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डॉ. अंबेडकर के चिंतन के विविध आयाम और उनकी प्रासंगिकता - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा | डॉ अंबेडकर के चिंतन के विविध आयाम और उनकी प्रासंगिकता पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी

 

डॉ. अंबेडकर के चिंतन के विविध आयाम और उनकी प्रासंगिकता - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा | 
Various Aspects of Dr. Ambedkar's Thinking and their Relevance - Prof. Shailendra Kumar Sharma

भेदभावरहित मानवीय विश्व की रचना का संदेश है डॉअंबेडकर के चिंतन में 
डॉ अंबेडकर के चिंतन के विविध आयाम और उनकी प्रासंगिकता पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी 


   

देश की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा डॉ अंबेडकर के चिंतन के विविध आयाम और उनकी प्रासंगिकता पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें देश - दुनिया के अनेक विद्वान वक्ताओं और साहित्यकारों ने भाग लिया।  कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि वरिष्ठ प्रवासी साहित्यकार एवं अनुवादक श्री सुरेशचंद्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे थे। मुख्य वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद् डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, वरिष्ठ पत्रकार डॉक्टर शंभू पवार, झुंझुनू, श्री राकेश छोकर,  नई दिल्ली, डॉक्टर अलका पोतदार, मुंबई, डॉ आशीष नायक, रायपुर, महासचिव डॉ प्रभु चौधरी एवं उपस्थित वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष शिक्षाविद् श्री ब्रजकिशोर शर्मा, उज्जैन ने की।





वरिष्ठ प्रवासी साहित्यकार, पत्रकार एवं अनुवादक श्री सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे ने कहा कि डॉक्टर अंबेडकर को भारत के साथ दुनिया के तमाम देशों में महान समाज सुधारक, विद्वान और न्यायविद् के रूप में जाना जाता है। उन्होंने पूरी दुनिया को समानता और बन्धुत्व की नई राह दिखाई।  







लेखक एवं संस्कृतिविद् प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि डॉ अंबेडकर के चिंतन के आयाम अत्यंत व्यापक हैं। वे श्रेष्ठ विचारक ही नहीं, महान कर्मयोद्धा भी थे। उनके विचारों में भेदभावरहित मानवीय विश्व की रचना का संदेश अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र को राजनीतिक लोकतंत्र से अधिक महत्वपूर्ण माना है, जो स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्व पर टिके हों। उन्होंने वर्ण, जाति, नस्ल, रंग जैसे समस्त प्रकार के विभेदकारी तत्त्वों से मुक्त होने की राह दिखाई। उन्होंने सामाजिक दरार और खूनी क्रांति से बचाव के लिए सामाजिक -  आर्थिक परिवर्तन को तेज करते हुए प्रजातांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने पर बल दिया। वे सामाजिक और आर्थिक ढांचे में एक व्यक्ति और एक मूल्य के सिद्धांत को मैदानी हकीकत में बदलने के लिए प्रेरणा देते हैं।




tyle="color: #2b00fe;">कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ब्रजकिशोर शर्मा ने कहा कि डॉ अंबेडकर की दृष्टि अत्यंत व्यापक थी। उन्होंने सामाजिक विषमता को समाप्त करने के लिए अविस्मरणीय प्रयास किए। सभ्यता के विकास में प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के बीच डॉ आंबेडकर का नाम सदैव बना रहेगा। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए हैं, जो आज प्रासंगिक हैं। 





विशिष्ट अतिथि डॉक्टर शंभू पंवार, झुंझुनू ने कहा कि डॉक्टर अंबेडकर जी समानता के लिए प्रतिबद्ध रहे। प्रत्येक व्यक्ति को विकास के समान अवसर उपलब्ध हो, इसके लिए उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने भारतीय समाज के व्याप्त कुरीतियों और वर्ण व्यवस्था के विरुद्ध उद्घोष किया।



कार्यक्रम की संकल्पना और  डॉक्टर अंबेडकर के अवदान पर  महासचिव डॉक्टर प्रभु चौधरी ने प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ अम्बेडकर ने भारत के संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हुए शोषित - वंचित वर्ग को समानता का अधिकार दिलाया। वे नए भारत के राष्ट्र निर्माता थे। विश्व मानवतावादी डॉक्टर अंबेडकर ने ज्ञान के अद्वितीय प्रकाश से संपूर्ण मानवता को आलोकित किया। सामाजिक न्याय के सिद्धांत को प्रतिष्ठित करने में उनका अविस्मरणीय योगदान है।



संस्था के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे ने कहा कि डॉ आंबेडकर भारतीय समाज के शुभचिंतक और स्वाभिमानी व्यक्तित्व के धनी थे। वे व्यक्ति पूजा के विरोधी थे। उन्होंने सामाजिक जकड़न को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए। 



विशिष्ट वक्ता डॉ अलका पोतदार, मुंबई ने कहा कि डॉक्टर अंबेडकर स्त्रियों की शिक्षा और समाज में समानता के पक्षधर थे। उन्होंने हिंदू कोड बिल लागू कर अविस्मरणीय योगदान दिया। भौतिक गुलामी से मानसिक गुलामी अधिक घातक है, इस बात की ओर उन्होंने संकेत दिया। विधिसम्मत संविधान से भारत की एकता और अखंडता परिपूर्ण हो रही है।


डॉ प्रतिभा येरेकार ने कहा कि डॉक्टर अंबेडकर का व्यक्तित्व बहुआयामी था वे एक साथ महान समाज सुधारक, पत्रकार, राजनीतिज्ञ, कानूनविद और लेखक थे।


प्रारंभ में सरस्वती वंदना साहित्यकार डॉ लता जोशी, मुंबई ने की। स्वागत गीत साहित्यकार डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर ने प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण डॉ शैल चंद्रा, धमतरी ने दिया। संस्था का प्रतिवेदन  साहित्यकार डॉ गरिमा गर्ग, चंडीगढ़ ने प्रस्तुत किया। उन्होंने डॉक्टर अंबेडकर पर केंद्रित कविता सुनाई। अतिथि परिचय साहित्यकार डॉक्टर मनीषा सिंह, मुंबई ने दिया। 


अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में  संस्था की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉक्टर सुवर्णा जाधव, मुंबई, डॉ मुक्ता कौशिक, रायपुर, श्री हरेराम वाजपेयी, इंदौर, डॉ आशीष नायक, रायपुर, डॉ पूर्णिमा कौशिक, रायपुर, डॉ राकेश छोकर, नई दिल्ली, डीपी शर्मा, डॉक्टर संगीता पाल, कच्छ, डॉ सुषमा कोंडे, डॉक्टर ममता झा, मुम्बई, डॉ शिवा लोहारिया, जयपुर, डॉ रोहिणी डाबरे, अहमदनगर आदि सहित अनेक प्रतिभागियों ने भाग लिया।


अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन डॉ मुक्ता कौशिक, रायपुर ने किया। आभार प्रदर्शन वरिष्ठ साहित्यकार श्री अनिल ओझा, इंदौर ने किया।
















डॉ. आंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस पर सविनय नमन 

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