेतु चाक-चौबंद व्यवस्था की जा रही है. देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं हेतु समुचित पार्किंग व्यवस्था रहेगी. उज्जैन आने वाले मुख्य मार्गों में जंहा इन्दोर से आने वाहन, दिल्ली, ग्वालियर, मक्सी से आने वाले वाहन कर्कराज मंदिर पार्किंग व भील धर्म शाला में अपने वाहन पार्क करेंगे. महिदपुर,आगर, कोटा से आने वाले वाहन ब्रिज से होते हुए त्रिवेणी संग्रहालय पर्किंग पर तथा बड़नगर, धार, रतलाम के यात्रीगणकार्तिक मेला ground पर या कर्क राज मंदिर पर बने पार्किंग स्थानों पर सुविधा से वाहन पार्क कर सकेंगे.
श्रद्धालुओ हेतु पार्किंग व्यवस्था निम्न 05 स्थानों पर की गई है : (01) कार्तिक मेला ग्राउंड पार्किंग (02) कर्कराज मंदिर (03) पुल के समीप हॉट बाजार (04) भील समाज धर्म शालाके पास (05) त्रिवेणी संग्रहालय के समीप सभी पार्किंग स्थल से निःशुल्क रिक्शा वाहन सुविधा सभी के लिए उपलब्ध होगी जंहा से वे गंगोत्री गार्डन, मुख्य प्रवेश द्वार, चारधाम मंदिर के पास तक पंहुच सकेंगे जिससे महिला, बच्चे, वृद्ध आदि विशेष रूप से लाभान्वित होंगें. चारधाम मंदिर से हरसिद्धि मंदिर मार्ग पर स्थित चार धाम पार्किंग पर जूता स्टैंड व अन्य कॉउंटर रहेंगे. * जूता स्टैंड * शीघ्र दर्शन * खोया - पाया * आकस्मिक चिकित्सा व * प्रसाद कॉउंटर जिससे वापसी में दर्शनार्थीगण बिना असुविधा जूते-चप्पल शीघ्र प्राप्त कर सकेंगे. श्रेणी वॉर दर्शन मार्ग : -------------------------------- 01 सामान्य दर्शनार्थीगण : ---------------------------- चारधाम से हरसिद्धि मंदिर के चौड़े मार्ग पर बने मुख्य प्रवेश मार्ग से शंखद्वार तक, शंखद्वार से प्रवेश कर, चिकित्सा कक्ष के समीप से ज़िग-जेग होकर कार्तिकेय मंडप पंहुचकर दर्शन लाभ लेंगें . 02 शीघ्रदर्शन अनुमति धारक : -------------------------------- चारधाम के समीप हरसिध्दि मार्ग पर अलग बने मार्ग से बड़ा गणेश के सामने से शंख द्वार, शंखद्वार से पृथक मार्ग से टनल वन होते हुए सीधे कार्तिक मंडप, पंहुचकर भगवान जी के दर्शन करेंगे. 03 पूजारी गण, पुरोहित गण एवं पत्रकार बंधु: ------------------------------- मंदिर के सम्माननीय पूजारी गण, पुरोहित गण व पत्रकार बंधु वर्तमान गेट न.04 एवं गेट न.05 से प्रवेश कर विश्राम धाम सभा मंडप, काला गेट होते हुए इसी रास्ते से दर्शन कर वापस आ सकेंगे. 04 कावड़-यात्री : -------------------------------- विभिन्न कावड़ यात्री चारधाम के निकट सामान्य दर्शनार्थी गण के साथ प्रवेश कर कार्तिक मंडप स्थित जल पात्र में जल अर्पण कर गणेश मंडपसे बाबा के दर्शन करेंगे । 06 सम्माननीय पूजारी जी, पुरोहितजी के यजमान, जल अर्पण रसीद धारी : -------------------------------- प्रशासनिक भवन के सामने के विशिष्ट अतिथि मार्ग व गेट न. 04 से प्रवेशकर सभा मंडप के जलपात्र से जलार्पण कर कालागेट से नंदीहॉल होकर भगवानश्री के दर्शन कर इसी मार्ग से लौटेंगे. 07 नियमित दर्शनार्थीगण ----------------------------- नियमित दर्शनार्थी गण सुबह 06 से 8.00 और शाम को 6.00 से 8.00, पूर्व निर्धारित समय अनुसार बड़े गणेश के पास की गली से गेट न. 04 से आवेंगे व इसी रास्ते से वापस जावेंगे । ०8. चलित भस्म आरती - ------------------------------ चार धाम मुख्य प्रवेश मार्ग से प्रवेश करते हुए शंख द्वार से आवेंगे जहाँ से एक पंक्ति मे चलते हुए फैसिलिटी सेंटर से टनल वन होते हुए कार्तिकेय मंडप पहुँचेंगे वहाँ से बिना रुके दर्शन कर सीधे निर्गम द्वार से बाहर जावेंगे. 09 सामान्य भस्म आरती अनुमति कॉउंटर ------------------------------ जो कि प्रातःकाल 7.00 बजे से प्रारम्भ होता है, हरसिद्धि मंदिर के पास स्थित अतिथि निवास से कार्यरत होगा.जंहा स्वयं उपस्थित होकर, ID प्रस्तुत कर, फोटो खिंचवा कर, पूर्णतः निःशुलक अनुमति बनाई जाती है.
१०. महाकाल मंदिर गर्भ ग्रह एवं नंदी हॉल सम्पूर्ण श्रावण भादो माह हेतु पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा । नंदी हाल में एक बेरिगेट लगाकर अतिविशिष्ट व जलाभिषेक रसीद धारियों को दर्शन कराए जाएँगे । * श्रद्धालुओं हेतु स्थान-स्थान पर पीने के पानी, सुरक्षा, आकस्मिक चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध रहेगी. * किसी भी जानकारी हेतु सामान्यजन मंदिर के कंट्रोल रूम न. 0734 2550 563 0734 2551 295 से सातों दिन 24 घंटे कभी भी संपर्क कर सकते हैं.

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

चौऋषिया दिवस (नागपंचमी) पर चौऋषिया समाज विशेष, नाग पंचमी और चौऋषिया दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति और अर्थ: श्रावण मास में आने वा ली नागपंचमी को चौऋषिया दिवस के रूप में पुरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "चतुरशीतिः" से हुई हैं जिसका शाब्दिक अर्थ "चौरासी" होता हैं अर्थात चौऋषिया समाज चौरासी गोत्र से मिलकर बना एक जातीय समूह है। वास्तविकता में चौऋषिया, तम्बोली समाज की एक उपजाति हैं। तम्बोली शब्द की उत्पति संस्कृत शब्द "ताम्बुल" से हुई हैं जिसका अर्थ "पान" होता हैं। चौऋषिया समाज के लोगो द्वारा नागदेव को अपना कुलदेव माना जाता हैं तथा चौऋषिया समाज के लोगो को नागवंशी भी कहा जाता हैं। नागपंचमी के दिन चौऋषिया समाज द्वारा ही नागदेव की पूजा करना प्रारम्भ किया गया था तत्पश्चात सम्पूर्ण भारत में नागपंचमी पर नागदेव की पूजा की जाने लगी। नागदेव द्वारा चूहों से नागबेल (जिस पर पान उगता हैं) कि रक्षा की जाती हैं।चूहे नागबेल को खाकर नष्ट करते हैं। इस नागबेल (पान)से ही समाज के लोगो का रोजगार मिलता हैं।पान का व्यवसाय चौरसिया समाज के लोगो का मुख्य व्यवसाय हैं।इस हेतू समाज के लोगो ने अपन